देवा भाऊ, आपके अपने करीबी ही कानून को ठेंगा दिखाएं तो सवाल आपसे भी होगा!
अजनी की दही हंडी में 90-100 डेसिबल का DJ, रात 10 बजे के बाद भी तेज आवाज; Orange City Square पर भी सड़क घेरकर वाहन चालकों को गलत दिशा में चलने पर मजबूर किया गया
नागपुर। धार्मिक उत्सव हमारी आस्था और परंपरा का हिस्सा हैं। लेकिन क्या धार्मिक कार्यक्रम के नाम पर कानून, पुलिस के आदेश और आम नागरिकों की परेशानी-तीनों को दरकिनार करने की छूट मिल जाती है?
नागपुर में हाल की दो घटनाएं इस सवाल को और गंभीर बनाती हैं।
एक तरफ अजनी चौक की दही हंडी, जहां पुलिस की मौजूदगी और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद हाई-वॉल्यूम DJ बजता रहा। दूसरी तरफ Orange City Square पर BJYM South West Nagpur का दही हंडी कार्यक्रम, जहां Ring Road की पूरी एक carriageway कथित तौर पर कार्यक्रम के लिए बंद कर दी गई और वाहन चालकों को divider opening तक गलत दिशा में जाने को मजबूर होना पड़ा।
दोनों घटनाओं में एक बात समान है-आयोजकों का राजनीतिक प्रभाव और सत्ता के करीबी होने की सार्वजनिक धारणा।
और यहीं से सबसे बड़ा सवाल निकलता है:
देवा भाऊ, कानून आपके लिए भी वही है जो आम नागपुरवासी के लिए है?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर से आते हैं। शहर की राजनीति में उनका प्रभाव किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में जब उनके करीबी माने जाने वाले लोगों से जुड़े कार्यक्रमों में नियमों की ऐसी अनदेखी सामने आती है, तो सवाल केवल आयोजकों से नहीं बल्कि सत्ता के शीर्ष नेतृत्व से भी पूछा जाना चाहिए।
क्या आपके नाम, आपकी तस्वीरों और आपके राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके आपके करीबी लोग प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं?
और यदि ऐसा नहीं है, तो फिर ऐसा माहौल क्यों बन रहा है कि कुछ आयोजकों को लगता है कि पुलिस के निर्देश भी उनके सामने बेअसर हैं?
अजनी में पुलिस ने दो बार नापी आवाज, फिर भी DJ चलता रहा
अजनी चौक की घटना में मामला सिर्फ शिकायत तक सीमित नहीं रहा।
धंतोली पुलिस के अनुसार, कार्यक्रम में 90 से 100 डेसिबल के बीच ध्वनि स्तर दर्ज किया गया। पुलिस ने आयोजक करण यादव और साउंड सिस्टम संचालक रजत विजय शाहू को आवाज कम करने के निर्देश दिए।
लेकिन आरोप है कि निर्देशों के बावजूद तेज आवाज में DJ चलता रहा।
सबसे महत्वपूर्ण बात-रात 10 बजे के बाद साउंड बंद होना चाहिए था।
इसके बावजूद कार्यक्रम करीब 10.45 बजे तक चलता रहा।
नतीजा?
धंतोली पुलिस ने दोनों के खिलाफ BNS और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की।
यह कार्रवाई स्वागत योग्य है।
लेकिन सवाल यह है—
जब पुलिस मौके पर मौजूद थी, दो बार नॉइस लेवल मापा गया और आयोजकों को आवाज कम करने के लिए कहा गया, तो फिर 10 बजे के बाद भी DJ कैसे चलता रहा?
क्या पुलिस के आदेश की भी कोई कीमत नहीं?
दूसरी तस्वीर: Orange City Square
इसी बीच Orange City Square पर आयोजित BJYM South West Nagpur की दही हंडी ने एक अलग सवाल खड़ा कर दिया।
Ring Road की एक पूरी carriageway कार्यक्रम के लिए बंद होने की वजह से वाहन चालकों को गलत दिशा में वाहन चलाकर divider opening तक पहुंचना पड़ा।
सोचिए-
एक आम नागरिक अगर सड़क के गलत side पर वाहन चलाए तो उस पर कार्रवाई हो सकती है।
लेकिन यदि किसी राजनीतिक-सामाजिक कार्यक्रम के कारण सैकड़ों वाहन उसी गलत दिशा में जाने को मजबूर हों, तो जिम्मेदारी किसकी है?
