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    Published On : Fri, Nov 30th, 2018

    सनसनीखेज़ – राज्य में फ़ायर विभाग के किसी अधिकारी के पास नोटिस जारी करने का अधिकार ही नहीं

    नागपुर : ख़बर का शीर्षक चौंकाने वाला जरूर लगे लेकिन है हक़ीक़त,राज्य में एक भी फ़ायर विभाग का अधिकारी नहीं है जो क़ानूनन किसी ईमारत का निरिक्षण या फिर उसे नोटिस जारी कर सके। वर्त्तमान समय में विभाग द्वारा जो कार्रवाई की जा रही है उसमे सरकार के ही नियम का उल्लंघन हो रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2008 में क़ानून में संशोधन कर एक एक्ट बनाया था। जिसे खुद राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद मंजूर कराया गया था।

    इस एक्ट के मुताबिक किसी भी ईमारत के निरिक्षण या फिर उसे नोटिस जारी करने के लिए सर्विस के दौरान “मास्टर फ़ायर” नामक कोर्स करने वाला फ़ायरमैन ही कार्रवाई कर सकता है। आज 2018 शुरू है 10 वर्ष बीत चुके है लेकिन 10 वर्ष बाद भी डायरेक्टर ऑफ़ फायर डिपार्टमेंट महाराष्ट्र के मातहत संचालित होने वाली स्टेट फ़ायर एकेडमी ने यह कोर्स अब तक शुरू ही नहीं किया है। यह हाल मुख्यमंत्री के अपने शहर नागपुर का भी है।

    नागपुर महानगर पालिका में फायर विभाग में किसी कार्रवाई को लीड करने वाले 58 अधिकारी पदों को मंजूरी प्राप्त है लेकिन सिर्फ दो पदों पर उपयुक्त व्यक्ति की नियुक्ति है। जबकि कई पद खाली है। दो वर्ष पहले शहर की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने पदों में वृद्धि की थी। मनपा के चीफ़ फ़ायर ऑफिसर के पास ही डिप्टी चीफ़ फ़ायर ऑफिसर का प्रभार भी है।

    राज्य सरकार ने भले ही फ़ायर विभाग में पदों को भरने की मंजूरी दे दी लेकिन विभाग के भीतर के कर्मचारियों को पदोनत्ति देकर रिक्त पदो को भरने की शर्त जोड़ कर इस काम में रोड़ा अटका दिया। अब स्थिति ये है कि रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए उपयुक्त मैनपॉवर मनपा के फ़ायर फ़ोर्स के पास है ही नहीं। निरिक्षण का अधिकार सिर्फ नियुक्त अधिकारियों के पास ही है। मगर नागपुर और राज्य भर में ऐसे लोग निरिक्षण या नोटिस जारी करने का काम कर रहे है जिनके पास इसका अधिकार ही नहीं है।

    मनपा में फ़ायर ऑफिसर की जग़ह

    चीफ़ फ़ायर ऑफिसर – 1 पद
    डिप्टी चीफ़ फ़ायर ऑफिसर-1 पद
    डिविजनल ऑफिसर – 2 पद
    असिस्टेंट डिविजनल ऑफिसर- 4पद
    स्टेशन ऑफिसर – 13 पद
    असिस्टेंट स्टेशन ऑफिसर -39 पद

    पदों पर नियुक्ति नहीं होने की प्रमुख वजह शिक्षा,ट्रेनिंग और अनुभव की शर्त है। राज्य में फ़ायर फ़ोर्स का निर्माण 1989 में हुआ। इस वर्ष के बाद से नागपुर में निर्माण हुई ईमारतों में से फ़ायर डिपार्टमेंट ने 3635 ईमारतों को एनओसी दी। जिनमे से केवल 706 ईमारतों में आग लगाने की स्थिति में बचाव यंत्रणा की स्थापना हुई। बीते दो वर्ष के दौरान महाराष्ट्र आग प्रतिबंधक और जीवन संरक्षण उपाय योजना कानून के मुताबिक 1920 ईमारतों को फ़ायर नियम के अनुपालन के लिए नोटिस दिया गया। इन 1920 ईमारतों में से 925 में आग लगाने की स्थिति में बचाव की किसी भी तरह की यंत्रणा नहीं थी।

