Published On : Sat, Aug 4th, 2018

‘सुपरसीड’ की नौबत से बचने के लिए मनपा को कर्ज का सहारा

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नागपुर मनपा की दिनोदिन आर्थिक स्थिति चरमराती जा रही है. नागपुर से लेकर दिल्ली तक मनपा में सत्ताधारी पक्ष की सत्ता होने के बावजूद आर्थिक हालात में सुधार होता नहीं दिख रहा. इससे यह आभास हो रहा है कि मनपा सुपरसीड होने की कगार पर पहुंच गई है. उक्त विचार कांग्रेस के वरिष्ठ नगरसेवक किशोर जिचकर ने चर्चा के दौरान व्यक्त किया. मनपा की आर्थिक हालत जर्जर रखने के पीछे का राज राजनैतिक कारण भी बताए जाने का सिलसिला शुरू हो गया है. अब मनपा प्रशासन के पास हाथ खड़े करने या फिर जल्द ही २०० करोड़ का लोन ‘टॉप अप’ करवाना ही अंतिम उपाययोजना शेष रह गई है.

जिचकर के अनुसार मनपा में भाजपा का तीसरा टर्म बतौर सत्तापक्ष चल रहा. इसके बाद भी मनपा प्रशासन पर भाजपा की पकड़ कमजोर साबित हो रही. कल मनपा प्रशासन द्वारा जारी अधिसूचना में नगरसेवकों सह पदाधिकारियों पर खर्च का अंकुश लगाने से खुद सत्तापक्ष सकते में आ गया.

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वर्तमान स्थाई समिति ने वर्ष २०१८ – १९ का आर्थिक बजट अनुदानों पर आधारित पेश किया. बजट तैयार करते वक़्त काफी लापरवाही बरती गई, जिस पर मनपा प्रशासन ने खेद प्रकट करते हुए स्थाई समिति सभापति को वर्तमान परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए स्थाई समिति का कार्यभार संचलन करने की हिदायत दी थी. सभापति ने इस बैठक में हुई गलती को भी स्वीकार किया. जबकि स्थाई समिति सभापति खुद मुख्यमंत्री गुट के हैं. इसके बावजूद मनपा की कड़की समझ से परे है. ऐसी ही कड़की जब विलासराव देशमुख के मुख्यमंत्री कार्यकाल में हुई थी तो उन्हें जानकारी मिलते ही उन्होंने मनपा को ३०० करोड़ रुपए की विशेष सहायता निधि देकर मनपा की आर्थिक परिस्थिति को संवारा था. क्या वर्तमान मुख्यमंत्री भी मनपा की कड़की दूर करने के लिए ३७५ करोड़ का विशेष अनुदान देंगे, यह बड़ा सवाल है.

जिचकर ने बताया कि मनपा की दयनीय आर्थिक अवस्था और प्रशासन के कड़क रुख से सत्तापक्ष हैरान – परेशान है. इस अड़चन पर अफवाहों का बाजार गर्म है. जिसे भाजपा के दो दिग्गज नेताओं के मध्य अंदरूनी संघर्ष बतलाया जा रहा है. दिल्ली की शह पर नागपुर लोकसभा में नकारात्मक परिणाम हो इसलिए नागपुर मनपा की तबियत बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाई जा रही है.

आज महापौर,उपमहापौर और स्थाई समिति सभापति की विशेष निधि अड़चन में आ जाएगी. ऐसी परिस्थिति में जोन अन्तर्गत इमर्जेंसी कामों को अंजाम दिया गया तो नगरसेवकों, पदाधिकारी सह अधिकारियों के प्रस्ताव अधर में लटक सकते हैं.

गुरुवार को मनपा के अधीक्षक से लेकर आयुक्त की अहम बैठक में मनपा की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख प्रस्ताव तैयार करने व हस्ताक्षर करने वालों को हस्ताक्षर करने की वजह भी लिखने का निर्देश दिया गया.

हालात तो इतनी जर्जर हो गई कि कनक के तहत काम करने वाले हजारों कामगारों को २ माह से वेतन नहीं दिया गया. यह जानकारी खुद कनक के सूत्रों ने दी. परिवहन विभाग अन्तर्गत बस संचालकों को बसों में ईंधन डालने के लिए हर सिरे से पसीना बहाना पड़ रहा है. क्या इसका मतलब यह निकाला जाए कि नागपुर के स्थानीय स्वराज संस्था का अस्तित्व अब खतरे में आ गया है.

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