मनपा : छोटे को थोड़ा दो, बड़े का भुगतान रोको

मनपा वित्त विभाग को महापौर का कड़क निर्देश

NMC
नागपुर:
नागपुर महानगर पालिका की आर्थिक तंगी से शहर के विकास कार्य तो प्रभावित ही हैं और अब मनपा प्रशासन ने अपने कर्मचारियों के वेतन और ठेकेदारों के भुगतान रोकने का कारनामा शुरू कर दिया है। कर्मचारियों को देर-सबेर वेतन दिया जा रहा हैं, वहीँ उन्हीं ठेकेदारों को भुगतान किया जा रहा जो अपनी फरियाद प्रभावी लोगों तक पहुँचाने में कामयाब हो रहे हैं।

खबर है कि विगत सप्ताह मनपा प्रशासन को यह निर्देश दिए गए कि बड़े-बड़े ठेकेदारों का भुगतान पूर्णतः रोको और छोटे ठेकेदारों को थोड़ा-थोड़ा भुगतान करो। निर्देश के 48 घंटे बाद मनपा वित्त विभाग द्वारा छोटे ठेकेदारों में लगभग 70 लाख रुपए बाँटे जाने की जानकारी मिली है।

विगत सप्ताह मनपा ठेकेदार वेलफेयर संगठन के उपाध्यक्ष प्रकाश पोटपुसे के नेतृत्व में 50-60 ठेकेदारों ने महापौर से मुलाकात कर रमजान के दिनों में मुस्लिम ठेकेदारों को बकाया राशि का पूर्ण भुगतान किये जाने की मांग की।

महापौर ने श्री पोटपुसे के शिष्टमंडल को बताया कि मनपा ठेकेदार वेलफेयर संगठन के अध्यक्ष विजय नायडू से इस सम्बन्ध में बात हो चुकी है,इस सम्बन्ध में जो निर्णय लिया गया, वह नायडू को बता दिया गया है।

बताया जाता है कि शिष्टमंडल में शामिल एक भी ठेकेदार ने महापौर के कथन को गम्भीरता से नहीं लिया, तब महापौर ने वित्त विभाग के किसी अधिकारी को बुलाकर निर्देश दिया कि मुस्लिम अथवा किसी भी संप्रदाय के छोटे ठेकेदार को 1 लाख, 50 हज़ार का भुगतान शीघ्र किया जाये, लेकिन बड़े ठेकेदारों के भुगतान अभी रोककर रखे जाएं।

वैसे मनपा के छोटे-बड़े सभी ठेकेदारों का लगभग 34 करोड़ रुपए बकाया है,जिसमे से मुस्लिम ठेकेदार का 5-6 करोड़ बकाया है।

उल्लेखनीय यह है कि जब से मुख्य वित्त व लेखा अधिकारी मदन गाडगे मनपा में आए है, तब से ईद/रमज़ान के पहले मुस्लिम ठेकेदारों को मिलने वाला भुगतान बंद हो गया है। ईद/रमज़ान के अवसर पर गाडगे अपना जिम्मा किसी को दिए बगैर हर ईद/रमज़ान के वक़्त छुट्टी पर चले जाते हैं। ऐसे में इन ठेकेदारों की ईद/रमज़ान में आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन महापौर दटके की वजह से इस बार पिछले शनिवार तक सभी छोटे ठेकेदारों में लगभग 70 लाख रुपए भुगतान किए गए। खबर है कि छोटे ठेकेदारों को भुगतान किये जाने के बाद बड़े ठेकेदार मनपा प्रशासन पर बौखलाए हुए हैं।

– राजीव रंजन कुशवाहा