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    Published On : Fri, Jun 11th, 2021
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    श्रद्धान से बीजाक्षर काम करता हैं- गणधराचार्य कुंथुसागरजी

    नागपुर : श्रद्धान से बीजाक्षर कोई भी बीजाक्षर काम करता हैं. मंत्रों का प्रभाव जीवन पर पड़ता हैं यह उदबोधन जगतगुरु भारत गौरव गणाधिपति गणधराचार्य कुंथुसागरजी गुरुदेव ने विश्व के सबसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन सर्वोदय धार्मिक शिक्षण शिविर में दिया.

    गुरुदेव ने शिविर में कहा वर्तमान में सभी साधनों का उपयोग सभी कर रहे हैं उस समय साधनों का अभाव था. साधनों की अच्छाई सोचे जादा से जादा धार्मिक लाभ लोगों को मिल रहा हैं. भारत के प्रत्येक नागरिक के हाथ मोबाइल पाया जाता हैं और कही न कही प्रत्येक कार्य संपर्क से होता हैं, बोलचाल रहती हैं, बाते होती हैं. साधु संत ग्रंथ आजकल मोबाईल में रखते हैं, जिस शास्त्र का स्वाध्याय करना हैं वह आगम आ जाता हैं, सरलता से स्वाध्याय कर सकते हैं यह वर्तमान की स्थिती हैं, यह मंत्र विज्ञान हैं, तंत्र विज्ञान हैं. हम शांति विधान करते हैं, मांडला मांडते हैं उसमें क्रम रहता हैं 8, 16, 32 उसके बाद अगर हम भक्तामर पाठ देखते हैं, भक्तामर यंत्र देखते हैं तो बीजाक्षर क्लिं पाया जाता हैं. मंत्रों का उपयोग श्रावक से लेकर कोई भी कर सकता हैं, कोई तकलीफ नहीं, यंत्र तो यंत्र हैं. 9 कोठे का यंत्र हो या 16 कोठे का यंत्र हो और 81 कोठे का यंत्र हो उसके अंदर संख्या भर सकते हैं,

    उसको जोड़ा तो हमारे को किस चीज की आवश्यकता हैं, हमें क्या चाहिये वह सारा का सारा यंत्र के प्रभाव से हमें मिल जाता हैं. यदि यंत्र काम नहीं करते तो कंपनियां बंद हो जायेगी. संसार के सारे कार्य रुक जायेंगे. लोहे के भागों को जोड़कर यंत्र का निर्माण होता हैं. मोबाइल की बटन दबाई तो हजारों कि. मी दूर कोई भी हमारी बात सुन सकता हैं, यह यंत्रों का प्रभाव हैं. मंत्र शास्त्रों की खोज की, खोज करने के बाद पाया गया मंत्र वाक्य लिखा उसका सहारा लिया तो स्वर्ग हमारे लिये कही नहीं गया.

    वर्तमान में हमारा संसार हैं, वर्तमान में भोगों से अगर उनको सुरक्षित रखना हैं तो कौन सा बीज कहा स्थापन करे साधक को ध्यान करना चाहिये उसके लिये उसी प्रकार सिद्धि मिलती हैं, सरस्वती मंत्र, लक्ष्मी मंत्र, परमेष्ठी मंत्र, पंचाक्षरी विद्या मंत्र हैं. हमारे जीवन में हानि क्या हैं और लाभ क्या हैं सारी बाते तैयार हो जाती हैं. दस लाख वनस्पति हैं ऐसा जैनागम कहता हैं,अलग अलग प्रकार की वनस्पति हैं, उसका उसका अलग अलग प्रभाव हैं. वनस्पति पर आयुर्वेद के ग्रंथ हैं उसका सही उपयोग कर प्रकट हो जाता हैं और शरीर निरोगी बन जाता हैं. कल्प वनस्पति हैं, मंत्र कल्प हैं.

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