Published On : Thu, Jun 18th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

खाद्य तेल की बचत राष्ट्रहित से जुड़ी एक सामाजिक जिम्मेदारी है: बालकृष्ण भरतिया

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खाद्य तेल की बचत केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्किस्वस्थ परिवार और राष्ट्रहित से जुड़ी एक सामाजिक जिम्मेदारी है, ऐसा स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक बालकृष्ण भरतिया ने कहा. वे मंच द्वारा आयोजित खाद्य तेल की खपत सीमित रखने तथा खाद्य तेल बचाओ, स्वास्थ बनाओ अभियान के अंतर्गत चिंतन मंथन बैठक में बोल रहे थे. भरतिया ने कहा की छोटी छोटी आदतों में परिवर्तन से बड़ा सामाजिक प्रभाव उत्तपन्न किया जा सकता है. तला हुआ भोजन खाने की इच्छा होने पर सीमित मात्रा में सेवन करें. भरतिया ने कहा संयमित मात्रा स्वस्थ और बचत दोनों के लिए लाभकारी है.

माननीय श्री बी.सी. भरतिया जी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि की खाद्य तेल के आयात के प्रति हमें सजग रहना चाहिए।
देश हित की बात करते हुए भरतिया ने कहा हम भारत के नागरिक हैं तो प्रथम हमें प्रेम देश के प्रति आस्था होना चाहिए। ऐसा कोई काम न करे जिससे देश को नुकसान हो। सालाना करीब २ लाख करोड़ का तेल विदेश से आयात होता है. यह चिंता का विषय है, जिसपर हमें चर्चा करने हेतु यह बैठक आयोजित की गई है.

बैठक का उद्देश्य खाद्य तेल की बचत एवं उसका सुनिश्चित उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा व्यावहारिक सुझावों के माध्यम से खाद्य तेल की बचत एवं उपयोग को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान करना था। उन्होंने उपस्थित सदस्यों से खाद्य तेल की बचत के संरक्षण के विषय पर अपने विचार एवं सुझाव साझा करने का आग्रह किया। परिचर्चा के दौरान उपस्थित सदस्यों ने खाद्य तेल की बचत के विभिन्न

पहलुओं पर अपने बहुमूल्य विचार प्रस्तुत किए—
श्रीमती पूजा झाम जी ने भारत अपने घरेलू खपत का 60 % खाद्य तेल आयातित इस्तेमाल करता है. भारत में पाम ऑयल विदेश से आता है जिसे ख़रीदने के लिए अमेरिकी डॉलर लगते है, जिससे रुपये का मूल्य कम होता है. खाद्य तेल की खपत कम करने के लिए कुकिंग मैथड में थोड़ा इनोवेशन करे तो काफी फर्क पड़ सकता है। इससे फैमिली हेल्थ ठीक रहेगी.

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श्रीमती अनीता रामप्रसाद जी ने कहा मेरा विश्वास है की कोई भी खाद्य तेल का अधिक सेवन अच्छा नहीं होता। हम तेल की खपत कम करके भी स्वादिष्ट भोजन बना सकते हैं। ऐसे कई होममेट तरीकों से हम रेसिपीज बना सकते हैं जिसमें तेल की आवश्यकता नहीं होती. हमें नेचुरल ऑयल खाना है, न कि रिफाइंड ऑयल। हमें बैलेंस डाइट लेना चाहिए।जिसमें तेल की मात्रा ना के बराबर हो. जल्द ही एक वर्कशॉप ऑर्गेनाइज करेंगे जिसमें कम या नो ऑयल रेसिपी बनाना सिखेंगे.

श्रीमती रेखा नागपुरे जी ने कहा डॉक्टर ने हमें तेल कम खाना बताया है, जिससे डायबिटीज के मात्रा में संतुलन होता है श्रीमती उषा हिंदोरियाजी ने कहा हर गृहिणी के लिए ईंधन और तेल बचाना उनके हाथ में होता है। क्योंकि किचन गृहिणी संभालती है. भारत के त्यौहार में विशेष प्रकार के मीठा नमकीन बनते हैं। इसमें अधिक मात्रा में तेल की खपत होती है। हम उसपे कंट्रोल कर सकते हैं। श्री राजकुमार गुप्ता जी पूजा ज्वैलर्स ने कहा हमें अपने खानपान के माध्यम से हर चीज़ बैलेंस करनी होगी खासतौर पे तेल।

श्रीमती जया जी ने कहा खाना बनाते समय आवश्यकता के अनुसार ही तेल का उपयोग करें ताकि तेल की बर्बादी न हो और स्वास्थ्य भी अच्छा रहे। तलने के लिए उपयोग किए गए तेल को छानकर सीमित बार पुनः उपयोग करें, लेकिन बहुत अधिक बार इस्तेमाल करने से बचें क्योंकि वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है सभी सदस्यों के विचारों एवं सुझावों का सार प्रस्तुत करते हुए माननीय श्री बालकृष्ण भरतिया जी ने खाद्य तेल की बचत के लिए निम्नलिखित व्यावहारिक उपाय अपनाने का आह्वान किया. भरतिया ने कहा हमारे देश का रुपया कमज़ोर हो रहा है, इसके भी जिम्मेदार हम ही हैं. विदेशी कंपनियों में प्रोसेस्ड फ़ूड में खाद्य तेल बड़ी मात्रा में इस्तेमाल हो रहा है, कई कॉस्मेटिक्स में तेल मिलाया जाता है. क्या इनका सेवन ज़रूरी है. बहुत से साबुन और सौदरीय पदार्थ में खाद्य तेल होता है. ज्यादा मात्रा में ये लगाने के स्थान पर अपने स्वदेशी ग्लिसरीन से बने साबुन के भी फायदे हैं, जिससे शरीर में नुकसान होता है. हम घर में बने मक्खन घी भी खा सकते हैं।ये घर में ही बना हुआ ताजा शुद्ध और खुशबूदार एवं किफायती भी है.

घर या मंदिर में क्या हम मोम के दिए जला सकते ? क्या तेल का दिया जलाना जरूरी है. इस पर भी विचार किया जा सकता है. ठंड में कौन से तेल से मालिश करना जरूरी है।बॉडी लोशन से भी काम चल सकता है क्या. सोंचने वाली बात है.

क्या सप्ताह में एक दिन हम उपवास रख सकते हैं? क्या हम एक कोई दिन तेल रहित उबला हुआ भोजन खा सकते हैं. क्या हम सप्ताह में एक दिन फलाहार कर सकते हैं. सब्जी में तड़का लगाने के लिए भी कोई मेजरमेंट होना चाहिए जिससे सही मात्रा में शरीर को तेल भी मिलेगा और कोलेस्ट्रॉल की परेशानी भी जाती रहेगी. तलने के जगह एयर फ्राययर अवन इत्यादि का उपयोग हम कर सकते हैं। डी फ्राई की जगह स्टीमिंग करे. यह सब मुद्दों पर मंथन करना होगा. महिलाएं अपने किचन के माध्यम से देश सेवा कैसे कर सकते हैं इस पर भी चर्चा होगी. इतवार को साधारणतः मसालेदार खाना होता है. ऐसे में क्या सोमवार को उबला खाएं या फल खाएं।

ये सब निष्कर्ष निकालकर हमें चर्चा करनी है और उस पर अमल भी करना है।

अंत में सभी उपस्थित सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बैठक का सफलतापूर्वक समापन किया गया।

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