    जिसमे से लगभग 50 फ़ीसदी ईमारतों की बिजली-पानी काँटने की कार्रवाई भी की गई। मनपा के फ़ायर विभाग के अनुसार इस अभियान का फायदा हुआ कि लगभग 80 प्रतिशत ईमारतों ने शर्तों को पूरा किया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि जिन ईमारतों पर कार्रवाई हुई वो सब 1989 के बाद निर्मित है। इससे पहले निर्मित हुई ईमारतों का कोई लेखा जोखा या व्यापक शोध उपलब्ध नहीं है। आग लगने की स्थिति में फ़ायर विभाग का काम सिर्फ बचाव कार्य तक सिमित रह जाता है जबकि कार्रवाई के नाम पर नोटिस जारी करने के अलावा और कोई मजबूत हथियार राज्य के फ़ायर एक्ट के हिसाब से है नहीं। कई चरणों में की जाने वाली कार्रवाई में फ़ायर नियम अनुपालन का लंबी समयवधि लेने वाला नियम है। जिसमे काफ़ी समय लगता है।

    फायर विभाग की कार्रवाई का क्रम

    पहला चरण – जाँच -पड़ताल,परिक्षण करना
    दूसरा चरण – खतरनाक ईमारत का बिजली-पानी कांटना
    तीसरा चरण -पुलिस में मामला दर्ज करना
    चौथा चरण – ईमारत को सील करना

    फायर विभाग ने जिन 1920 ईमारतों को नोटिस जारी किया है उसमे से चौथे चरण की कार्रवाई किसी भी ईमारत पर नहीं की गई है। हालाँकि एफआयआर दर्ज कराने की नौबत तक बात पहुँची जरूर लेकिन अब तक पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया है। कुछेक ईमारतों को आग लगाने की स्थिति में अति गंभीर पाया गया है जिसमे से एक है एम्प्रेस मॉल जिस पर एफआयआर दर्ज करने की माँग फ़ायर विभाग द्वारा पुलिस से किये हुए लगभग तीन महीने का वक्त बीत चुका है। मगर फिर भी अब तक मामला दर्ज नहीं हुआ है।

    ख़ुद मनपा ने पूरी नहीं की शर्त

    हैरानी इतनी भर नहीं है कि शहर की ईमारते आग लगाने की स्थिति में बड़े हादसे को आमंत्रित करती है। खुद मनपा का मुख्यालय जहाँ मनपा आयुक्त और प्रमुख अधिकारी बैठते है फायर एक्ट के अनुसार सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करती। मनपा के ही फ़ायर विभाग ने मनपा प्रशासन को पांच महीने पहले नोटिस जारी किया था। लेकिन अब तक इस नोटिस पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। 7 मंजिली इस ईमारत के ग्राऊंड फ़्लोर पर जहाँ खुद मनपा आयुक्त और सहायक आयुक्त,उपायुक्त का दफ़्तर है वहाँ फ़ायर अलार्म नहीं है। 9 मई 2018 को फ़ायर विभाग ने मनपा के विद्युत विभाग के कार्यकारी अभियंता संजय जैस्वाल को पत्र लिखकर 8 जून 2018 तक तक फ़ायर नियम अनुपालन का करने को कहाँ था।

    लेकिन यह काम आज तक नहीं हुआ। प्रशासन के ढुलमुल रवैये से परेशान होकर विभाग ने तत्कालीन आयुक्त वीरेंद्र सिंह से शिकायत की। जिसके बाद उन्होंने तेजी दिखाते हुए 6 वे और 7 में माले पर होने वाले काम को जल्द पूरा करने का निर्देश। मनपा की आतंरिक राजनीति से तंग आकर वीरेंद्र सिंह से स्वेक्षा से तबादला लेकर नागपुर से जा चुके है। परंतु उनकी तेजी के चलते काम का टेंडर निकला,काम करने वाली कंपनी नियुक्त जरूर हुई पर काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। मनपा की प्रशासकीय ईमारत में फायर सिस्टम फ़िलहाल मैन्युअली मोड़ पर है जबकि इसे ऑटो मोड़ में होना चाहिए था।


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