नागपुर: दक्षिण नागपुर का तेजी से विकसित हो रहा इलाका बेशा-पिपला अब गुस्से से उबल रहा है। रविवार को नागरिकों ने दो जगहों पर सीमेंट रोड निर्माण में हो रही भारी देरी के विरोध में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। महज दो किलोमीटर की सड़क — बेशा टी-पॉइंट से पिपला टी-पॉइंट तक — महीनों से अधूरी पड़ी है।
यह इलाका नागपुर ग्रामीण तहसील और बेलतरोड़ी-बेशा-पिपला नगर पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आता है। भौगोलिक रूप से यह दक्षिण नागपुर से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे अक्सर साउथ नागपुर का हिस्सा कहा जाता है। प्रशासनिक रूप से अलग इकाई होने के बावजूद, यहां के अधिकांश नागरिक दक्षिण नागपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं।
यही इलाका अब नागपुर का रियल एस्टेट हॉटस्पॉट बन चुका है। यहां बड़ी-बड़ी टाउनशिप और फ्लैट परियोजनाएं चल रही हैं, जिनकी कीमतें 50 लाख से 75 लाख रुपये तक हैं, जबकि कुछ लग्ज़री प्रॉपर्टीज़ 1 करोड़ रुपये से भी ऊपर बिक रही हैं। मगर करोड़ों का घर खरीदने वाले लोगों को टूटी सड़कें, जलभराव, बिजली के खंभे और अधूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ही मिला है।
बरसात में हालात और भी खराब हो जाते हैं — पानी भरने और गड्ढों से भरी सड़कों से लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। हाल ही में एक बुजुर्ग की सड़क हादसे में मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नागरिकों ने पिरामिड सिटी और लक्ष्मी मार्ट के पास नारेबाजी की और प्रशासन से जवाब मांगा।
जानकारी के मुताबिक, लोकनिर्माण विभाग (PWD) के पास फंड की कमी है और ठेकेदारों को भुगतान न होने से काम ठप पड़ा है। महाराष्ट्र सरकार की आर्थिक तंगी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
लोगों का कहना है कि बेशा-पिपला को “नया नागपुर” बताकर रियल एस्टेट डेवलपर्स ने सपने बेचे, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान नहीं है। नागरिक अब बेशा नगर पंचायत के आगामी चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दे रहे हैं।
लंबे इंतज़ार और हादसे के बाद PWD के कार्यकारी अभियंता संदीप शेंडे ने भरोसा दिलाया कि सड़क का काम चार महीने में पूरा होगा। मगर लोगों का कहना है कि अब वायदों पर भरोसा नहीं रहा।
कभी “साउथ नागपुर का अगला बड़ा इन्वेस्टमेंट हब” कहलाने वाला बेशा-पिपला अब इस बात की मिसाल बन गया है कि अगर बुनियादी ढांचा न हो, तो विकास सिर्फ एक दिखावा रह जाता है।









