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    Published On : Sat, Sep 13th, 2014

    चतुर्वेदी की वक्र दृष्टि दक्षिण नागपुर पर


    पूर्व नागपुर में तेली समुदाय की बहुलता से घबराए

    सतीश चतुर्वेदी

    सतीश चतुर्वेदी

    नागपुर टुडे.

    पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के कृष्णा खोपड़े से भारी मतों से हारे कांग्रेस उम्मीदवार सतीश चतुर्वेदी फिर से पूर्व नागपुर से चुनाव लड़ने से भय खा रहे हैं. इसीलिए अब वे दक्षिण नागपुर से टिकट पाने का प्रयास कर रहे हैं. पिछले चुनाव में हारने के बाद श्री चतुर्वेदी करीब तीन साल तक सक्रिय राजनीति से दूर रहे थे. बाद में सर्मथकों के समझाने-बुझाने के बाद पूर्व नागपुर में फिर सक्रिय हुए. पूर्व नागपुर तेली समाज बहुल क्षेत्र है और भाजपा के वर्तमान विधायक खोपड़े भी तेली हैं. चतुर्वेदी के भय का कारण भी यही है.

    दो तरह की सलाह मिली

    पूर्व नागपुर से चार बार विधायक रह चुके चतुर्वेदी ने अपने कार्यकर्ताओं, साथी मंत्री और पूर्व सांसद से सलाह-मशविरा किया तो उन्हें दो तरह की सलाह मिली. इसमें एक यह थी कि पूर्व नागपुर से तेली समुदाय के दो उम्मीदवार खड़े करवा कर खोपड़े के लिए दिक्कत पैदा कर दी जाए और दूसरा यह कि दिल्ली के स्तर पर दक्षिण नागपुर से टिकट का जुगाड़ किया जाए.

    पूर्व नागपुर हिंदी भाषी बहुल क्षेत्र 

    चतुर्वेदी ने दोनों मोर्चो पर काम शुरू किया. पूर्व नागपुर से सक्षम और मजबूत तेली उम्मीदवार की खोज शुरू हुई. लेकिन यह खोज किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई. इस खोज में 500-1000 वोट खराब करने वाले तो कई मिले, लेकिन 5000-10,000 वोट खराब करने वाले नहीं मिले. जो मिले वे या तो चतुर्वेदी विरोधी निकले या फिर वे राजनीति में प्रत्यक्ष भाग नहीं लेना चाह रहे थे. पूर्व नागपुर में पूजा-पाठ करवाने वाला कुनबा बड़ी संख्या में है. वह भी अपने समाज का विधायक बनाने के लिए सक्रिय है. बात न बनती देख चतुर्वेदी ने एक कांग्रेसी विधायक से बात की. उस महत्वाकांक्षी परिजन ने कहा कि पूर्व नागपुर हिंदी भाषी बहुल क्षेत्र हैं, इसलिए उन्हें पूर्व नागपुर से ही चुनाव लड़ना चाहिए.

    दक्षिण से लड़ने का सुझाव

    दूसरी ओर चतुर्वेदी के एक सलाहकार पूर्व सांसद ने उन्हें समझाया कि लोकसभा में उन्होंने जो साथ दिया था उसका बदला चुकाने का यही वक्त है. इसलिए वे दक्षिण नागपुर से चुनाव लड़ने पर विचार करें. दक्षिण नागपुर से वर्तमान में कांग्रेस का विधायक है, जिसका स्थानीय स्तर पर काफी विरोध हो रहा है. इस विधायक को मुख्यमंत्री का समर्थक कहा जाने लगा है. मुख्यमंत्री ने भी उस विधायक को पुन: उम्मीदवारी देने का आश्वासन दिया है.

    कुछ इस तरह की है रणनीति

    यह खबर लगते ही चतुर्वेदी के उक्त सलाहकार ने दक्षिण नागपुर से टिकट की दावेदारी के लिए कुनबी समाज के नगरसेवक प्रशांत धवड़ और तेली समाज के संजय महाकालकर को वर्तमान विधायक के खिलाफ जोरदार ढंग से मैदान में उतार दिया है. रणनीति कुछ ऐसी बनी कि टिकट वितरण के वक़्त पूर्व नागपुर से भाजपा के तेली उम्मीदवार के खिलाफ कांग्रेसी तेली उम्मीदवार को उतारने का दबाव बनाया जाएगा. जब सफलता मिल जाएगी तो दक्षिण से तेली समाज की दावेदारी अपने-आप सकारात्मक रूप से खत्म हो जाएगी. फिर दक्षिण नागपुर से वर्तमान विधायक का टिकट कटवा दिया जाएगा. दक्षिण से ही कुनबी समाज की दावेदारी पश्चिम नागपुर से कुनबी उम्मीदवार देने के नाम पर खत्म कर दी जाएगी. जब सभी दावेदारियां खत्म हो जाएंगी तो हिंदी भाषी नेता को प्रतिनिधित्व देने के नाम पर दक्षिण नागपुर से सतीश चतुर्वेदी को उम्मीदवारी देने का दबाव बनाकर टिकट हासिल की जाएगी. चतुर्वेदी के सलाहकारों की यह योजना दिल्ली में कितनी कामयाब होती है, यह तो समय ही बताएगा.

    द्वारा:-राजीव रंजन कुशवाहा


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