
नागपुर: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) संदीप जोशी ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की औपचारिक घोषणा की है। उन्होंने इसके पीछे बदलती राजनीतिक संस्कृति, बढ़ते दल-बदल और संगठन में युवा नेतृत्व के लिए स्थान बनाने की आवश्यकता को प्रमुख कारण बताया है।
“अब मुझे रुकना है” शीर्षक से लिखे गए अपने भावुक और आत्ममंथन से भरे पत्र में जोशी ने कहा कि उनके लिए राजनीति कभी पद या सत्ता का साधन नहीं रही, बल्कि सेवा, निष्ठा और प्रतिबद्धता का मार्ग रही है। लेकिन वर्तमान समय में सत्ता के लिए हो रहे पक्ष परिवर्तन, अवसरवाद और सीमित पदों के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने न केवल आम मतदाताओं बल्कि समर्पित कार्यकर्ताओं को भी असहज कर दिया है।
जोशी ने लिखा कि वह आज भी स्वयं को भाजपा का एक सामान्य कार्यकर्ता मानते हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए उन्होंने स्वयं पीछे हटने का निर्णय लिया है।
55 वर्ष की आयु का उल्लेख करते हुए जोशी ने कहा कि संगठन को आगे बढ़ाने के लिए युवा नेतृत्व को अवसर देना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 13 मई को उनकी विधान परिषद सदस्यता की अवधि पूरी हो रही है और इसके बाद वह किसी भी राजनीतिक पद या जिम्मेदारी को न तो मांगेंगे और न ही स्वीकार करेंगे, भले ही पार्टी उन्हें कोई प्रस्ताव दे।
उन्होंने कहा कि 13 मई तक वह एक जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी सभी संवैधानिक, नैतिक और सार्वजनिक जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह निर्णय किसी भावनात्मक क्षण में नहीं, बल्कि गहन विचार के बाद लिया गया है।
अपने पत्र में संदीप जोशी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से क्षमा मांगते हुए कहा कि पार्टी और उसके नेतृत्व ने ही उन्हें गढ़ा है और राजनीति में आगे बढ़ने के अवसर दिए।
राजनीति से अलग होने के बाद भी सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल क्षेत्र में सक्रिय रहने की बात कहते हुए जोशी ने कई सामाजिक परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिनमें कोरोना काल में एकल पालक बनी महिलाओं के लिए सहायता परियोजनाएं, नागपुर में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों के लिए भोजन सेवा, गोसेवा परियोजनाएं, स्वास्थ्य जांच केंद्र और विभिन्न राज्य स्तरीय खेल संघों से जुड़ा कार्य शामिल है।
जोशी ने स्वीकार किया कि उनका यह निर्णय उनके परिवार, समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए चौंकाने वाला हो सकता है, जिसके लिए उन्होंने सभी से विनम्रतापूर्वक क्षमा मांगी।
अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि पार्टी ने एक सामान्य कार्यकर्ता को चार बार नगरसेवक, स्थायी समिति अध्यक्ष, महापौर और विधान परिषद सदस्य जैसी जिम्मेदारियां सौंपकर सम्मान दिया।
उन्होंने कहा कि राजनीति में बने रहने पर आगे भी अवसर मिल सकते थे, लेकिन उनकी उपस्थिति के कारण यदि किसी सामान्य कार्यकर्ता के साथ अन्याय होता है, तो यह उन्हें स्वीकार नहीं। “मेरे न रहने से किसी का नुकसान नहीं होगा, यही अंतिम सत्य है,” ऐसा उन्होंने पत्र में लिखा है।
संदीप जोशी के इस फैसले को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो सत्ता से अधिक सिद्धांतों और आत्मसम्मान को प्राथमिकता देने का संदेश देता है।










