Published On : Thu, Mar 2nd, 2017

आरएसएस के निषेध मोर्चे की मुख्य दस बातें

कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना की तर्ज पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बुधवार की शाम देश की कम्युनिस्ट पार्टियों को केरल के बहाने कटघरे में खड़े करने के लिए नागपुर में एक आयोजन किया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने इस आयोजन में बतौर प्रमुख वक्ता शिरकत करते हुए भारत की सभी कम्युनिस्ट पार्टियों और साम्यवाद की विचारधारा का अनुसरण करने वालों को जमकर लताड़ लगायी. 

आरएसएस जो अभी तक अनुशासन और संयम के लिए ख्यात थी, कल के आयोजन के बाद से अनुशासनहीनता और असंयमित मिज़ाज के लिए जानी जाएगी. जिस तरह से आरएसएस ने बुधवार की शाम आयोजित विरोध प्रदर्शन में अपने उग्र तेवर दिखाए हैं, उससे तो यही आसार बन रहे हैं कि कट्टर दक्षिणपंथी विचारधारा को आत्मसात करने और उस पर अमल करने वाली आरएसएस ने देश की वामपंथी विचारधारा से तीव्र टकराव का बिगुल फूंक दिया है. यह कहना अतिश्योक्ति न होगी कि आने वाले दिनों में संघ ने विचारधारा के टकराव को केरल राज्य की सीमाओं से निकालकर देश भर में फ़ैलाने का ऐलान कल के कार्यक्रम के जरिए कर दिया है. तो क्या अब देश भर में विचारधारा के नाम पर खून-खराबा शुरु हो जाएगा?


1. नागपुर के संविधान चौक पर आरएसएस से संलग्न लोकाधिकार मंच ने निषेध सभा और प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया. केरल में मारे जा रहे आरएसएस के स्वयंसेवकों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करने और केरल राज्य की कम्युनिस्ट पार्टियों का विरोध करने के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया.


2. कम्युनिस्टों के निषेध कार्यक्रम की शुरुवात संविधान चौक स्थित डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई. सभा के मंच पर आरएसएस के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी, केरल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष श्री मुरलीधरन, नागपुर महानगर पालिका के निवर्तमान महापौर प्रवीण दटके, सीए त्रय राजेश लोया, कैलाश जोगानी एवं तेजिंदर सिंह रेणु तथा उद्यमी उदयभास्कर नायर सहित संघ से जुड़े अन्य पदाधिकारी बैठे थे.


3. केरल के बहाने भैयाजी जोशी ने हाल ही दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में वामपंथी और दक्षिणपंथी छात्र संगठनों के झड़प पर स्वर तीखे किए, फिर देश भर के विश्वविद्यालयों में वैचारिक प्रदूषण फ़ैलाने के लिए साम्यवादी विचारधारा को आड़े हाथों लिया और लेडी श्रीराम कॉलेज की विद्यार्थी गुरमेहर कौर का साथ देने वालों को खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने कहा कि गुरमेहर कौर और उसके समर्थकों के साथ कोई राजनीति नहीं हो रही है.



4. भैयाजी जोशी ने कहा कि केरल में संघ के डेढ़ दर्जन से ज्यादा स्वयंसेवक मारे गए हैं, लेकिन जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां किसी तरह की राजनीतिक हत्याएं नहीं होती है. आरएसएस के सरकार्यवाह ने कहा कि साम्यवादी विचारधारा भ्रमित करने वाली एवं अमानवीयता को बढ़ाने वाली विचारधारा है और हर राष्ट्रप्रेमी को इस तरह की विचारधारा का निषेध करना चाहिए.


5. भैयाजी जोशी ने कहा कि साम्यवादी विचारधारा की इस देश को जरुरत नहीं है. यह विचारधारा जहाँ जन्मी, उन देशों ने भी इसे त्याग दिया है तो फिर ये भारत में अपना अस्तित्व बचाने के लिए क्यों संघर्ष कर रही है.


6. पूरे आयोजन में कमाल की अनुशासनहीनता देखने को मिली. संघ के आयोजनों के विपरीत यहाँ दर्शकों की तरफ़ से तरह-तरह के उत्तेजक नारे लगाए गए, यहाँ तक कि कम्युनिस्टों को तेज आवाज में भद्दी गलियां तक दी गई. गुरमेहर कौर का जिक्र होने पर जिस तरह से हँसने की आवाजें दर्शकों के बीच से आयी, वह संवेदनशील व्यक्ति को शर्मसार करने वाली थीं.


7. स्वयं भैयाजी जोशी भी खूब उत्तेजित होकर अपना भाषण देते रहे, मानों कम्युनिस्टों के साथ किसी युद्ध की घोषणा कर रहे हों.


8. प्रदर्शनकारियों के हाथ में तरह-तरह के फलक थे. एक फलक पर लिखा था सीपीएम = कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ मर्डरर्स.


9. मोबाइल टॉर्च जलाकर केरल में मारे गए आरएसएस के स्वयंसेवकों को श्रद्धांजलि और वहां की सरकार का निषेध, फिर केरल के मुख्यमंत्री की प्रतीकात्मक शवयात्रा और संविधान चौक से आकाशवाणी चौक यानी एक किलोमीटर के संवेदना मार्च के साथ आयोजन समाप्त हुआ.


10. आयोजन लोकाधिकार मंच की ओर से किया गया था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं से सभास्थल अटा पड़ा था. नारे, हो-हल्ला, भद्दे मजाक और गलियां जैसे कल के आयोजन की विशेषता रही.