Published On : Mon, Jan 30th, 2017

मुंबई मनपा का भ्रष्टाचार छिपाने शिवसेना साध रही नागपुर पर निशाना

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नागपुर:
 राज्य की सत्ता में सहभागी भाजपा और शिवसेना के बीच राज्य में आगामी महानगर पालिका चुनाव से ठीक पहले टकराव और तेज हो चुका है। शिवसेना विधायक अनिल परब ने सोमवार को मुंबई में शिवसेना भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नागपुर महानगर पालिका में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए भाजपा से जवाब माँगा। सेना ने नागपुर महानगर पालिका की 24 बाय 7 जलापूर्ति योजना, सीमेंट रोड, डामर रोड, डंपिंग यार्ड से जुड़ी योजनाओं में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। सेना के इन आरोपों का जवाब देने के लिए महापौर प्रवीण दटके के साथ शहर के सभी विधायकों ने एक संयुक्त पत्र परिषद लेकर इसका जवाब दिया।

नागपुर मनपा के महापौर प्रवीण दटके ने सेना के सभी आरोपों को हास्यास्पद करार दिया है। उनके मुताबिक सेना अपने आरोपों का काग़जी प्रमाण दे तो वह खुद इन आरोपों पर आयुक्त द्वारा जाँच कराने की अपील करेगें। सेना ने साढ़े चार हज़ार के सीमेंट रोड बनाएं जाने की जानकारी देते हुए भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है जबकि अब तक शहर में पहले फ़ेज में 100 करोड़ जबकि दूसरें फेज़ में 329 करोड़ रूपए के सीमेंट रोड के निर्माण को मंजूरी दी गयी है। 24 बाय 7 जलापूर्ति योजना में नागरिकों से 30 रूपए प्रति यूनिट की दर से बिल वसूलने का आरोप भी फर्जी है। ओसीडब्ल्यू कंपनी में तथा अन्य विकासकार्यों में भाजपा नेताओं के परिजनों को ठेका दिए जाने का जो आरोप लगाया गया है इस पर सेना को सबूत जनता के सामने पेश करना चाहिए। मुंबई महानगर पालिका के डंपिंग यार्ड की खामियों को लेकर कई बातें सामने आती रही हैं जबकि नागपुर के डंपिंग यार्ड का निर्माण ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशानिर्देशों को ध्यान में रखकर ही किया गया है।

महापौर दटके ने कहा कि जिस 24 बाय 7 जलापूर्ति योजना को लेकर शिवसेना अब सवाल उठा रही है, उस वक्त क्यों चुप थी जब, योजना को मंजूरी दी गयी, उस समय तो वह सत्ता में सहभागी थी। इतना ही नहीं सेना के ही शेखर सावरबांधे उपमहापौर थे। सेना के नगरसेवक तो इस समय भी स्थायी समिति के सदस्य है। महापौर के मुताबिक मुंबई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने की वजह से नागपुर पर हमला बोला जा रहा है। मुंबई महानागर पालिका से जुड़े भ्रष्टाचार को भाजपा लंबे वक्त से उठा रही है। बेहतर होगा कि सेना उन आरोपों का जवाब दे। नागपुर मनपा के कामकाज की फ़िक्र शिवसेना को करने की जरुरत नहीं क्योंकि नागपुर मनपा पारदर्शिता के साथ काम करती है। सड़क निर्माण का प्राइज बिड ओपन हो जाने के बाद भी टेंडर को सिर्फ इसलिए रद्द कर दिया गया क्योंकि उस टेंडर में मुंबई की ब्लैकलिस्टेड कंपनियों ने भी हिस्सा लिया था।

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पत्र परिषद में भाजपा नेताओं ने जोर देकर कहा कि मुंबई मनपा पर उठ रहे सवालों की वजह से नागपुर को टारगेट किया जा रहा है। सेना ने पहली बार संयुक्त महाराष्ट्र में नागपुर को तवज्जो दी और उपराजधानी माना। इस पर महापौर होने के नाते मैं आभार व्यक्त करता हूँ।

पत्र परिषद में महापौर के साथ नेता सत्तापक्ष दयाशंकर तिवारी, मनपा के चुनाव प्रमुख अनिल सोले, विधायक गण सुधाकर देशमुख, शहराध्यक्ष सुधाकर कोहले, गिरीश व्यास, विकास कुंभारे, डॉ मिलिंद माने, डॉ परिणय फुके के साथ अन्य नेता उपस्थित थे।

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