Published On : Wed, Jul 12th, 2017

बिना जांचे ही स्कूलों में दिया जा रहा मिड डे मील

Advertisement
Mid day meal

Representational Pic


नागपुर:
राज्य में शालेय पोषण आहार के तहत स्कूलों में विद्यार्थियों को मिड डे मील दिया जाता है. नागपुर जिले में करीब 2850 स्कूलों को यह भोजन दिया जाता है. लेकिन विद्यार्थियों को दिया जानेवाला यह भोजन कितना सुरक्षित है, यह अन्न व औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों को ही नहीं पता. लिहाजा बिना जांचे ही स्कूलों में मिड डे मील भगवान भरोसे धड़ल्ले से परोसे जाने का खुलासा हुआ है.

दरअसल राज्य सरकार के 2016 के नियमों के तहत शालेय पोषण के लिए सुरक्षित स्थान पर अनाज को रखना, वहां की नियमित साफ-सफाई करना इत्यादि नियम बनाये गए हैं. लेकिन सबसे ज्यादा अवेहलना हो रही है पके हुए भोजन के जांच के नियम की. इसके लिए सरकार ने नियम बनाया है कि इस भोजन की जांच सरकारी प्रयोगशाला में की जाए. जिसके बाद ही सम्बंधित विभाग भोजन की गुणवत्ता का प्रमाणपत्र उपलब्ध कराएगी. साथ ही इसके अन्न व औषधि विभाग भी पके हुए भोजन का नमूना लेकर उसकी जांच करेंगे. लेकिन स्कूल शुरू हुए 20 दिन के बाद भी अन्न व औषधि विभाग के पास किसी भी स्कूल की जांच करने से सम्बंधित पत्र या निवेदन नहीं आया है. और ना ही अन्न विभाग की ओर से किसी अधिकारी ने किसी स्कूल में जाकर भोजन की जांच पड़ताल ही आज तक की है. जाहिर है बिना जांचे ही भोजन विद्यार्थियों को परोसा जा रहा है. जिससे विद्यार्थियों को मॉनसून में गंभीर बिमारी होने के खतरे को भी नकारा नहीं जा सकता.

जिला परिषद के अधिकारियों और अन्न विभाग के अधिकारियों की लापवारही के कारण विद्यार्थियों के साथ फ़ूड पॉइजनिंग जैसी घटनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता. पिछले वर्ष नागपुर जिले की ही एक स्कूल में मिड डे मील के तहत परोसे गए भोजन में गड़बड़ी होने से विद्यार्थियों को बड़े पैमाने पर विषबाधा हुई थी. जिसके बाद अधिकारियों ने काफी गंभीरता दिखाते हुए जांच के आदेश दिए थे. लेकिन ऐसे वाकयों के बाद भी विभाग पिछले अनुभवों को याद रख मुस्तैद होता नजर नहीं आ रहा है. राज्य सरकार ने अपने अधिनियम में विद्यार्थियों के हितों का ख्याल रखते हुए उनके मध्यान्ह भोजन के लिए उपयुक्त नियम बनाए हैं. लेकिन नियमों की अनदेखी के चलते मिड डे मील की गुणवत्ता पर संदेह कायम है. लापरवाही की सीमा तो यह हो जाती है कि अन्न व औषधि विभाग को इस नियम की जानकारी ही नहीं. विभाग के सहायक आयुक्त मिलिंद देशपांडे ने बताया कि शालेय पोषण आहार मध्यान्ह भोजन की जांच अन्न विभाग की ओर से नहीं की जाती है. इसके लिए जिला परिषद के सीडीपीओ की ओर से जांच होती है. हां अगर फ़ूड पॉइज़िनिंग जैसी घटनाएं होती है तब विभाग की ओर से नमूने जांचने करने की बात उन्होंने बताई है.

Gold Rate
23 Jan 2026
Gold 24 KT ₹ 1,57,800/-
Gold 22 KT ₹ 1,46,800/-
Silver/Kg ₹ 3,29,800 /-
Platinum ₹ 60,000/-
Recommended rate for Nagpur sarafa Making charges minimum 13% and above

इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर अधिकारी कितने गंभीर हैं.इसको लेकर जिला परिषद के प्राथमिक शिक्षणाधिकारी दीपेंद्र लोखंडे से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिसाद नहीं दिया गया.

—शमानंद तायडे

GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Advertisement
Advertisement