
नागपुर– राज्य सरकार ने स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित राज्य के 72 बालगृहों की मान्यता रद्द कर दी है। इनमें नागपुर के तीन बालगृह भी शामिल हैं। हालांकि, नागपुर के जिन तीन बालगृहों की मान्यता रद्द की गई है, वे करीब दो साल पहले ही बंद हो चुके थे। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद मान्यता प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए आवेदन प्राप्त नहीं होने के कारण सरकार ने शासनादेश जारी कर इनकी मान्यता समाप्त कर दी है।
नागपुर शहर में वर्तमान में कुल 11 बालगृह और शिशुगृह संचालित हैं। इनमें सात बालगृह और चार शिशुगृह शामिल हैं। इसके अलावा शहर में एक निरीक्षण गृह भी है, जहां विभिन्न अपराधों में संलिप्त विधि से संघर्षरत बालकों को रखा जाता है। सात बालगृहों में चार सरकारी और तीन निजी संस्थाओं द्वारा संचालित किए जाते हैं। वहीं, शहर के सभी चार शिशुगृह निजी संस्थाओं के माध्यम से चलाए जा रहे हैं।
पांच साल के लिए मिलती है मान्यता
नियमानुसार, किसी भी स्वयंसेवी संस्था को बालगृह संचालित करने के लिए सरकार से अधिकृत मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होता है। यह मान्यता सामान्यतः पांच वर्ष की अवधि के लिए दी जाती है। अवधि समाप्त होने के बाद संस्था को निर्धारित प्रक्रिया के तहत मान्यता प्रमाणपत्र का नवीनीकरण कराना पड़ता है।
नागपुर के जिन तीन बालगृहों की मान्यता रद्द की गई है, वे पहले ही अपना संचालन बंद कर चुके थे। संबंधित संस्थाओं की ओर से मान्यता नवीनीकरण के लिए कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद राज्य सरकार ने शासनादेश जारी कर उनकी मान्यता औपचारिक रूप से रद्द कर दी।
छह से 18 वर्ष तक के बच्चों को मिलता है सहारा
बालगृहों में छह से 18 वर्ष तक की आयु के ऐसे बच्चों को आश्रय दिया जाता है, जिन्हें किसी कारणवश परिवार का संरक्षण और उचित देखभाल नहीं मिल पाती। इन बच्चों के रहने, खाने-पीने, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जिम्मेदारी बालगृहों के माध्यम से निभाई जाती है।
बालगृहों का उद्देश्य केवल बच्चों को आश्रय देना ही नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा और संस्कारों के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। यहां बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास और पुनर्वास पर ध्यान दिया जाता है। उन्हें इस तरह तैयार करने का प्रयास किया जाता है, ताकि 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद वे अपने पैरों पर खड़े होकर आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
कई बच्चे बालगृहों में रहकर अपनी शिक्षा पूरी करते हैं और आगे चलकर बेहतर भविष्य बनाने में सफल होते हैं। इस तरह बालगृह जरूरतमंद और संरक्षण से वंचित बच्चों के जीवन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिशुगृह में नवजात से छह वर्ष तक के बच्चों की देखभाल
शिशुगृहों में जन्म से लेकर छह वर्ष तक की आयु के बच्चों को आश्रय और संरक्षण दिया जाता है। इनमें ऐसे बच्चे भी शामिल होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद लावारिस छोड़ दिया जाता है या किसी कारणवश माता-पिता उनकी देखभाल करने में असमर्थ होते हैं।
शिशुगृहों में बच्चों के पालन-पोषण, स्वास्थ्य और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दौरान यदि कोई दंपति या इच्छुक व्यक्ति बच्चे को गोद लेने के लिए आगे आता है, तो निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चे को दत्तक दिया जाता है।
वहीं, यदि किसी बच्चे को गोद लेने के लिए कोई आगे नहीं आता है, तो उसकी आगे की देखभाल और संरक्षण की व्यवस्था नियमानुसार बालगृह में की जाती है।
बालगृह और शिशुगृह ऐसे बच्चों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल हैं, जहां उन्हें बेहतर जीवन, शिक्षा और भविष्य की संभावनाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।



