Published On : Tue, Mar 3rd, 2020

मनपा का संशोधित व प्रस्तावित बजट 2500 करोड़ के आसपास

– जल्द मनपायुक्त तुकाराम मूंढ़े प्रस्तुत करेंगे

नागपुर : नागपुर महानगरपालिका की मुख्य आय स्त्रोत संपत्ति व जल कर वसूली में प्रशासन की ढुलमुल रवैय्ये के आगे नतमस्तक मनपा आयुक्त तुकाराम मूंढ़े जल्द ही मनपा का संशोधित व प्रस्तावित बजट 2500 करोड़ के आसपास प्रस्तुत कर सकते हैं.इसके लिए वे सुबह 9 बजे से लेकर देर रात तक जोड़-घटाव कर रहे.

मूंढ़े के अनुसार मनपा को राज्य सरकार से औसतन 100 करोड़ मिल रहा,केंद्र- राज्य सरकार के पास 300 करोड़ का बकाया हैं.मनपा खुद 6 लाख सम्पत्तियों से २५० से २७५ करोड़ तक ही जैसे तैसे वसूल पाती जबकि 500 करोड़ का वार्षिक टार्गेट तय किया जाता।जल कर में न्यूनतम टार्गेट 200 करोड़ का होने के बावजूद 150 करोड़ ही पहुँच पाता।

मनपा पर बकाया के नाम पर ठेकेदारों,कर्मियों के वेतन से काटे जाने वाले राशि सम्बंधित विभागों और मनपा के ठेकेदारों को 400 करोड़ रूपए के आसपास देना बांकी हैं.इसके अलावा मनपा के विशेष प्रकल्पों के लिए बैंकों,वित्तीय संस्थानों से लिए गए कर्जों का मासिक क़िस्त चुकाना भी जिम्मेदारी हैं.इस हिसाब से समझा जा रहा कि मनपा आयुक्त मूंढ़े का संशोधित व प्रस्तावित बजट 2500 करोड़ के आसपास प्रस्तुत किया जाएगा।
मूंढ़े के बजट पर सत्तापक्ष के साथ विपक्ष की भी नज़र लगी हुई हैं। वहीं मूंढ़े के बजट को मूर्त रूप देने के लिए शिवाय चर्चित ‘कैफो’ के शेष मूर्ति का रूप धारण किये हुए हैं.

इस बजट के प्रस्तुत होते ही नव गठित होने वाली स्थाई समिति के हाथ-पांव फूलना निश्चित हैं.क्यूंकि स्थाई समिति को भी अपना वर्ष 2020-21 का बजट उसी अंदाज में प्रस्तुत करना पड़ेंगा।ज्यादा हवाबाजी की तो मुँह के बल गिरने की नौबत आ सकती हैं.

उल्लेखनीय यह हैं कि मूंढ़े ने सभी वार्ड अधिकारियों को संपत्ति,जल,बाजार,नगर रचना,विज्ञापन आदि विभागों से जुडी आय का कुल ६० से ७५ करोड़ रूपए वसूली का सख्त टार्गेट दिया तो मनपा स्वयं बल पर खड़ी हो सकती हैं.गैरकानूनी रूप से मनपा खर्चे पर दौड़ रही वाहनों को बंद किया गया तो बड़ी राहत मिल सकती हैं.कोटेशन के तहत होने वाले कामों का अंकेक्षण किया गया तो आर्थिक बजट होंगी।मनपा,नासुप्र,सांसद निधि,विधायक निधि के लिए एक संयुक्त सेल का गठन किया गया तो बोगस बिल निर्माण पर लगाम लग सकता हैं.और आय बढ़ाने वाले विभागों को शहर के मान से कर्मी उपलब्ध करवाई गई तो आय निश्चित ही बढ़ेंगी।

