
महाराष्ट्र के नागपुर में पुलिस हिरासत के दौरान हुई एक मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिसवालों की सजा को तीन साल से बढाकर सात साल कर दिया है. मंगलवार को फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शक्तियां बड़ी जिम्मेदारी लेकर आती है. अगर किसी को शक्ति मिल जाती है तो उसकी जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाती है.
सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी अपने उस फैसले में की, जिसमे उसने महाराष्ट्र के नागपुर में पुलिस कस्टडी में हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में 10 पुलिस वालों की सजा 3 साल से बढ़ाकर 7 साल कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि पुलिस को “डेमोक्रेटिक पुलिसिंग” बढ़ाने पर जोर देने की आवश्यकता है. केवल अपराध को कंट्रोल करना ही अंत नही है.
मामला महाराष्ट्र के नागपुर का है, जहां एक व्यक्ति की मौत पुलिस कस्टडी में हुई थी. निचली अदालत ने सभी 10 पुलिस वालों को 3 साल की सजा सुनाई थी. महाराष्ट्र हाइकोर्ट की नागपुर बेंच ने भी सजा को बरकरार रखा. महाराष्ट्र सरकार अपील में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंची. दोषियों ने भी अपील दाखिल करते हुए सजा को खारिज करने की अपील दाखिल की.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास की राज्य सरकार की मांग को नही माना, लेकिन दोषियों की सजा 7 साल जरूर करने का आदेश दिया.
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