Published On : Tue, Sep 11th, 2018

पांढरकवड़ा की आतंकी बाघिन को शूट करने पर सुको की मुहर, हाईकोर्ट के फौसले को रखा बरकरार

नागपुर: पांढरकवड़ा में आतंक मचानेवाली बाघिन को शूट करने के वन विभाग के आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी गई थी. इस पर हाईकोर्ट ने भी इस पर मुहर लगा दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस दया याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को कायम रखा है. माना जा रहा है कि किसी बाघ को बचाने के लिए दया याचिका अपने आप में पहली बार सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है.

यह याचिका वन्यजीव प्रेमी और कार्यकर्ता अजय दुबे की भोपाल स्थित एनजीओ प्रयत्न और सेव टाइगहर कम्पेन के सिमरत सिंधू द्वारा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस के.एम. जोसफ की बेंच के समक्ष दायर की थी.

दोनों याचिकाकर्ताओं ने जस्टिस एम.बी. लोकुर ने पैरवी की. जस्टिस लोकुर ने दो याचिकाएं सुनी जिसमें मुंबई के अर्थ ब्रिगेड के पी.वी. सुब्रमणियम और नागपुर के डॉ. जेरिल बनाइत द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में दायर की गई याचिका शामिल है. डॉक्टर बनाइत की याचिका वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक ए.के. मिश्रा द्वारा बाघ टी-1 को शूट करने के दिए गए आदेश को लेकर दायर की गई थी.