Published On : Fri, Feb 18th, 2022
By Nagpur Today Nagpur News

स्टेशनरी घोटाला: ठाकरे समिति ने महापौर को सौंपी की रिपोर्ट, 6 करोड़ से अधिक की धांधली

नागपुर. मनपा में उजागर हुआ स्टेशनरी घोटाला प्राथमिक स्तर पर केवल 67 लाख का होने का हवाला देते हुए प्रशासन ने सदर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. इसके आधार पर पुलिस जांच में जुट गई किंतु मनपा की सभा द्वारा गठित ठाकरे समिति ने अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट में ही स्टेशनरी घोटाला 6 करोड़ से अधिक का होने की आशंका जताई है.

गुरुवार को समिति ने सदन के समक्ष रखने के लिए रिपोर्ट महापौर दयाशंकर तिवारी को सौंप दी. लगभग 200 पन्नों की इस रिपोर्ट में जांच की प्रक्रिया तथा विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों के लिए गए बयान के अंश तथा 17 पन्नों में समिति द्वारा निकाले गए निष्कर्ष की जानकारी उजागर की गई है. रिपोर्ट में समिति द्वारा क्या सिफारिश की गई इसका खुलासा केवल सदन में रिपोर्ट रखे जाने के बाद ही किया जा सकेगा.

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कई अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश
गुरुवार को रिपोर्ट सौंपते हुए समिति अध्यक्ष अविनाश ठाकरे ने यह रिपोर्ट सदन की प्रॉपर्टी होने का हवाला देकर भले ही समिति की सिफारिशें उजागर करने से इनकार कर दिया हो लेकिन रिपोर्ट में कई अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश होने की जानकारी सूत्रों ने दी. बताया जाता है कि पुलिस ने घोटाले की जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया किंतु समिति का मानना है कि गिरफ्तार कर्मचारी केवल मोहरे हैं, जबकि घोटाले के पीछे के ‘असली कलाकार’ अभी तक गिरफ्त से बाहर हैं. प्रशासन ने इस घोटाले की हवा निकालने की हर स्तर पर प्रयास किए. इसे केवल प्रशासकीय गलती करार देकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की किंतु यह प्रशासकीय गलती नहीं बल्कि जानबूझकर वित्तीय धांधली किए जाने का मामला है. आलम यह है कि घोटाला उजागर करने के लिए जो अपनी पीठ थपथपा रहा था, पुलिस ने अंतत: उसे भी गिरफ्तार कर लिया.

दोषियों पर होगी कार्रवाई
स्टेशनरी घोटाले का दायरा काफी बड़ा है, जबकि समिति के सदस्यों का कार्यकाल काफी कम बचा है. ऐसे में सीमित समय पर सघन जांच होना संभव ही नहीं है. 4 मार्च को कार्यकाल समाप्त होने के कारण समिति ने प्राथमिक रिपोर्ट दी है. यह रिपोर्ट मनपा की सभा के समक्ष रखी जाएगी जिसके बाद दोषियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएंगे. -दयाशंकर तिवारी, महापौर.

सभी प्रशासकीय अधिकारियों की जांच
जांच समिति को आयुक्त की हरी झंडी मिलने के बाद समिति की 14 बैठकें हो पाई हैं. इनमें 6-6 घंटे जांच की गई जिसमें प्राथमिक स्तर पर करोड़ों की अनियमितता होने की जानकारी उजागर हुई है. सघन जांच होने पर अनियमितता का दायरा बढ़ सकता है.
समिति ने सभी प्रशासकीय अधिकारियों की जांच कर उनकी लिप्तता को खंगालने का प्रयास किया. अनियमितता की तरह जांच के लिए समय भी चाहिए. निवृत्त न्यायाधीश एसपी मुले के मार्गदर्शन के कारण समिति कम से कम समय में प्राथमिक रिपोर्ट तैयार कर पाई है. सदन के निर्देशों के अनुसार आगे कार्रवाई की जाएगी. -अविनाश ठाकरे, अध्यक्ष, जांच समिति.

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