Published On : Tue, Oct 19th, 2021
nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

सरकारी परियोजनाओं का दिवाला और निजीकरण को बढावा देने की साजिशें

सरकारी विधुत केंन्द्रों मे लाखों टन कोयला जलकर राख,हर महीने सरकार को करोडों रुपये की वित्तीय हानी

नागपुर- सरकारी परियोजनाओं का दिवालिया निकालने तथा निजी औधोगिक इकाईयों को प्रोत्साहन देने की सरकार जमकर साजिशैं चल रही है।प्राप्त सबूतों के मुताबिक देश की लगभग सभी 165 तापीय विधुत परियोजनाओं की कोल हैन्डलिंग प्लांटों मे निरंतर आग के कारण प्रति महीने करोडों रुपये कीमत का कोयला जलकर खाक हो रहा है।इस संबंध मे सभी राज्य शासनों की पावर जनरेशन कंपनियों के प्रधान ऊर्जा औधोगिक सचिव, चेयरमैन,(M.D.) उत्पादन निदेशक, तकनीकी निदेशकों और वित्तीय निदेशकों की चुप्पी विभिन्न संदेह को जन्म देती है।

उसी प्रकार केंद्र सरकार अधिनस्थ राष्ट्रीय ताप विधुत निगम(N.T.P.C.)के थर्मलों पावर प्लांटों की सी.एच.पी.मे कोयला जलकर राख हो रहा है।मानो राज्य और केन्द्र सरकार निजी बिजली कंपनियों को बढावा देने के लिए सरकारी उपक्रमों को दिवालिया बनाने की फिराक मे नजर आ रही है। लिहाजा मांगों अनुरुप कोयला नहीं मिलने की अधिकारियों को ड्रामेबाजी करना पड रहा है।देश के सभी पावर प्लांटों की कोल हैंडलिंग प्लांटों मे धू-धू कर कोयला जल रहा है।इस संबंध मे राज्यों तथा केन्द्रीय विधुत मंत्रालय कोई भी ठोस पहल करने मे हिचकिचा रहा है।नतीजतन देश के सभी पावर प्लांटों की कोल हैंडलिंग प्लांट(C.H.P.) में कुल मलाकर प्रति दिन करीबन 120 से 130 मीट्रिक टन कोयला जलकर राख हो रहा है।


विधुत विशेषज्ञों की मानें तो प्रत्येक बिजली केंन्द्रों मे करीबन 2% से 3% असली कोयला जलकर राख हो रहा है। हालाँकि दिखावे के लिए कोल हैंडलिंग प्लांट में लगी आग पर काबू पाने के फायर ब्रिगेड की पाईप लाईने बिछाई गई है।आग बुझाने के लिए प्रति वर्ष राज्य तथा केन्द्र सरकार करीबन 80 से 90 करोड़ रुपए खर्च कर रही है परंतु आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। हिन्दुस्तान में कोयला पर आधारित 165 बिजली परियोजनाएं संचालित है ।जिसमें से प्रति दिन कुल बिजली की उत्पादन क्षमता 3,71,054 मेगावाट है इसके अलावा जल विद्युत केन्द्रों से विधुत उत्पादन 45.699, मेगावाट है।परमाणु ऊर्जा 6.780 मेगावाट और नाभकीय ऊर्जा का उत्पादन 87.699 मेगावाट है पवन ऊर्जा 4.017मेगावाट तथा गैस टर्बाइन विधुत स्टेशनों से उत्पादित ऊर्जा 2.494 मेगावाट आंकी गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार कोयला पर आधारित बिजली परियोजनाओं मे प्रति यूनिट बिजली उत्पादन के लिए 800 से 850 ग्राम कोयला लगता है यानी 1मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए 18 से 20 मीट्रिक टन कोयला की आवश्यकता है।1 मेगावाट बिजली को यूनिट में भाग किया गया तो 24000 यूनिट बिजली उत्पादन होता है।

केन्द्रीय विधुत मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक हिन्दुस्तान में बिजली का उत्पादन 5,10,000 मेगावाट तक पंहुच जाएगा।परंतु पावर प्लांट के कोल हैंडलिंग प्लांट में लगी आग पर काबू पाया गया तो सरकार को प्रतिदिन करीबन 450 से 500 करोड रुपये का इजाफा हो सकता है।
कोयला मंत्रालय की माने तो प्रत्येक राज्य सरकारों तथा केन्द्रीय सरकार की बिजली परियोजनाओं को मागोंनुरूप कोयला पंहुचाने का भरसक प्रयास किया जाता है।परंतु असली कोयला के स्टाक पीएचपी यार्डों मे बडी मात्रा में उच्चतम कोयला निरंतर अग्नि की ज्वाला से राख बन रहा है।

