नागपुर – उपराजधानी में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार चिंता बढ़ा रहा है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच पांच वर्षों में शहर में 44,660 नागरिकों को कुत्तों ने काटा, जबकि इनमें से 9,946 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। मनपा के आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि में रेबीज के कारण 8 लोगों की मौत भी दर्ज की गई है। 28 सितंबर को मनाए जाने वाले विश्व रेबीज दिवस के बीच सामने आए ये आंकड़े शहर में रेबीज की रोकथाम और आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की चुनौती को उजागर करते हैं।
2025 में सबसे ज्यादा मामले
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में कुत्तों के काटने के 5,800 मामले सामने आए और 1,484 लोग गंभीर घायल हुए। 2022 में 8,317 मामले और 2,134 गंभीर घायल, 2023 में 9,110 मामले और 1,877 गंभीर घायल हुए। वर्ष 2024 में 9,429 लोगों को कुत्तों ने काटा और 1,841 गंभीर घायल हुए। वहीं 2025 में सर्वाधिक 10,944 लोगों के कुत्ते के काटने के मामले सामने आए और 2,173 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
69 हजार से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी
कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए मनपा की ओर से नसबंदी अभियान चलाया जा रहा है। मनपा के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में तीन संस्थाओं के माध्यम से 69,386 कुत्तों की नसबंदी की गई है। इसके बावजूद कुत्तों के हमलों में कमी नहीं आने से नसबंदी अभियान की प्रभावशीलता और आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बंदर, गधे और सुअरों के हमले भी चिंता का विषय
शहर में केवल कुत्ते ही नहीं, बल्कि बंदर, गधे और सुअरों के हमले भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। मनपा के आंकड़ों के अनुसार, इन जानवरों के हमलों में भी 6,126 लोग घायल हुए हैं। घायलों का मनपा के अस्पतालों में उपचार किया गया।
28 सितंबर को मुफ्त एंटी रेबीज टीकाकरण
विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर पशुसंवर्धन विभाग ने जिले की सभी पशु चिकित्सा संस्थाओं में 28 सितंबर को कुत्तों का मुफ्त रेबीज टीकाकरण करने का निर्णय लिया है। पशुसंवर्धन उपायुक्त डॉ. नितिन फुके ने नागरिकों से अपील की है कि रेबीज से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण और सावधानी बेहद जरूरी है।





