नागपुर: पिछले एक दशक में सोने की कीमतों में हुई जबरदस्त तेजी ने Sovereign Gold Bonds यानी SGB में निवेश करने वालों को बड़ा फायदा दिया है। लेकिन दूसरी तरफ, इसी तेजी से सरकार पर भविष्य में SGB redemption का भुगतान बोझ भी बढ़ सकता है।
भारत सरकार ने 2015 में Sovereign Gold Bond Scheme शुरू की थी। इसका उद्देश्य लोगों को physical gold खरीदने के बजाय gold-linked government securities में निवेश का विकल्प देना था।
SGB में निवेश ग्राम में सोने के आधार पर किया जाता है और इसकी कीमत gold के बाजार मूल्य से जुड़ी होती है।
निवेशकों को इसके अलावा 2.5% सालाना ब्याज मिलता है, जिसका भुगतान छह-छह महीने में किया जाता है। SGB की सामान्य अवधि आठ साल होती है, जबकि पांच साल पूरे होने के बाद निर्धारित तारीखों पर premature redemption का विकल्प मिलता है।
सोना महंगा होने से सरकार पर क्यों बढ़ता है बोझ?
2015 में जब SGB scheme शुरू हुई थी, उस समय सोने की कीमत लगभग ₹25,000–₹27,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास थी।
आज सोना ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम से ऊपर कारोबार कर रहा है।
इसका सीधा फायदा उन निवेशकों को हुआ जिन्होंने कम कीमत के दौर में SGB खरीदे थे। क्योंकि redemption के समय मिलने वाली रकम gold price से जुड़ी होती है।
लेकिन इसका दूसरा पहलू सरकार के लिए महत्वपूर्ण है।
सोने की कीमत जितनी ज्यादा होगी, eligible SGBs की redemption value भी उतनी ही ज्यादा होगी।
सरकार निवेशक को physical gold नहीं देती। Redemption रुपये में होता है और संबंधित gold price के आधार पर भुगतान किया जाता है।
11 सितंबर 2026 को क्या होगा?
यहां एक जरूरी तथ्य समझना महत्वपूर्ण है।
11 सितंबर 2026 सभी SGBs की maturity date नहीं है।
यह तारीख RBI के premature redemption schedule का हिस्सा है। SGB की सामान्य maturity आठ साल होती है, जबकि पांच साल पूरे होने के बाद निर्धारित interest-payment dates पर premature redemption की सुविधा मिलती है।
इसलिए यह कहना गलत होगा कि 11 सितंबर को सरकार को सभी SGBs का भुगतान करना होगा।
हालांकि, यह तारीख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जैसे-जैसे पुराने SGB redemption के लिए eligible होते जाएंगे और gold prices ऊंचे बने रहेंगे, सरकार की संभावित payout liability भी बढ़ सकती है।
SGB पर टैक्स का नियम भी बदला
SGB के tax treatment में भी बदलाव हुआ है।
1 अप्रैल 2026 से लागू नए प्रावधानों के तहत maturity पर capital-gains exemption उस individual को मिलता है जिसने SGB को original issue के समय खरीदा हो और maturity तक लगातार hold किया हो।
Secondary market से खरीदे गए SGB को यही exemption नहीं मिलता। Premature redemption भी इस specific maturity exemption के दायरे में नहीं आता।
इसलिए अब यह कहना सही नहीं है कि हर SGB पर capital gain पूरी तरह tax-free है।
निवेशकों के लिए फायदा, सरकार के लिए बढ़ती देनदारी
SGB scheme को इस उद्देश्य से लाया गया था कि लोग physical gold के बजाय government-backed gold investment का विकल्प चुनें।
निवेशक को gold price appreciation के साथ 2.5% सालाना ब्याज भी मिलता है।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में gold की कीमतों में जिस तरह की तेजी आई है, उसने इस scheme की economics को काफी बदल दिया है।
Gold महंगा होता है तो SGB investor का potential return बढ़ता है।
लेकिन दूसरी तरफ—
Gold महंगा होता है तो eligible SGBs को redeem करते समय सरकार का rupee payout भी बढ़ता है।
हालांकि, इस बात का कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है कि सरकार 11 सितंबर से पहले जानबूझकर gold prices को crash कराने की कोशिश कर रही है। ऐसी बात को फिलहाल speculation ही माना जाना चाहिए।
तथ्य यह है कि gold की असाधारण तेजी ने पुराने SGBs की redemption cost को उस स्तर तक पहुंचा दिया है, जिसकी कल्पना scheme शुरू होने के समय शायद नहीं की गई थी।
SGB investors के लिए सोने की तेजी बड़ी कमाई साबित हुई है। लेकिन सरकार के लिए यही तेजी एक बढ़ती हुई देनदारी बन गई है, जिसका भुगतान bonds के redeem होने पर करना होगा।




