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    Published On : Sat, Sep 28th, 2019

    इंदु मिल, मराठा आरक्षण पर फडणवीस सरकार ने लिए महत्वपूर्ण निर्णय

    सत्तापक्ष नेता संदीप जोशी ने कार्यकर्ताओ को किया मार्गदर्शन

    नागपुर: शताब्दी चौक के रमा नगर प्रभाग 35 में कार्यकर्ता सम्मलेन आयोजन किया गया. इस दौरान सत्तापक्ष नेता संदीप जोशी के मार्गदर्शन में यह सम्मेलन हुआ. कार्यक्रम में नगरसेवक संदीप गवई, फुलझेले, प्रभाकर सायंकार, अतुल सोनटक्के, राम अहिरवार, रूपा भगत, रुपेश तावड़े, प्रकाश गवई, कोसमकार ताई, अजय धोटे, बिट्टू चव्हाण मौजूद थे. इस दौरान जोशी ने कहा की इस क्षेत्र में भाजपा के कार्यकर्ता कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने से पहले राज्य की पिछली सरकार में 73 हजार करोड़ का सिंचन घोटाला हुआ था. सिंचन घोटाला होने के बाद राज्य में सिंचन की समस्या उत्पन्न हो गई थी.

    इसके बाद किसानों की आत्महत्या में बढ़ोत्तरी हो रही थी, और किसान कर्ज से भी परेशान थे. उस दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री ने डैम में पानी के संदर्भ में बहोत गलत बात कही थी. पूर्व सरकार असंवेदनशील सरकार थी. देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने के बाद इंदु मिल का जो प्रश्न था. जिसपर कांग्रेस केवल घुमाने का कार्य कर रही थी. यह प्रश्न केवल 8 महीनो में फडणवीस ने हल कर दिया.

    फडणवीस सरकार ने इंदु मिल की जगह पर बाबासाहेब की प्रतिमा को मंजूरी दी. जोशी ने आगे कहा की आज उन्हें एक डिग्री लेने में परेशानी हुई लेकिन बाबासाहेब ने 12 डिग्रियां ली है. लंदन में पढ़ाई के दौरान जिस घर में बाबासाहेब रहे थे. वह घर राज्य सरकार ने लिया है. जिससे की यूवा पीढ़ी को बाबासाहेब के संघर्ष के बारे में जानकारी मिले. यह हिम्मत केवल फडणवीस सरकार ने दिखाई है. इतने लोग मुख्यमंत्री हुए लेकिन मराठा समाज को आरक्षण एक ने भी नहीं दिया था. मराठा आरक्षण को लेकर विपक्षियों ने मोर्चे निकाले और फडणवीस सरकार को घेरने की तैयारी की.

    फडणवीस सरकार ने एक प्रबल आरक्षण मराठा समाज को दिया है. ओबीसी आरक्षण को धक्का लगाए बिना. ओबीसी की नॉन क्रीमीलेयर की मर्यादा साढ़े 4 लाख रुपए थी. उसे साढ़े 7 लाख रुपए करने का निर्णय मुख्यमंत्री ने लिया. 60 साल कांग्रेस का शासन होने के बाद भी मालकी हक्क के पट्टे झोपडपट्टीवासियो को नहीं दिए गए, वह देने का काम फडणवीस सरकार ने किया है. सफाई कर्मचारियों का वेतन 9 हजार रुपए था. उनका वेतन 16 हजार रुपए करने का कार्य भी इसी सरकार ने किया है. 5 वर्ष सरकार चलाने के बाद भी मुख्यमंत्री पर एक भी दाग नहीं है.

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