Published On : Sun, Mar 26th, 2017

संडे स्पेशल : एक घटना ने कर दिया मोटा लेकिन कायम है वर्दी का जज़्बा!

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नागपुर:
मोटापा यूं तो हमेशा ही पुलिसवालों के लिए एक मुसीबत बना है लेकिन आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे पुलिस कर्मी की जो अपना कर्तव्य निभाते हुए एक ऐसी घटना का शिकार हो गया जिसके बाद मोटापा उनकी मजबूरी बन गई। आप सोच रहे होंगे भला ऐसा क्या हुआ जो ये जनाब 55 किलो से सीधे 160 किलो के हो गए। हालांकि गौरतलब ये है इस सब के बावजूद इस पुलिस कर्मी का अपने कर्तव्य के प्रति लगन और जज़्बा मंद नहीं पड़ा।

मिलिए पुलिस सब इन्पेक्टर उत्तम भगवान पाटिल से, जो इस समय नागपुर के गिट्टीखदान पुलिस स्टेशन में कार्यरत हैं। वर्ष 1982 में बतौर सिपाही लकड़गंज पुलिस स्टेशन के अंतर्गत नाइट ड्यूटी के दौरान एक अपराधी से मुठभेड़ के दौरान उत्तम पाटिल पर चाकू से लगातार वार किए गए थे, जिसके बाद उन्हें पैरों में 24 टांके लगाए गए। इलाज के बाद वे दवा लेते रहे और फिर अचानक उनका वजन तेजी से बढ़ने लगा और कुछ ही दिनों में दोगुना हो गया।


नागपुर टुडे यह स्पष्ट करता है कि इस खबर में हम किसी भी रूप में किसी पुलिस अधिकारी या उसके मोटापे का मजाक नहीं उड़ा रहे हैं। एक अपराधी के द्वारा चाकू मारने से यह पुलिस इन्स्पेक्टर मोटा कैसे हुआ इसकी सच्चाई हम पाठको को बताना चाहते हैं।

31 अगस्त 1981 में उत्तम पाटिल बतौर सिपाही नागपुर पुलिस मुखालय में हुए थे। उस समय उनका वजन सिर्फ 55 किलो था। 36 साल नागपुर पुलिस में रहते हुए पांचपावली, लकड़गंज, कलमना, सदर, क्राइम ब्रांच, स्पेशल ब्रांच और गिट्टीखदान पुलिस स्टेशन को सेवा दी। पाटिल को पुलिस विभाग में उल्लेखनीय कार्य के लिए कुल 282 रिवार्ड मिल चुके हैं साथ ही 5 प्रशस्ति पत्र भी दिए गए हैं। इन सम्मान में डीजी स्तर का सम्मान भी शामिल है। चूंकि वे क्राइम ब्रांच में 16 साल काम कर चुके हैं इसलिए उन्हें अपराधियों की मानसिकता की गहरी समझ हैं।

हालांकि 1982 की उस घटना के बाद मोटापा उनकी पदोन्नति में हमेशा आड़े आया लेकिन वे अपना काम करते रहे। 1989 में पीएसआई पद की विभागीय परीक्षा में मैरिट में आने के बावजूद सिर्फ मोटापे के कारण उन्हें प्रमोशन नहीं मिल पाया था। लेकिन वे लगातार प्रयास करते रहे और 2013 की परीक्षा में उन्हें पीएसआई के रूप में पदोन्नति मिल गई।

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उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का जिक्र करते हुए पाटिल ने बताया कि रात 1 बजे के बीच नेहरू नगर लकड़गंज में कुछ कॉल आया था। उस वक्त उत्तम पाटिल और कुछ पुलिस कर्मचारी साइकिल से नेहरू नगर पहुंचे जहां कुख्यात अपराधी मुन्ना मानकर अपने कुछ साथियों के साथ किसी वारदात को अंजाम देने आया था।

मानकर का अवैध शराब का व्यवसाय भी था। इसी दौरान पाटिल के कुछ सहयोगी पुलिस बल बुलाने चले गए और पाटिल अकेले ही मानकर और उसके गुंडों से जूझते रहे। मानकर ने मौके का फायदा उठाकर धारदार चाकु से पाटिल के पैर पर लगातार वार किए।

पुलिस स्टाफ के आने तक पाटिल ने एक अपराधी को दबोच कर रखा था। तब तक उत्तम पाटिल का काफी खून बह गया था। उन्हें तुरंत मेयो अस्पताल में भर्ती किया गया वहा उनके पैर में 24 टांके लगे। इसके बाद एक निजी अस्पताल में 19 दिन तक उनका इलाज चला। दवाई चल रही थी कि अचानक उनका वजन बढ़ने लगा और कुछ ही सालों में उनका वजन 160 किलो हो गया।

हालांकि उन्होने बढ़ते वजन को कम करने के लिए काफी इलाज किया और अपने स्तर पर भी खानपान एवं व्यायाम किया लेकिन नतीजा सिफर रहा। यहां तक कि उन्होंने अनेक हर्बल उत्पादों का सहारा लिया और 6 महीनों तक बिना कुछ खाए सिर्फ हर्बल पावडर और टेबलेट्स पर ही रहे। उनके इस प्रयास का भी कोई खास परिणाम सामने नहीं आया और वे कुछ ही किलो वजन कम कर पाए हैं। वर्तमान में उनका वजन 160 किलो से घटकर 124 किलो हुआ है।


उन्हें ब्लड प्रेशर, शुगर, थायराइड जैसे बीमारियों ने जकड़ लिया है लेकिन उन्हें किसी बात का मलाल नहीं है। उनका प्रयास अब भी जारी है। उनका एक बेटा अमेरिका में इंजीनियर है और एक बेटा और बेटी पुणे में इंजीनियर हैं। बच्चों की परवरिश के दौरान उन्हें अपना इलाज बीच में ही बंद करना पड़ा क्योंकि वे महंगी दवाओं का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं थे। लेकिन वे पूरी निष्ठा से आज भी अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।

फिलहाल वह गिट्टीखदान पुलिस स्टेशन में बतौर पुलिस सब इन्पेक्टर पद पर तैनात हैं। नागपुर टुडे उनके जज़्बे को सलाम करता है।


…रविकांत कांबले (नागपुर टुडे)

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