और अगर किसी ambulance, fire tender या emergency vehicle को उस दौरान रास्ता न मिले तो?
क्या धार्मिक कार्यक्रम की अनुमति के साथ सड़क को रोकने की भी अनुमति मिल जाती है?
DJ BAN और CP के आदेश आखिर किसके लिए?
नागपुर पुलिस कमिश्नर विश्वास नांगरे पाटील ने हाल में ध्वनि प्रदूषण, DJ और laser lights को लेकर सख्ती दिखाई है। पुलिस ने sound systems की जांच और decibel levels की निगरानी भी की है।
तो फिर सवाल सीधा है:
अगर नियम इतने स्पष्ट हैं, तो कुछ आयोजकों के लिए वे इतने कमजोर क्यों दिखाई देते हैं?
यदि पुलिस ने पाया कि किसी DJ operator ने निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया है, तो केवल FIR करके मामला खत्म क्यों हो?
CP साहब, संबंधित DJ/sound provider के लाइसेंस/अनुमतियों की भी जांच होनी चाहिए।
यदि नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो कड़ी कार्रवाई और अनुमति/लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश दे सकती है—
नागपुर में Boss कानून है, कोई नेता का चमचा नहीं।
यह संदेश आयोजकों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए जरूरी है।
और देवा भाऊ से एक और सवाल…
देवेंद्र फडणवीस की तस्वीरें और बड़े-बड़े पोस्टर ऐसे आयोजनों में अक्सर दिखाई देते हैं।
यह राजनीतिक प्रचार हो सकता है-यह लोकतंत्र का हिस्सा है।
लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब आम आदमी आयोजकों से नाराज होने के बजाय उस नेता को कोसने लगता है जिसकी तस्वीर मंच और पोस्टरों पर लगी होती है।
जिस नागरिक का रास्ता बंद हुआ…
जिसे गलत side पर वाहन चलाना पड़ा…
जिसे रात में घर लौटते समय कानफोड़ू DJ सुनना पड़ा…
जिसे बच्चे, बुजुर्ग या मरीज की परेशानी झेलनी पड़ी…
उसके मन में आयोजक का नाम नहीं, सबसे पहले उस बड़े नेता का नाम आता है जिसकी तस्वीर हर जगह दिखाई देती है।
यही कारण है कि सत्ता में बैठे नेताओं को अपने समर्थकों की ऐसी हरकतों को political liability नहीं, बल्कि public accountability के रूप में देखना चाहिए।
अपने लोगों को बचाने से नेता बड़ा नहीं होता। अपने लोगों पर भी कानून लागू करवाने से नेता बड़ा होता है।
नागपुर पुलिस को अब मिसाल कायम करनी चाहिए
धार्मिक उत्सव हों-पूरी शिद्दत से हों।
दही हंडी हो-धूमधाम से हो।
गणेशोत्सव हो, पोला हो, मोहर्रम हो या कोई अन्य सार्वजनिक आयोजन-आस्था का सम्मान होना ही चाहिए।
लेकिन आस्था के नाम पर-
DJ नियमों की धज्जियां नहीं उड़ सकतीं।
रात 10 बजे के बाद तेज आवाज नहीं चल सकती।
प्रतिबंधित laser/beam lights का मनमाना इस्तेमाल नहीं हो सकता।
मुख्य सड़कों को मनमाने तरीके से बंद नहीं किया जा सकता।
आम नागरिकों को traffic risk में नहीं डाला जा सकता।
और सबसे महत्वपूर्ण—
कानून लागू करने वाले पुलिसकर्मी को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि सामने वाला किस नेता के करीब है।
नागपुर पुलिस से उम्मीद है कि वह इस पूरे मामले को सिर्फ दो FIR तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि आयोजकों, sound providers, permissions और traffic management की पूरी जवाबदेही तय करेगी।
क्योंकि अंततः सवाल बहुत छोटा है-
नागपुर में कानून Boss है या नेता के आसपास घूमने वाले चमचे?
और देवा भाऊ, इसका जवाब आपके अपने लोगों के व्यवहार से नहीं, आपकी सरकार और आपकी पुलिस की कार्रवाई से मिलेगा।


अजनी में पुलिस ने दो बार नापी आवाज, फिर भी DJ चलता रहा
दूसरी तस्वीर: Orange City Square

