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    Published On : Tue, Sep 11th, 2018

    फडणवीस सरकार की वादाखिलाफ़ी, गणेशोत्सव के दौरान होमगार्ड्स नहीं देंगे अपनी सेवाएँ


    नागपुर – राज्य में शुरू होने जा रहे सबसे बड़े उत्सव गणेशोत्सव के दौरान होमगार्ड अपनी सेवाएँ नहीं देंगे। नागपुर में होमगार्ड के तौर पर सेवा दे रहे लोगों ने अपनी प्रलंबित माँगो को लेकर ये फ़ैसला लिया है। आम तौर पर सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस के पास होती है लेकिन पुलिस दल की कमी के चलते महत्वपूर्ण अवसरों पर होमगार्ड्स की सेवा ली जाती है।

    गणेशोत्सव के दौरान या अन्य विशेष अवसरों पर होमगार्ड पुलिस की मदत करते है जिसके ऐवज में उन्हें निर्धारित मानधन सरकार द्वारा दिया जाता है। राज्य भर में लगभग 40 हजार होमगार्ड है जबकि नागपुर में ढाई हज़ार के आसपास, होमगार्ड्स ने राज्य सरकार से अपनी प्रलंबित माँगो को लेकर ये फ़ैसला लिया है। इन्होने मौजूदा मुख्यमंत्री के प्रति अपनी हताशा व्यक्त करते हुए उन्हें वादाखिलाफ़ी करने वाला नेता करार दिया है।

    दरअसल राज्य भर के होमगार्ड अपने मानधन और अन्य माँगो को लेकर बीते कई वर्षों से सरकार से लड़ाई लड़ रहे है। वर्त्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जब विपक्ष में थे तब उन्होंने उनके दल की सत्ता आने पर होमगार्ड की सभी समस्याओं को सुलझाने का दावा किया था जिसे पूरा करने में वो अब तक नाकामियाब ही साबित हुए है।

    होमगार्ड किसी भी प्रकार के सुरक्षा दल में शामिल नहीं है। अग्रेजों के शाषनकाल के दौरान मुंबई प्रांत के तत्कालीन गृहमंत्री मोरारजी देसाई ने होमगार्ड संगठन की स्थापना की थी। जिसका मकसद विशेष अवसरों पर पुलिस दल की कमी को पूरा करना था। होमगार्ड मानसेवी यानि ( मन से अपनी सेवा देते है ) इनका काम लगभग पुलिस के जैसा ही होता है लेकिन इन्हे मिलने वाला मानधन अन्य सुरक्षा एजेंसियों के किसी कर्मचारी के मुक़ाबले बेहद कम होता है। राज्य के एक होमगार्ड को वर्ष भर में 45 दिन का रोजगार हासिल होता है जिसके लिए सरकार उन्हें प्रत्येक दिन के हिसाब से एकमुश्त 400 रूपए का भुगतान करती है। होमगार्ड की नियुक्ति पुलिस दल के जैसी ही होती है। इसलिए पुलिस की भर्ती में लगे बेरोजगार युवक इसमें बड़ी संख्या में भर्ती होते है। लेकिन समय बीत जाने के बाद उनके पास कोई विकल्प नहीं बचता।

    गणेशोत्सव के दौरान अपनी सेवा न देने का फ़ैसला करने वाले एक होमगार्ड ने बताया की उन्हें इस सेवा के लिए न ही उचित मानधन मिल रहा है और न ही सम्मान, इस सेवा से जुड़ा व्यक्ति किसी अन्य जगह काम भी नहीं कर सकता क्यूँकि ड्यूटी कभी भी लग सकती है। वो इस सेवा से सिर्फ इसी आशा के साथ जुड़े है की किसी न किसी दिन सरकार उन्हें अन्य राज्यों की तरह नियमित करने का फैसला कर ले। होमगार्ड द्वारा दी जाने वाली सेवा के लिए सरकार द्वारा भुगतान औसतन तीन महीने बाद किया जाता है। एक दिन में उनसे काम के 12 घंटे लिए जाते है होमगार्ड्स का कहना है की उन्हें इस सरकार से काफ़ी उम्मीदें थी जो अब निराशा में बदल रही है।

    क्या है माँगे

    स्वयंम सेवा से नियमित सेवा में हस्तांतरण
    अन्य राज्यों की तरह नियमित वेतनमान देने
    वर्ष भर काम मिलना
    प्रत्येक 3 वर्ष बाद ली जाने वाली एलिजिबिलिटी टेस्ट को ख़त्म करना
    होमगार्ड सेवा के लिए निर्धारित 12 वर्ष की सेवा के फ़ैसले को निरस्त कर 65 वर्ष किया जाना
    होमगार्ड को मेडिकल सेवा,बीमा और दुर्घटना बीमा की सुविधा लागू करना
    सेवा की समाप्ति के बाद पेंशन की सुविधा दिया जाना

    कौन है होमगार्ड क्या होता है इनका काम

    देश में सबसे पहले ब्रिटिश शासनकाल के दौरान मुंबई प्रांत के गृहमंत्री मोरारजी देसाई ने इस व्यवस्था को शुरू कराया था
    आजादी के बाद कई अन्य राज्यों में इसी व्यवस्था को लागू किया गया
    व्यवस्था का मक़सद युवाओं को वर्ष के कुछ दिन रोजगार उपलब्ध करना और उन्हें आर्थिक मदत देना मकसद था
    होमगार्ड की ही तर्ज पर अब कई सरकारी विभागों में अनियमित मैनपावर का इस्तेमाल किया जाता है
    होमगार्ड औसतन एक दिन में 12 घंटे की सेवा देते है
    इसका काम केवल पुलिस के सहायक के रूप में होता है ये किसी भी तरह का एक्शन नहीं ले सकते
    होमगार्ड में भर्ती होने की प्रक्रिया लगभग पुलिस के सामान की होती है
    10 वी पास कोई भी युवा शारीरिक परिक्षण को देकर इसमें भर्ती हो सकता है
    समय के साथ मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़,हरियाणा जैसे राज्यों ने होमगार्ड्स को नियमित कर उन्हें न केवल वर्ष भर रोज़गार उपलब्ध कराया बल्कि निर्धारित वेतनमान को भी लागू किया है।

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