Published On : Wed, Dec 28th, 2016

तेलंगाना में दिखाई दिए बाघ के जय होने पर संदेह

tiger-jai

नागपुर: जय के नाम से मशहूर उमरेड करांडला के बाघ के दोबारा दिखाई देने की चर्चा के बीच वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने तेलंगाना के वन मंत्री से सचाई पता लगाने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि आठ महीने पहले बाघ जय करांडला के जंगल से गायब हो गया था और बीतते समय के साथ यह मन लिया गया था कि जय अब इस दुनिया में नहीं। लेकिन कुछ दिनों पहले तेलंगाना राज्य के आदिलाबाद जिले के जंगल में जय की कद-काठी के बाघ के दिखाई देने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिससे समस्त विदर्भ के वन्यजीव प्रेमियों में खुशियों की लहर दौड़ गई।

हालाँकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है कि आदिलाबाद के जंगल में दिखा बाघ जय है या नहीं, लेकिन वायरल वीडियो देहरादून स्थित वाइल्ड इंस्टिट्यूट के वैज्ञनिकों के बीच भेजा गया तो वहाँ के जीव विज्ञानियों ने उक्त बाघ के जय होने से इंकार कर दिया। वहां के वैज्ञानिकों का कहना रहा कि उनके ही केंद्र के देखरेख में महाराष्ट्र के पांच बाघों पर रेडियो कॉलर लगाए गए थे, जिनके जरिए इन पांचों बाघों के प्रत्येक व्यवहार का अध्ययन हो रहा था, जय भी उन पांच बाघों में शामिल था।

यह भी मालूम हुआ कि जय की रेडियो कॉलर दो बार बदली गई थी, एक बार खराब होने की वजह से, दूसरी बार तकनीकी खामियों की वजह से। दोबारा कॉलर बदलने के दो महीने के भीतर ही देहरादून के वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट को सिग्नल मिलने बंद हो गए थे, जिसके बाद पहले जय की गुमशुदगी और फिर उसके मौत की बात कही गई। हाल-फिलहाल वायरल वीडियो की जाँच के बाद जीव विज्ञानियों ने कहा कि सिग्नल नहीं मिलने के बावजूद जय के गले में रेडियो कॉलर होनी चाहिए थी, जो कि वीडियो में दिखते बाघ में नहीं है, इसलिए इस बाघ को फ़िलहाल जय नहीं माना जा सकता है।


इधर, पेंच टाइगर प्रोजेक्ट कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक तेलंगाना में मिले बाघ के पंजों का मिलाप किया जा सकता है। लेकिन बाघ के पंजों से सटीक अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। हां अगर कैमरा ट्रैप में उस बाघ की तस्वीर कैद मिलती है तो उसका मिलाप किया जा सकता है जिससे पक्का पता चल जाएगा कि सुर्खियों में छाया बाघ जय है भी या नहीं।