Published On : Thu, Mar 21st, 2019

सिलेक्शन बिफोर इलेक्शन – चुनाव के पाहिले चयन ” – डिजिटल डेमोक्रेसी की नीव – अजित पारसे . सोशल मीडिया विश्लेषक

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२०१९ चुनाव में तक़रीबन १० करोड़ भारतीय लोग अपना वोटिंग है हक़ निर्वाहित करेंगे . दिनिया का सबसे बड़ा ” वोटिंग इवेंट ” याने हमारे २०१९ के चुनाव यह ” डिजिटल डेमोक्रेसी ” के तरफ बढ़ रही है . राजनीती में सोशल मीडिया एक शक्ति गुणात्मक जैसा अपनी पहचान बना चूका है . मुख्यतः २०१२ के अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव , ब्राज़ील के राष्ट्रपति जैर बोलसनारो इनका विशाल व्हाट्सप्प अभियान और फिलीपींस राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटर्ट इनका महाकाय फेसबुक प्रचारने समूचे विश्व को सोशल मीडिया का लोहा दिखा दिया है . सोशल मीडिया द्वारा राजनैतिक प्रचार एवं प्रसार तथा निर्णयात्मक इस्तेमाल से जीत हासिल करने का दौर कायम हो चूका है . हमारा भारत देश भी इसका अपवाद नहीं है . विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और दूसरे सबसे बड़े ऑनलाइन बाजार याने अपने देश में विविध राजनैतिक दल मोबाइल ऍप्लिकेशन्स , वेबसाइट , ब्लोग्स , सोशल नेटवर्किंग साइट्स ( एस एन एस ) , सोशल मेस्सजिंग सर्विसेस ( एस एम् एस ) इत्यादि अनगिनत शस्त्र लेकर सब तैयार है ” डिजिटल डेमोक्रेसी ” को अग्रेसर होते हुए .

” सिलेक्शन बिफोर इलेक्शन – चुनाव के पाहिले चयन ” ! क्या सभी राजकीय दलोने अधिकृत किये हुए उमेदवार जनता को मान्य है या नहीं ?

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जिस तरह सोशल मीडिया का विधायक इस्तेमाल करते हुए जान प्रतिनिधि घर घर में अपना प्रचार , प्रसार एवं आश्वासन , दौरान पंहुचा सकते है , उसी तरह सामान्य जनता अपनी राय, चुनाव या मंशा हमारे सभी राजनैतिक दलोंको , माननीय नेताओंको संदेशित करते आना चाहिए . कई बार ऐसा देखा गया है के जनता को दल चाहिए परन्तु दल ने अधिकृत किये हुए प्रत्याशी नहीं चाहिए . सोशल मीडिया के सकारात्मक इस्तेमालसे उम्मीदवार अधिकृत करने से पाहिले ” सिलेक्शन बिफोर इलेक्शन ” द्वारा जनता के चुनाव को समझते हुए दलों , वरिष्ठ नेताओं और जनता के बिच सीधा संपर्क स्तःपित होना चाहिए . जनता के सहमति से विचारभिमुख लोकशाही के पारदर्शिता को अधिक बल प्राप्त होगा . माननीय डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने पुरजोर कोशिश के थी के समाजकारण यह राजकरण का केंद्र बिंदु स्थापित हो और उसके द्वारा आर्थिक दुर्बल , पीड़ित , शोषित समाज को न्याय , सन्मान देनेवाली सत्ता बने . सम्बंधित दलोने कोईभी विचारधारा अपनाते हुए समाज के दुर्बल घटकोंको मुख्या प्रवाहधारा में शामिल करने के लिए बाबासाहब निरंतर प्रयत्नशील रहे .

इसी मार्गदर्शन पे चलते हुए , सभी स्तरोंपे प्रयत्न करते हुए सोशल मीडिया का भी विधायक इस्तेमाल करना जरुरी है , इसके द्वारा समाज के सभी वर्गोंको निर्णयात्मक सत्ताकारण में साझेदारी मिलेगी एवं सबके निर्णय , चुनाव , अपेक्षाएं सोशल मीडिया द्वारा समबन्धित राजकीय दलों से सत्ता के सिंघासन में सहभागी होगी . यकीनन माननीय डॉ बाबसाहेब आंबेडकर जी के इन प्रयासोंको सर्वपक्षीय , सर्वस्तरीय समर्थनीय अच्छे परिणाम मिले है . दुर्बल , ग्रामीण एवं वंचित समजाका नेतृत्व बेहद प्रखरता से उदय हुआ है . परन्तु इसे और पुरजोर तरीके से राष्ट्रीय स्तर पे अवलम्बित होना चाहिए . ” सिलेक्शन बिफोर इलेक्शन ” द्वारा राजनैतिक दल , नेता एवं जनता के बिच १०० % सीधा – स्पष्ट सामाजिक संवाद प्रस्थापित होगा जिस से हमारे मान्यवर नेता और सम्बंधित दल और अधिक प्रभावशाली तरीके से राष्ट्र हित में सकरात्मक निर्णय ले पाएंगे . सोशल मीडिया द्वारा उमीदवार की बारे में जनता की प्रतिक्रिया – चुनाव सीधा सम्बंधित दल और नेताओंके की परोक्ष स्थापित होगी . ” सिलेक्शन बिफोर इलेक्शन ” से सही मायने में जनता द्वारा उमीदवार चुना जायेगा और चुनावी जीत हासिल कर प्रस्थापित राजनैतिक दलोंके माध्यम से जनता की , समाज की और राष्ट्र की सही , सटीक मायनो में सेवा कर पायेगा .