‘सीएफसी’ में सतत जारी हैं शोषण
मनपा से सम्बंधित किसी व्यक्ति विशेष की ‘सीएफसी’ नामक कंपनी मनपा में लगभग डेढ़ दशक से कार्यरत हैं.यह कंपनी नगरसेवकों,अधिकारियों के सिफारिश पर मनपा में ऑपरेटर नियुक्त करती हैं.इस क्रम में पूर्व महापौर और पूर्व आयुक्त बांगर का भी समावेश हैं,फिर चाहे वह सक्षम हो या न हो.यह कंपनी मनपा से ऑपरेटर के नाम पर वेतन उठाते कुछ हैं और वितरित अल्प करते हैं,ऑपरेटरों के वेतन से जो कटिंग करते हैं,वे जमा भी नहीं करते।मनपा की सभा ने 160 ऑपरेटरों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.लेकिन अब 186 ऑपरेटर हो गए,इनकी गुणवत्ता की कभी समीक्षा नहीं की गई,कुछ तो अकारण मासिक वेतन उठा कर मनपा को चुना लगा रहे.जबकि मनपा प्रशासन ने अपने मूल कर्मियों को कम्प्यूटर की ट्रेनिंग करने की अनिवार्यता की,साथ में उन्हें वेतन वृद्धि भी दी और ऐसे वेतन वृद्धि का लाभ उठाने वाले या तो मजे काट रहे या फिर पानी पीला रहे.क्या यहीं मूंढ़े नीत हैं ? या फिर कथनी और करनी में फर्क को सही साबित कर रहे.

सूखा चिकन व अंडा भुर्जी का मजा ले रहे अधिकारी
मनपा के एक विवादास्पद अधिकारी जब से मनपा में तैनात हुए वे मनपा खर्चों पर पेट-पूजा कर रहे.उन्हें खाने में अंडा भुर्जी व सूखा चिकन काफी पसंद हैं.जिसका नियमित भुगतान मनपा का सम्बंधित विभाग कर रहा हैं.जबकि अधिकारी ने खुद इसका वहन करना चाहिए।क्यूंकि इनके निवास व्यवस्था पर पूर्व समकक्ष अधिकारी का कब्ज़ा हैं. मनपा का खर्च बढ़ाने वाले इस अधिकारी ने जब नागपुर में कदम रखा था तब उन्होंने अपने चापलूस कर्मियों से पूछा था कि मेरे भोजन का क्या व्यवस्था तो इसी चापलूस कर्मी जो आज भी साए की तरह इनके इर्द-गिर्द हैं,उसने तपाक से कहा था कि ठेकेदार आपकी व्यवस्था कर देंगे।फिर सम्बंधित विभाग के अधिकारी ने मामला सँभालते हुए कहा था कि या भुगतान आप करेंगे या फिर मनपा।

बांगर को मुख्यधारा में लाने की कवायत
मनपा के पूर्व आयुक्त अभिजीत बांगर को मनपा से दूर करते ही कुछ समय खाली-पिली रखा गया फिर वस्त्रोद्योग विभाग में तबादला कर दिया गया.फ़िलहाल वे नागपुर के विभागीय आयुक्त कार्यालय में स्थित वस्त्रोद्योग विभाग में तैनात हैं.पिछले सप्ताह उन्हें लेकर पूर्व पालकमंत्री के घर पर एक अहम् बैठक हुई.इस बैठक में एक मंत्री भी शामिल था.यह पूर्व पालकमंत्री इन दिनों सेना सुप्रीमों का करीबी हैं.सूत्र बतलाते हैं कि बांगर को नागपुर में ही रखने के उद्देश्य से यह बैठक आयोजित की गई थी.मुख्यमंत्री के हरी झंडी मिलते ही ये या तो पुनः मनपा या फिर नासुप्र का सभापति बनाया जा सकता हैं ? शायद इसलिए बांगर मनपायुक्त का बंगला अभी तक अपने कब्जे में रखें हुए हैं और तो और मनपा आयुक्त मूंढ़े भी बांगर के खासमखास विवादास्पद कर्मी प्रमोद हिवसे को नहीं छेड़ रहे !