Published On : Tue, Apr 23rd, 2019

मोदी के भाषणों से ही BJP का गेम बिगाड़ने में जुटे राज ठाकरे

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राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भले ही इस लोकसभा चुनाव में नहीं लड़ रही हो, लेकिन राज ठाकरे पूरे महाराष्ट्र में सभाएं कर रहे हैं. सभाओं में ना तो वो किसी प्रत्याशी का समर्थन कर रहे हैं और ना किसी पार्टी के लिए वोट मांग रहे हैं. इसके बावजूद उनकी सभाओं में उमड़ रही भीड़ ने बीजेपी, कांग्रेस, शिवसेना, एनसीपी समेत तमाम दलों की चिंता बढ़ा दी है.

हालांकि, राज ठाकरे अपनी सभी सभाओं को जागरूकता अभियान बताकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर निशाना साध रहे हैं. राज ठाकरे की इस लोकसभा चुनाव में हो रही रैलियां परंपरागत रैलियों की तरह कतई नहीं है. इस बार राज ठाकरे अपनी सभाओं में बाकायदा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस प्रेजेंटेशन में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने भाषणों-बयानों के वीडियो दिखाते हैं. राज ठाकरे का मानना है कि इन वीडियो के जरिये वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के झूठे वादे बेनकाब कर रहे हैं.

दिलचस्प बात तो यह है कि राज ठाकरे की इन रैलियों का असर सोशल मीडिया पर भी साफ दिखाई दे रहा है. कई ऐसे मीम और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जिनमें राज ठाकरे मराठी में यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि ‘ए लावा रे तो वीडियो’यानी कि वो वीडियो लगाओ. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण चलने लगते हैं. जिसे सुनाकर राज ठाकरे बीजेपी को कोसते हैं.

राज ठाकरे की इन सभाओं ने बीजेपी की चिंता बढ़ा दी है. बीजेपी को डर है कि कहीं राज ठाकरे उनके वोट ना काट दे. इसलिए हाल ही में बीजेपी ने राज ठाकरे के भाषणों और पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन को लेकर इलेक्शन कमीशन से शिकायत की है.

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वहीं, राज ठाकरे उनकी रैलियों को लेकर खुले तौर पर यह भी कह चुके हैं कि यदि उनकी रैलियों का फायदा किसी और पार्टी को होता है तो उन्हें चिंता नहीं है. क्योंकि वो ना तो कांग्रेस से मिल रहे हैं और ना ही एनसीपी से.

आखिर किसे होगा राज ठाकरे की रैलियों का फायदा?

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राज ठाकरे भले इन रैलियों से राजनीतिक फायदा होने की बात से इनकार कर रहे हों, लेकिन कहीं ना कहीं इसके पीछे आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए एक बड़ी रणनीति है.

इस बारे में महाराष्ट्र के पत्रकार प्रफुल बताते हैं कि भले ही राज ठाकरे अपनी रैलियों के जरिये बीजेपी पर बड़ी चतुराई से निशाना साध रहे हैं, लेकिन वो विधानसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं और लोकसभा चुनाव के जरिये ये काम वो आसानी से कर पा रहे हैं.

यदि विधानसभा चुनाव में राज ठाकरे अच्छी सीटें लाने में कामयाब होते हैं तो वो अगले चुनाव में अपनी एक जगह बनाने में कामयाब होंगे. क्योंकि अब तक के चुनाव में महाराष्ट्र नव निर्माण सेना को कोई खासी सफलता नहीं मिली है.

क्या शिवसेना को मजबूत कर रहे हैं राज ठाकरे?

कुछ राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राज ठाकरे की रैलियों का अच्छा और बुरा असर शिवसेना पर भी पड़ सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि महाराष्ट्र में बीजेपी- शिवसेना गठबंधन में है इसके बावजूद राज ठाकरे रैलियों में केवल बीजेपी और उसके आलाकमान पर ही निशाना साध रहे हैं. इससे जाहिर होता है कि मुश्किल में फंसी शिवसेना को कहीं ना कहीं राज ठाकरे फायदा पहुंचा सकते हैं.

वहीं, एक पहलू यह भी है कि यदि लोकसभा चुनाव में शिवसेना अच्छी जीत हासिल नहीं कर पाती है तो आने वाले विधानसभा चुनाव में शिवसेना से कुछ नेता राज ठाकरे की महाराष्ट्र नव निर्माण सेना का भी हाथ थाम सकते हैं.

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