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” डिजिटल डेमोक्रेसी ” की और.
विश्व की नामांकित स्टैटिस्टा.कॉम ( statista.com ) संसथान की अनुसार २०१९ में हमारे देश भारत में ३१३.६ दशलक्ष फेसबुक यूसर है . इसी संस्था द्वारा प्रक्षेपित जानकारी नुसार हमारे देश में लगबघ ३७३.८८ दशलक्ष स्मार्टफोन यूसर है . वही फाइनेंसियल एक्सप्रेस द्वारा दी गयी ऑनलाइन जानकारी के नुसार व्हाट्सप्प का इस्तेमाल २०० दशलक्ष से ज्यादा इस्तेमालकर्ता है. व्हाट्सप्प सन्देश यह ” इन्क्रिप्टेड “( Encrypted ) रहते है , इसलिए कोई भी विशेष जांच या सत्यता की पड़ताल न करते हुए अनगिनत सन्देश , अफवाहे या गलत खबरे समाज में फ़ैल जाती है जिसका प्रत्यंतर कई बार दुखद घटनाओमे होता है . ऐसी घटनाये हमारा सामाजिक सलोखेको , शांति को खतरा उत्पन्न करती है इसलिए सरकार ने विधायक कदम उठाते हुए व्हाट्सप्प सन्देशोंको मात्रा ५ सन्देशोंकी मर्यादा का बंधन कानूनन डाला है . सोशल मीडिया की इस्तेमाल से समाजमन को किसी खास उद्येश से बनाया या बरगलाया जा सकता है जिसका परिणाम हार्बर अच्छा हे होगा यह जरुरी नहीं है . परन्तु ” सिलेक्शन बिफोर इलेक्शन ” जैसे सकारात्मक कोशिशोंसे माइक्रो कम्पैनस कर अधिक प्रभावशाली तरीकेसे सर्वदलीय नेताओं और जनता की बिच उनके चुनाव , अपेक्षा या निर्णय को लेके सीधा दुतरफा संवाद हो पायेगा , जहा सत्ता में कारगर तरीकेसे सामान्य जनता अपना योगदान दे सकेगी . सभी दलोंके नेता , प्रचारक एवं प्रत्याशी हर तरीकेसे जनता जनार्दन से सीधा जुड़ेंगे और विधायक दिशामे २४ x ७ सर्वसम्मतिसे , सर्व योगदानसे सभी स्तर की जनता राजकरण , सत्ताकारण एवं समाजकारण की मुख्य प्रवाह में आ पायेगी . याने सही मायने में ” सिलेक्शन बिफोर इलेक्शन – चुनाव से पाहिले चयन ” स्थापित होगा .

सस्ते स्मार्टफोन , सस्ता एवं उच्च कोटि की इंटरनेट ( डाटा ) सेवाएं और भारतीय जनता में सोशल मीडिया का अभूतपूर्व इस्तेमाल यह सभी राजनैतिक दलोंके लिए प्रभावशाली चुनावी – राजनैतिक संवाद का साधन है . पाहिले की अपेक्षा में सोशल मीडिया द्वारा अधिक प्रभावशाली एवं रचनात्मक तरीकेसे यह संवाद वैयक्तिक स्तर पे हो सकता है . अनगिनत घोषणापत्र , वीडियो , विभिन्न एनिमेशन्स , व्यक्तिगत संवाद या वादे , फोटोज सीधा हर नागरिक तक मोबाइल , सोशल मीडिया और उस से सम्बंधित ऍप्लिकेशन्स द्वारा पहुचाये जा सकते है . पूर्व समय में इन सबके लिए काफी पैसा , समय और मनुष्यबल लगता था जो अब सोशल मीडिया की वजहसे बेहद सरल , गतिमान और प्रभावशाली हो चूका है . सोशल मीडिया ने ” राजनैतिक संवाद ” की लिए एक बेजोड़ जरिया दिया है जो हमें यक़ीनन ” डिजिटल डेमोक्रेसी ” की और ले जायेगा और हमारा देश पूरी दुनिया में शक्तिशाली , सम्पूर्ण राष्ट्र सत्ता बनाएगा .

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