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    Published On : Fri, Mar 31st, 2017
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    ‘अनिवासीय भारतीय’ का मतलब नहीं समझ पाए इसलिए सैंकड़ों लोग पहुँच गए आरबीआई

    नागपुर: आधी-अधूरी जानकारी के फेर में नागपुर स्थित रिज़र्व बैंक कार्यालय के सामने भारी भीड़ एकत्रित हो गयी। बाद में सच मालूम होने पर इस भीड़ में शामिल हर शख्स बस निराश और मायूस हुआ। भीड़ में शामिल हर चेहरे के पास पांच सौ और हजार के वह नोट थे, जिन्हें 8 नवंबर 2016 को सरकार ने चलन के बाहर घोषित कर दिया था।

    दरअसल हुआ यों कि भारत सरकार ने उन अनिवासीय भारतीय नागरिकों के लिए चलन के बाहर किए गए पांच सौ और हजार के नोट बदली के लिए 31 मार्च 2017 तक का वक़्त दिया था, जो नोटबंदी के समय से 30 दिसंबर 2016 तक देश के बाहर थे। अनिवासीय भारतीय नागरिकों के लिए जारी इस सुविधा के बारे में किसी ने अफवाह उड़ायी कि नागपुर रिज़र्व बैंक कार्यालय अभी भी चलन से बाहर हुए पांच सौ और हजार के नोट बदली कर रहा है। इस अफवाह का ऐसा असर हुआ कि महाराष्ट्र के दीगर शहरों के अलावा नागपुर शहर और आसपास के देहात से तो लोग रिज़र्व बैंक कार्यालय के सामने अपने पास पड़े पुराने हजार और पांच सौ के नोट लेकर पहुंचे ही, साथ में मध्यप्रदेश के सिवनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा जैसी जगहों से भी लोग पुराने नोट बदली करने के फेर में यहाँ पहुँच गए।

    भीड़ बनने और कतार में लगने के बाद कहीं जाकर इन अफवाह-पीड़ितों को मालूम हुआ कि आम भारतीय के लिए चलन के बाहर के नोट-बदली की प्रक्रिया तो 30 दिसंबर को ही खत्म हो गयी है। अभी तो बस ‘अनिवासीय भारतीय’ नागरिकों के नोट ही बदली किए जा रहे हैं।

    नोट बदली करने पहुंचे कुछ लोगों से नागपुर टुडे ने बात की।

    जालना से 80 वर्ष की बुजुर्ग महिला साखराबाई खारे 32 हजार रुपए के पुराने नोट लेकर आरबीआई पहुंची। उनके पास हजार और पांच सौ के पुराने नोट थे। उन्होंने बताया कि उन्हें संजय गांधी निराधार योजना के तहत आर्थिक मदद मिलती है। लेकिन वह प्राप्त राशि खर्च नहीं करती, बल्कि जमा करती है और वर्षों से जमा ये पुराने नोट ही बदली करने नागपुर आयी है। यहाँ आने पर उसे मालूम हुआ कि ने नोट न उसके ही काम के हैं और न ही सरकार के। यह एहसास उनके आँखों से आंसू बनकर निकलने लगे और रोते हुए वह बोली, “बेटों ने कहा था कि पुराने नोट दे दो बदली कर देते हैं, मगर मैंने नहीं दिए, अब बस पछताने के अलावा मेरे पास और क्या है?”

    चंद्रपुर के वरोरा से आए पलाश सुबह ही 4 हजार 500 रुपए के नोट बदली करने नागपुर के आरबीआई कार्यालय पहुंचे तो उन्हें मालूम हुआ कि ये नोट बदली करने की तारीख तो दिसंबर में ही चली गयी।

    अमरावती जिले के चांदुरबाजार के बेलोरा से आए पवन राऊत साढ़े 6 हजार रुपए लेकर आरबीआई पहुंचे थे। लेकिन यहां आने पर उन्हें पता चला कि सिर्फ अनिवासी भारतीयों के नोट बदली किए जा रहे हैं।

    मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से आए जितेन्द्र साहू ने बताया कि वे ढाई हजार रुपए के नोट बदलने आए थे। अकोला से खिजर अहमद नवाब भी करीब 53 हजार रुपए लेकर आए थे। उनके हाथ भी निराशा ही लगी।

    टेकड़ीवाड़ी में रहनेवाली सुनंदा मसराम भी 13 हजार रुपए लेकर पहुंची थी। उन्होंने कहा कि वे पैसे डिब्बे में रखकर भूल गयी थीं। हाल में उन्हें डिब्बे में पांच सौ और हजार के नोट मिले और किसी ने बताया कि 31 मार्च तक आरबीआई में नोट बदली हो रहे हैं, इसलिए वह यहाँ आयीं, लेकिन यहाँ मालूम हुआ कि किसी ने उन्हें गलत जानकारी दी थी।

    हालाँकि मोहम्मद जुनैद जो नागपुर के रहनेवाले हैं और बकौल उनके नोटबंदी के वक़्त दुबई में थे, आज यहाँ पचास हजार रुपए के चलन से बाहर नोट लेकर पहुंचे थे, लेकिन आरबीआई अधिकारियों ने उस दौरान उनके दुबई में होने के वाज़िब दस्तावेजों के आभाव में नोट बदली करने से मना कर दिया।


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