Published On : Fri, Jan 24th, 2020

संघर्ष और मेहनत ने बनाई सफलता की राह, घपेश ने हासिल की पीएचडी

Advertisement

नागपुर– संघर्ष के बाद कामयाबी मिलती है भले ही इसमें कितनी भी मुसीबतें आए। संघर्ष कभी खाली नहीं जाता। ऐसी ही सफलता हासिल की है, गडचिरोली के दुर्गम भाग में रहनेवाले घपेष ढवळे ने। घपेष को अभी हालही में पीएचडी से पुरुस्कृत किया गया है। पिछले 10 वर्ष से ज्यादा समय से वे नागपुर में रहते है।

अपने गांव से आने के बाद उन्होने एमएमसी (मास कम्युनिकेशन ) किया, इसके बाद इसमें नागपुर से मास कॉम में (नेट-सेट ) करनेवाले वे पहले विद्यार्थी है। इसके बाद उन्होंने कई न्यूज़ चैनल और समाचार पत्रों में काम किया। इसके साथ ही उन्होंने पीएचडी की अपनी तैयारियां भी शुरू रखी। पीएचडी में उनका विषय था ‘ स्टडी ऑफ़ द पोलिटिकल ईन्फुलन्स ऑन न्युज पेपर जर्नालिस्ट “। घर की परेशानी को अपनी पढ़ाई के बीच नहीं आने देने की आदत ने घपेष को सफलता दिलाई।

Advertisement

घपेश ढवळे ने अपनी स्कुली शिक्षा गडचिरोली जिले के आरमोरी तहसील स्थित मानापुर गांव से कि जो की आदीवासी बहुल इलाका माना जाता हैं। उन्होंने स्नातक महात्मा गांधी कॉलेज आरमोरी से करने के बाद वो जनसंवाद विभाग मे पोस्ट ग्रेजुएशन करने नागपुर आये। यहाँ से घपेश ने बैचलर ऑफ़ जर्नलिज्म और फिर मास कॉम की पढाई की। मास कॉम पूरा होते ही नेट और सेट की परीक्षा जनसंवाद विषय मे पास की। वही नागपुर के अलग अलग समाचारपत्र और न्युज चैनलो मे अपनी पत्रकारीता की इन्होने शुरुवात की।

घपेश ने ‘ नागपुर टुडे ‘ से बातचीत में बताया कि जब वे यहाँ पढ़ने आए तब नागपुर उनके लिए नया था और पत्रकारीता भी ठीक से समज नही आती थी। इसके बावजूद पत्रकारीता मे आठ साल गुजारे, जिसमें सामाजिक मुद्दों के साथ शिक्षा, राजनैतिक मुद्दे, आदिवासी, और संविधान जैसे विषयों पर रिसर्च और लिखाण किया। 2013 जनवरी में पीएचडी पदवी के लिए दाखिला लिया।

” इस विषय पर हाल ही में नागपुर यूनिवर्सिटी ने उन्हें पीएचडी प्रदान की ही। उसके साथ घपेश ने एम.ए राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र, सोशलवर्क, एम.फिल सोशल वर्क, एम.ए ग्रामप्रशासन में किया। यह करते हुए उन्हें काफी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हाल ही मे उन्होंने एमपीएससी के सुचना अधिकारी की परीक्षा पास की हैं। आज वो अलग अलग पेपर मे प्रिलांन्स जर्नलिज्म कर रहे है। वही वे इग्नू मे समन्वयक पद पर कार्य कर रहे है। इस सफलता से उन्होंने सभी को एक संदेश दिया है की अगर मन में इच्छा हो और मेहनत करने की लगन हो तो परेशानियों के बावजूद भी सफलता मिलती है।

Advertisement

Advertisement
Advertisement
 

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement