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    Published On : Sat, Sep 15th, 2018

    सुराबर्डी ‘मिडोस क्लब’ मामले पर सख्त हुआ मेट्रो रीजन प्राधिकरण

    नागपुर: नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता(पश्चिम) ने मेसर्स अंकुर एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड को लिखित नोटिस देकर सुराबर्डी ‘मिडोस क्लब’ परिसर में अवैध रूप से निर्मित निर्माणकार्यों को ढहाने के लिए २४ घंटे का अल्टिमेटम दिया है. निर्देश का पालन न करने पर बिना पूर्व सूचना के अनाधिकृत निर्माणकार्य तोड़ने की चेतावनी भी दी गई है. साथ ही कार्रवाई का पूरा खर्च भी वसूलने की जानकारी दी.

    प्राधिकरण ने ३० जुलाई २०१८ को बैरामजी टाउन स्थित मेसर्स अंकुर एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड को पत्र लिख सूचना के साथ निर्देश दिया कि नागपुर ग्रामीण तहसील,मौजा सुराबर्डी,खसरा क्रमांक १०३/१,१०३/२ जगह पर नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण की अनुमति लिए बगैर व्यवसायिक उपयोग के लिए सभागृह व कॉटेज का आरसीसी तल मंजिल व पहली मंजिल पर अवैध निर्माणकार्य किया गया है. प्राधिकरण ने सम्पूर्ण बांधकाम को अवैध ठहराया है. इसलिए २४ घंटे के भीतर अनाधिकृत बांधकाम ढहाने का निर्देश दिया गया है. अन्यथा महाराष्ट्र प्रादेशिक नियोजन व नगर रचना अधिनियम की धारा ५३ अंतर्गत बिना पूर्व सूचना के प्राधिकरण के दस्ते द्वारा अनाधिकृत बांधकाम ढहाने की चेतावनी दी गई है.

    प्राधिकरण ने उक्त पत्र की प्रति वाड़ी पुलिस निरीक्षक, प्राधिकरण के कार्यकारी अभियंता-१, महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कंपनी लिमिटेड के कार्यकारी अभियंता को भी दी गई है.

    याद रहे कि सुराबर्डी स्थित लघु सिंचन प्रकल्प ( छोटा सा तालाब ) तक आवाजाही के मार्गों पर बृजकिशोर हरगोविंद अग्रवाल समूह ने कब्ज़ा कर मार्ग को बंद कर दिया है. जिसे शुरू कराने के लिए एक शिकायतकर्ता ने राज्य के जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन को पत्र लिख ध्यानाकर्षित किया था.

    शिकायतकर्ता के अनुसार इसके पूर्व शिकायत नागपुर स्थित अजनी के कार्यकारी अभियंता से की थी, लेकिन उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया. बृजकिशोर हरगोविंद अग्रवाल समूह ने १० वर्ष पूर्व सुराबर्डी मिडोस नामक क्लब शुरू किया था. इस समूह ने धीरे-धीरे निकट के तालाब परिसर को अपने कब्जे में लेकर वहां के पानी को रोक कर बिजली से रोशनाई की.

    दूसरी ओर १० साल पूर्व उक्त समूह के अंकुर अग्रवाल को सिंचाई विभाग की २.०१ हेक्टर जगह पर्यटन विकास के लिए दी गई थी. जिसके एवज में अंकुर अग्रवाल को प्रतिवर्ष ६० हज़ार रुपए भरना अनिवार्य किया गया था. लेकिन इन १० वर्षों में अंकुर अग्रवाल ने रत्तीभर भी पर्यटन विकास के नाम पर कुछ भी नहीं किया. इसी जगह को अंकुर अग्रवाल ने लॉन में तब्दील कर व्यवसायिक इस्तेमाल कर करोड़ों की आय अर्जित की. साथ ही निकट के तालाब के पानी का भी दुरुपयोग कर आसपास के सिंचित क्षेत्रों को बाधित किया.

    अंकुर अग्रवाल को वर्ष २००४ में १० वर्ष के लिए लीज पर जगह दी गई थी. जिसकी समय सिमा वर्ष २०१४ में ख़त्म हो गई थी. स्थानीय कार्यकारी अभियंता कार्यालय की शह पर ३ वर्ष मुफ्त में जगह का उपयोग कर वर्ष २०१८ में लीज की मियाद बढ़ाने के लिए निवेदन किया था, जिसमें कई त्रुटियां पाई गई थीं.

    जलसंपदा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार अंकुर अग्रवाल के लीज का नवीनीकरण नहीं किया गया है. शिकायतकर्ता ने अंकुर अग्रवाल द्वारा की गई नियमों की अनदेखी की जाँच कर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की थी.

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