Published On : Fri, Nov 6th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर साइबर ठगों ने बुजुर्ग को लूटा

वेकोलि के सेवानिवृत्त कर्मचारी को बनाया निशाना, जीवनभर की कमाई के ₹45.20 लाख खाते से उड़ाए
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डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर साइबर ठगों ने बुजुर्ग को लूटा

नागपुर – साइबर अपराधियों ने अब डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को ठगने का नया जाल बिछा रखा है। फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाया जा रहा है और उनकी मेहनत की कमाई पर हाथ साफ किया जा रहा है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला नागपुर में सामने आया है, जहां साइबर ठगों ने वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) के एक 70 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी को अपना शिकार बनाते हुए उनसे 45 लाख 20 हजार रुपए की ठगी कर ली।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मानकापुर क्षेत्र के लहानोजी बाबा लेआउट, रिंग रोड निवासी गोपाल मंडलीक सोनेकर (70) वेकोलि से सेवानिवृत्त हैं। 31 अक्टूबर को उनके मोबाइल पर अज्ञात नंबरों से फोन आने शुरू हुए। इसके बाद आरोपियों ने उन्हें व्हाट्सएप वीडियो कॉल भी किया। कॉल करने वाले खुद को मुंबई और दिल्ली पुलिस का वरिष्ठ अधिकारी बताकर उनसे बातचीत करने लगे।

जालसाजों ने सोनेकर को बताया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक अवैध सिम कार्ड खरीदा गया है। इस सिम कार्ड के जरिए असामाजिक तत्वों द्वारा लोगों को धमकियां दी जा रही हैं। इतना ही नहीं, आरोपियों ने उनके बैंक खाते से संदिग्ध मनी लॉन्ड्रिंग होने का भी आरोप लगाया। पुलिस अधिकारी बनकर बात कर रहे साइबर अपराधियों ने बुजुर्ग को इस तरह डराया कि वे पूरी तरह मानसिक दबाव में आ गए।

गिरफ्तारी का डर दिखाकर बनाया ठगी का शिकार
आरोपियों ने सोनेकर को कथित कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाया। उन्हें बताया गया कि यदि वे इस मामले में खुद को निर्दोष साबित करना चाहते हैं और कानूनी कार्रवाई से बचना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी पूरी जमा पूंजी आरबीआई के अधिकृत सुरक्षा खाते में जमा करानी होगी। जालसाजों ने यह भी भरोसा दिलाया कि रकम की जांच और सत्यापन के बाद उन्हें वापस कर दिया जाएगा।

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पुलिस अधिकारी होने का विश्वास दिलाकर आरोपियों ने बुजुर्ग को अपने जाल में पूरी तरह फंसा लिया। गिरफ्तारी के डर और मानसिक दबाव में आकर सोनेकर ने अपने बचत खाते से कुल 45 लाख 20 हजार रुपए बताए गए बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए।

रकम मिलते ही ठगों ने बंद किए मोबाइल नंबर
बुजुर्ग द्वारा मोटी रकम ट्रांसफर किए जाने के बाद साइबर अपराधियों ने अपना असली रंग दिखा दिया। रकम खाते में पहुंचते ही आरोपियों ने अपने मोबाइल नंबर बंद कर दिए और संपर्क तोड़ लिया। काफी देर तक संपर्क नहीं होने पर सोनेकर को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारी बनकर डराने वाले गिरोह से रहें सावधान
इस घटना ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के बढ़ते हौसलों और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जा रही ठगी की गंभीरता को उजागर किया है। पुलिस या किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता और न ही जांच के नाम पर आरबीआई के किसी खाते में पैसे जमा कराने को कहा जाता है।

साइबर अपराधियों के ऐसे किसी भी फोन या वीडियो कॉल से घबराएं नहीं। अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी और व्यक्तिगत दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

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