हालांकि कोल इंडिया कंपनी की सातों अनुसंगिक कंपनियों की कोयला खदानो तथा कोयला यार्डों मे लगी आग के कारण भी सरकार को करोडों का चूना लगाया जा रहा है।बता दें कि हिन्दुस्तान के पावर प्लांटों को प्रति दिन बाशरी कोल 4 ग्रेड व 5 ग्रेड का कोयला 35 सौ मीट्रिक टन रैक भेजा जा रहा है।कोयला यार्डों मे आग लगने के कारण कोयला नही जाने के कारण विधुत परियोजनाओं मे हाहाकार मच जाता है। सनद रहें कि महानदी कोल फिल्ड(MCL) उड़ीसा की कोयला खदानो से प्रति दिन कोयला का उत्पाद 71,447,41 मिलियन मीट्रिक टन है।

जबकि SECCL बिलासपुर छत्तीसगढ़ की कोयला खदानो से प्रति दिन कोयला का उत्पाद 50,846,15 मिलियन मीट्रिक टन का भंडार उपलबध है, उसी प्रकार 30,665,72 मिलियन मीट्रिक टन कोयला प.बंगाल की कोयला खदानो मे उपलबध है। जबकि 24,376,26 मिलियन मीट्रिक टन कोयला मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की WCL की खदानो से कोयला उत्पादित होता है।हालांकि हिन्दुस्तान में प्रति व्यक्ति सबसे कम बिजली की खपत है।जबकि पूरी दूनिया मे बिजली की खपत औसतन 2429 यूनिट है क्योंकि हिन्दुस्तान में यह खपत 734 यूनिट है।कनाडा में बिजली की खपत 18347 यूनिट है।अमेरिका में 13,647 यूनिट जबकि चीन मे बिजली की खपत 2456 यूनिट प्रति व्यक्ति है।

उधोग व व्यापार की तुलना में बिजली की अधिक खपत घरेलू तथा कृषि उत्पाद मे होती है।हिन्दुस्तान जब 1947 मे आजाद हुआ तब बिजली का उत्पादन कुल 1362 मेगावाट थी।यानी बिजली का निर्माण 22% था।वर्तमान परिवेश मे बिजली का उत्पाद बढकर 1लाख 75 हजार मेगावाट पंहुच चुकी है।देश आजाद हुआ तब देश के राजनेताओं पूर्णतः निष्कलंक व निष्पाप थे परंतु आज राजनीति में अनियमितता और भ्रष्टाचार का बोलबाला बरकरार है।

महाराष्ट्र का असमर्थ ऊर्जा मंत्रालय
एक सर्वेक्षण के मुताबिक महाराष्ट्र राज्य विधुत मंडल का चेयरमैन व ऊर्जा मंत्री पर आरोप है कि महाराष्ट्र के इतिहास में एसा असमर्थ ऊर्जामंत्री कभी नही देखा गया है। जिसमे निर्णय लेने की जरा भी क्षमता नही है।महाराष्ट्र पावर जनरेशन कंपनी की अधिकांश श्रमिक संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि कंपनी ठेकेदारों को बकाया भुगतान के लिए
मंत्रालय के पास निधि नही है।

बताते हैं कि यह ऊर्जा मंत्री अघाडी सरकार के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उपमुख्य मंत्री अजीत पवार के सामने बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।सभी राज्य के पावर प्लांटों का मानना है कि यह ऊर्जा मंत्रालय अति अनुभवी मंत्री अजीतदादा पवार को सौंपा जाना चाहिए।हालांकि सभी पावर प्लांटों से अवैध वसूली के लिए ऊर्जा मंत्री ने हरदवानी नामक दलाल पाल रखा है।

बताते हैं कि कमाल चौक नागपुर में इस झोलाछाप कथित दलाल की दुकान मे कामों के ठेके हथियाने के लिए ठेकेदारों की लाईन लगी रहती है। नतीजतन इस ऊर्जा मंत्री की करतूतों की वजह से महाराष्ट्र में कांग्रेस की छबि धूमिल हो रही है।