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    Published On : Wed, Sep 19th, 2018

    बिना शिक्षक के चल रहा है ताजाबाद उर्दू जूनियर कॉलेज, ढाई महीने से नहीं हुई है कॉमर्स और आर्ट्स की एक भी क्लास

    नागपुर : देश में शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया जा रहा है. उसके लिए कई प्रयास किए भी जा रहे हैं. लेकिन कही न कही जमीनी स्तर पर देखे तो लगता है कि यह सभी प्रयास पूरी तरह से असफल होते हुए दिखाई दे रहा है. शहर में कई ऐसे सरकारी कॉलेज हैं, जहां पर विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं और अब ऐसी स्थिति में पढ़ने की उम्मीद विद्यार्थियों से कैसे की जा सकती है. नागपुर महानगर पालिका की कुछ स्कूलों की हालत ठीक है लेकिन कई स्कूलों की हालत काफी खराब स्थिति में है. कई कॉलेजों का तो हाल और भी बुरा है.

    ऐसा ही एक कॉलेज है ताजाबाद उर्दू हाईस्कूल और जूनियर कॉलेज. कहने के लिए तो यहाँ पर तीनों फैकल्टी है. साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स. विद्यार्थियों की संख्या भी 11वीं और 12वीं में 140 के करीब है. लेकिन कॉमर्स और आर्ट्स के लिए शिक्षक ही नहीं है. यहां इन दोनों क्लासेस के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए केवल 4 ही शिक्षक हैं. कई विषयों के लिए शिक्षक ही नहीं है. इसमें भी 3 शिक्षक साइंस के लिए है और एक इंग्लिश का शिक्षक है और वही बाकी दोनों फैकल्टी को भी पढ़ाते हैं.

    कॉमर्स के 12वीं के विद्यार्थियों की अब तक नहीं हुई क्लासेस
    कॉमर्स के किसी भी विषय के लिए शिक्षक नहीं है. इसमें हैरान करनेवाली बात यह है कि इस साल का सत्र शुरू हुए अभी करीब ढाई महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक विद्यार्थियों की एक भी क्लास नहीं हुई है. अभी कुछ ही दिनों में परीक्षा भी होगी. कॉमर्स में अकॉउंट, एसपी, ओसी, और इकनोमिक कोई भी विषय की क्लासेस नहीं हुई है. साइंस में गणित के शिक्षक नहीं है. यानी 4 शिक्षकों में 3 शिक्षक साइंस के लिए हैं और एक इंग्लिश का शिक्षक है और इंग्लिश का शिक्षक ही बाकी क्लास को भी पढ़ाते हैं. पिछले वर्ष कई शिक्षक थे जिन्हें पीरियड के अंतर्गत भुगतान किया जाता था.

    लेकिन इस बार इस प्रक्रिया में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है. शिक्षा विभाग को भी पता नहीं कि साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के लिए कितने शिक्षक होते हैं. जानकारी के अनुसार साइंस में मैथ्स की पोस्ट नहीं निकाली है. इकोनॉमिक्स की पोस्ट भी नहीं निकाली है, साथ ही इसके आर्ट्स के लिए पोलिटिकल साइंस की भी पोस्ट नहीं निकाली गई हैं. कुल मिलाकर 11वीं और 12वीं के लिए यहाँ चार ही शिक्षक हैं, जबकि वे भी केवल साइंस के लिए ही हैं. दोनों क्लासों को पढ़ाने के लिए कुल मिलाकर 8 शिक्षकों की जरूरत है. अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि विद्यार्थियों की क्लास नहीं हो पायी है और स्कूल में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थी पढ़े तो पढ़े कैसे. विद्यार्थियों ने भी कई बार शिक्षकों से और स्कूल के प्रिंसिपल से शिकायत की है. लेकिन उन्होंने इस समस्या को सुलझाने का कोई प्रयास नहीं किया.

    स्कूल और विद्यार्थियों की जानकारी ही नहीं है प्रिंसिपल के पास
    स्कूल और कॉलेज की प्रिंसिपल कांता वावरे को न तो स्कूल के बारे में जानकारी है और न ही विद्यार्थियों के बारे में. प्रिंसिपल को यह भी नहीं पता की दोनों क्लास में कुल कितने विद्यार्थी पढ़ते हैं. शिक्षकों की कमी के बारे में स्कूल की ओर से क्या प्रयास किए जा रहे है यह पूछने पर उन्होंने बताया कि स्कुल की तरफ से पहले के प्रिंसिपल ने शिक्षा विभाग को पत्र भेजा था. क्लासेस नहीं होने की बात पर उन्होंने कहा कि क्लास तो बराबर हो रही है. कई जवाबों का वो टालमटोल जवाब देती रहीं.

    जल्द होगी नियुक्ति स्कूल के शिक्षकों के बारे में मनपा शिक्षणाधिकारी की जानकारी
    शिक्षकों की कमी केवल ताजाबाद उर्दू हाईस्कूल और जूनियर कॉलेज में तीन महीने की बात नहीं है. कई वर्षों से कॉलेज का यही हाल है. इस स्कूल और कॉलेज में मूलभूत सुविधा न मिलने के कारण भी विद्यार्थी काफी परेशान हैं. कुछ दिन पहले ही शिवसेना के कार्यकर्ताओ ने यहां हंगामा किया था. कॉलेज में शिक्षकों की कमी के बारे में मनपा की शिक्षणाधिकारी संध्या मेड़पल्लीवार ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रक्रिया हो रही है. जल्द ही कॉलेज में शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी.

    शमानंद तायडे

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