Published On : Fri, Sep 4th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

रामझूला हादसा : रितू मालू समेत तीन आरोपियों पर गंभीर आरोप तय

दो युवकों की मौत के मामले में जिला न्यायालय का अहम आदेश; मुख्य आरोपी पर सदोष मनुष्यवध, लापरवाही व शराब के प्रभाव में वाहन चलाने के आरोप
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रामझुला हिट-अँड-रन प्रकरण; रितिका मालूसह तिघांवर आरोप निश्चित,न्यायालयात खटला सुरु

नागपुर टुडे – रामझूला पुल पर तेज रफ्तार मर्सिडीज कार की टक्कर से दो युवकों की मौत के मामले में जिला न्यायालय ने आरोपी रितू दिनेश मालू समेत तीन आरोपियों के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। जिला न्यायाधीश एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ब्रह्मानंद धनुरे ने 2 सितंबर को मामले में आरोप निर्धारण संबंधी आदेश पारित किया। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आरोप तय किए जाने का अर्थ आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं है। आरोपियों की दोषसिद्धि अथवा निर्दोषता का निर्णय मुकदमे के दौरान प्रस्तुत होने वाले साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

न्यायालय के समक्ष उपलब्ध अभिलेख, गवाहों के कथित बयानों तथा अन्य सामग्री के प्रथमदृष्टया परीक्षण के आधार पर रितू मालू के विरुद्ध गंभीर आरोपों को विचारण योग्य माना गया। अभियोजन के अनुसार, घटना के समय रितू वाहन चला रही थीं और वाहन तेज, लापरवाहीपूर्ण तथा मानव जीवन की सुरक्षा के लिए खतरनाक तरीके से चलाया गया।

रक्त में एथिल अल्कोहल पाए जाने का अभियोजन का दावा
मामले की आरएफएसएल रिपोर्ट में रितू मालू के रक्त नमूने में 0.030 ग्राम एथिल अल्कोहल पाए जाने का उल्लेख होने की बात रिकॉर्ड के आधार पर सामने आई है। अभियोजन के अनुसार, घटना से पहले शराब सेवन से संबंधित अनुमति भी ली गई थी। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने शराब के प्रभाव में वाहन चलाने संबंधी आरोप को भी विचारण के योग्य माना है।

हादसे में दो युवकों की हुई थी मौत
अभियोजन के अनुसार, 24 फरवरी को रितू मालू अपनी मर्सिडीज कार क्रमांक एमएच-49-एएस-6111 से जा रही थीं। आरोप है कि जयस्तंभ चौक से मेयो अस्पताल चौक की ओर जाते समय कार ने दोपहिया वाहन क्रमांक एमएच-37-क्यू-2948 को टक्कर मार दी।

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टक्कर इतनी गंभीर थी कि दोपहिया वाहन पर सवार मो. हुसैन गुलाम मुस्तफा (34), निवासी नालसाहब चौक, तथा मो. गेंद आतिफ मो. जिया (32), निवासी अवस्थी नगर, सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए और उनकी मृत्यु हो गई।

घटना के बाद तहसील पुलिस थाने में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

पति और महिला सह-आरोपी पर साक्ष्य छिपाने का आरोप
अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि हादसे के बाद आरोपी दिनेश बजरंगलाल मालू और माधुरी शिशिर सारड़ा ने घटनास्थल से संबंधित व्यक्तियों को हटाने तथा घटना से जुड़े साक्ष्यों को छिपाने का प्रयास किया। यह भी आरोप है कि घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को नहीं दी गई तथा घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए।

इसके अलावा वाहन को साफ कर घटना से जुड़े संभावित साक्ष्यों को नष्ट करने का आरोप भी अभियोजन ने लगाया है।

हालांकि, इन आरोपों का अंतिम निर्धारण अभी न्यायालय द्वारा नहीं किया गया है और मुकदमे के दौरान अभियोजन को अपने आरोप साक्ष्यों के माध्यम से सिद्ध करने होंगे।

बचाव पक्ष ने आरोपों से किया इनकार
आरोपियों की ओर से बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए घटना को दुर्घटना बताया। बचाव पक्ष का कहना था कि मीडिया और भीड़ के दबाव के चलते मामले में गंभीर धाराएं जोड़ी गईं। बचाव पक्ष ने आरोपियों को लगाए गए आरोपों से मुक्त किए जाने की मांग की।

न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का परीक्षण करने के बाद प्रथमदृष्टया आरोप तय किए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां, आरोपियों की मंशा, उन्हें घटना की जानकारी थी अथवा नहीं तथा अन्य विवादित तथ्य मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के परीक्षण के बाद निर्धारित होंगे।

रितू मालू के खिलाफ कई धाराओं में आरोप
न्यायालय द्वारा रितू मालू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 106, 281, 125(क)(ख), 238 और 324(4) तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 177, 184 और 185 के तहत आरोप तय किए गए हैं।

इनमें मुख्य रूप से सदोष मनुष्यवध, लापरवाही से मृत्यु, खतरनाक तरीके से वाहन चलाने तथा शराब के प्रभाव में वाहन चलाने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

वहीं, आरोपी दिनेश बजरंगलाल मालू और माधुरी शिशिर सारड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 238 और 249 तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 177, 184 और 185 के तहत आरोप तय किए गए हैं।

15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
न्यायालय के आदेश के बाद अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। अभियोजन पक्ष द्वारा अपने साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए जाने के बाद बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की गई है।

कानूनी स्थिति: न्यायालय द्वारा आरोप तय किया जाना केवल यह दर्शाता है कि प्रथमदृष्टया मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार पाया गया है। इससे किसी आरोपी की दोषसिद्धि नहीं मानी जाती। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा मुकदमे के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर किया जाएगा।

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