
नागपुर: आरटीई के तहत पहले एडमिशन करने की तारीख 24 मार्च थी, लेकिन अब उसे पुणे शिक्षा विभाग की ओर से बढ़ा दिया गया है. अब पालक 4 अप्रैल तक एडमिशन कर सकते हैं. आरटीई की प्रक्रिया हर साल की तरह इस साल भी पालकों के लिए सिरदर्द ही साबित हो रही है. जिसके कारण बच्चों के पालक आरटीई प्रक्रिया से ही बाहर जाने लगे हैं. इस प्रक्रिया में पहले ही इतनी ज्यादा परेशानी है और ऐसे में शिक्षा उपसंचालक अनिल पारधी ने एक निर्णय देकर पालकों को और परेशानी में डाल दिया है. शिक्षा उपसंचालक ने फरमान जारी कर किरायदार पालकों का आरटीई के अंतर्गत नम्बर लगनेवालों को स्कूल में एडमिशन कराने के लिए सब रजिस्ट्रार ऑफिस से रेजिस्टर्ड रेंट अग्रीमेंट जरूरी कागजात के साथ जोड़ने के निर्देश जारी कर दिया है. इसके बिना प्रवेश नहीं दिया जाएगा.
इस रेंट अग्रीमेंट का खर्च लगभग 7 से 8 हजार रुपए आ रहा है. जिसके कारण गरीब पालकों के लिए शिक्षा उपसंचालक का यह फरमान उनके बच्चों को आरटीई एडमिशन से दूर करनेवाला जैसा साबित हो रहा है. किराए से रहनेवाले सैकड़ों पालकों को रजिस्टर्ड अधिकृत रेंट अग्रीमेंट लेना मुश्किल हो रहा है. क्योंकि इसके लिए घर मालक की अनुमति लेनी जरूरी है और वह इसके लिए जल्दी तैयार नहीं होते. आरटीई में एडमिशन करनेवाले ज्यादातर पालक गरीब हैं और स्लम इलाकों में होने के चलते उन्हें रेंट अग्रीमेंट मिलने में कठिनाई भी आ रही है.
जानकारी के अनुसार 23 मार्च 2017 को प्राथमिक शिक्षा संचालक गोविंद नांदेडे ने अपने निकाले गए पत्र में सीधे बताया था कि जिन पालकों के पास आधार कार्ड, वोटिंग कार्ड, किराए की रसीद इनमें से कोई भी एक प्रूफ रहा तो उन्हें एडमिशन दें. अगर कोई भी डॉक्यूमेंट न हो तो सब रजिस्ट्रार ऑफिस से रेजिस्टर्ड रेंट अग्रीमेंट जरूरी होगा. लेकिन इस बार शिक्षा उपसंचालक के निर्णय के कारण कई विद्यार्थी प्रवेश से वंचित रहनेवाले हैं.
इस बार पालकों को आरटीई प्रक्रिया ने काफी चिंताजनक स्थिति में डाल दिया है. जिसके कारण आरटीई एक्शन कमिटी के चेयरमैन मोहम्मद शाहिद शरीफ ने शिक्षा उपसंचालक से मांग की थी कि एडमिशन की प्रक्रिया की तारीखें आगे बढ़ाई जाएं. शिक्षा उपसंचालक से हुई चर्चा के बारे में उन्होंने बताया कि तारीख़े बढ़ने के बाद ही आरटीई की समस्याओं को दूर किया जा सकता है. जबकि अब तारीख बढ़ चुकी है. जिससे पालकों को लाभ होगा. शरीफ ने बताया कि इस बार की आरटीई की प्रवेश प्रक्रिया में कई गंभीर मामले सामने आए हैं. एक विद्यार्थी को तीन स्कूल दिए गए हैं, सील लगी हुई स्कूलें विद्यार्थी को दी गईं हैं, स्कूल का रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर स्कूल ने विद्यार्थी को एडमिशन देने से मना किया. कई स्कूलों की ओर से पैसे भी मांगे जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि अधिकारियों की ओर से भी पालकों को परेशांन किया जा रहा है. इस बार आरटीई प्रक्रिया पूरी तरह से फेल हो चुकी है.
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