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    Published On : Wed, May 1st, 2019

    आरएसटी रीजनल कैंसर हॉस्पिटल में एचडीआर ब्रैकीथेरफी से हर महीने 150 गर्भाशय से पीड़ित महिलाओ का हो रहा है इलाज

    नागपुर: महिलाओ में गर्भाशय के मुंह के कैंसर का प्रमाण बढ़ रहा है. जिसे डॉक्टरी भाषा में सर्विक्स कैंसर कहते है. इसके इलाज के लिए भारत सरकार के स्वास्थ मंत्रालय के दिए गए अनुदान और सहायता से जर्मनी मेड यह मशीन राष्ट्रसंत तुकडोजी रीजनल कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ने ली है. जिसका नाम एचडीआर ब्रैकीथेरफी है. अब मशीन के जरिए गर्भाशय के कैंसर का इलाज किया जा रहा है. यह जानकारी राष्ट्रसंत तुकडोजी रीजनल कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर डॉ. शुभ्रजीत दासगुप्ता ने दी. उन्होंने बताया की लंग कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और सर्विक्स का कैंसर प्रमुख है. उन्होंने कहा कि सात से आठ महीने पहले यह मशीन लायी गई है. यह मशीन मेडिकल हॉस्पिटल के बाद अब कैंसर हॉस्पिटल में मौजूद है. जिसके द्वारा महिलाओ का इलाज किया जा रहा है.

    इस दौरान हॉस्पिटल के स्त्रीरोग और कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मयूर दायगवाने ने बताया की सर्विक्स कैंसर भारत में दूसरे नंबर का कैंसर है. यह गर्भाशय के मुंह का कैंसर है. यह कॉमन कैंसर है. भारत में हर साल करीब 1 लाख महिलाओ को यह कैंसर होता है. हर साल लगभग 60 हजार महिलाओ की इस कैंसर से मौत होती है. हर 10 मिनट में एक महिला की मौत इस कैंसर से होती है. इलाज से पहले इसे डिटेक्ट करना पड़ता है. जब डिटेक्ट होता है तो कई बार लेट हो जाता है. इसके लिए स्क्रीनिंग करनी पड़ती है. उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि शादी के बाद हर महिला को हर 3 साल में स्क्रीनिंग करवानी चाहिए. अगर नहीं करते है तो महिलाओ का सफ़ेद पानी जाना और ब्लीडिंग होती है. इसके बाद वह आगे की स्टेज में जाता है. हमारे देश में स्क्रीनिंग की कमी पायी जाती है. क्योकि जागरूकता की कमी है. इसकी स्क्रीनिंग का बहोत ही आसान तरीका है. लेकिन जागरूकता नहीं होने के कारण महिलाएं हॉस्पिटल में नहीं आती है. उन्हें कई बार लगता है की छोटी मोटी समस्या है. घरघूती इलाज से ठीक हो जाएगी. ऐसा करते करते 6 महीने से साल भर हो जाता है.

    स्क्रीनिंग में कैंसर से पहले की स्टेज आया तो आसानी से छोटे ऑपरेशन से ठीक हो जाता है. उसे प्री- कैंसर स्टेज कहते है. लेकिन 99 प्रतिशत महिलाएं कैंसर के बाद आती है. कैंसर की जानकारी नहीं होने के कारण महिलाएं लेट आती है. स्क्रीनिंग होता है, कहा होता है, इसकी जानकारी महिलाओ को नहीं होती है. हर साल हॉस्पिटल में 300 से 400 महिलाएं सर्विक्स कैंसर की महिला मरीज हॉस्पिटल में पहुँचती है. कई महिलाओ को इन्फेक्शन भी होता है. इसका एक कारण यह भी है की स्वच्छता न रखना, ज्यादा बच्चे होना. सर्जरी होने के बाद करीब 10 दिन में इलाज हो जाता है. रेडिओथेरपी में एक से दो महीने का समय लगता है.

    रेडिओथेरपिस्ट डॉ. प्रशांत ढोके ने इस मशीन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि एचडीआर ब्रैकीथेरफी से रोजाना करीब 4 से 5 मरीज का इलाज किया जा रहा है. हर महीने इस मशीन से करीब 150 महिलाओ का इलाज हॉस्पिटल में हो रहा है. इस मशीन से गर्भाशय के मुख और गर्भाशय का इलाज किया जाता है. उन्होंने बताया की यह मशीन काफी अत्याधुनिक है. मशीन में कोबाल्ट 60 सोर्स है. इससे गर्भाशय के मुख और गर्भाशय का इलाज इस मशीन द्वारा किया जाता है.

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