Published On : Tue, Mar 19th, 2019

रेल्वे टिकट बुकिंग का अजब कारोबार,वृद्ध महिला को दिया अप्पर बर्थ

बुकिंग के समय थी 140 बर्थ खाली, टिकट के पूरे पैसों से धोना पड़ा हाथ

नागपुर: रेलवे में ई टिकिट घोटाला तो जगजाहिर है. कई एजेंटों पर कारवाई भी की गई, लेकिन अभी भी बुकिंग में अजब प्रकार शुरू है. सीनियर सिटीज़न को लोअर बर्थ न देकर बचा कर रखी जा रही है. उन्हें अप्पर बर्थ देकर वरिष्ठ नागरिकों का मजाक बनाया जा रहा है. ऐसी ही पीड़ा और उपेक्षा एक 81 वर्षीय बुजुर्ग महिला को सहन करनी पड़ी.

प्राप्त जानकारी के अनुसार 18 मार्च 2019 को विजय डबली नामक 81 वर्षीय महिला अपने बेटे प्रवीण डबली के साथ नागपुर से जबलपुर के लिए ट्रेन नंबर 12159 में IRCTC की साइट से ई टिकट की बुकिंग की. जिसका PNR नम्बर 8617033114 था. जिसमे उन्हें एस 6 नंबर के कोच में बर्थ नंबर 30 व 32 मिला. जिसमें महिला को साइड अप्पर बर्थ दी गई. जिस समय ई टिकट बुक की गई तब करीब 140 से 145 बर्थ खाले होने की जानकारी वेब साइड पर दी जा रही थी.

क्या फॉर्म में 81 वर्ष की उम्र लिखने के बाद अप्पर बर्थ देना उचित है या बर्थ देने से पहले यह पूछा जाना चाहिए था कि अप्पर बर्थ चलेगी या नहीं? लेकिन ऐसा नहीं पूछा गया. इस बात से परेशान होकर उन्होंने टिकट कैंसिल कर दिया. नियम के अनुसार उन्हें कैंसल का पैसा भी उन्हें नहीं मिला. फिर से उन्होंने साधारण (तत्काल नहीं) टिकट बनाया जिसमें उन्हें वेटिंग 59 मिला.

उसी तरह उन्होंने उसी ट्रेन (नंबर 12160) से वापसी का टिकट बनाया 21 तारीख का. जब टिकट बनाया तब करीब 104 बर्थ उपलब्ध होंने की जानकारी वेब साइड पर थी. तब भी उस महिला को बर्थ नंबर 27 यानी अप्पर बर्थ ही दिया गया. फॉर्म में वरिष्ठ नागरिक लिखा गया था. सवाल यह है कि जब टिकट बुक किया गया तब एक भी लोवर बर्थ उपलब्ध नहीं था? क्या सिस्टम में सीनियर सिटीजन एक्सेप्ट नहीं होता? क्या सिस्टम में ऐसा नहीं होना चाहिए कि टिकिट लेने वाले से पूछा जाय कि आपको संबंधित बर्थ स्विकार्य है या नहीं? यात्री को रेलवे की सिस्टम का हर्जाना भुगतना पड़ रहा है लिहाजा रेलवे में सुधार की जरूरत है.

दक्षिन पूर्व मध्य रेलवे के पूर्व ZRUCC सदस्य प्रवीण डबली ने अपने साथ हुई इस घटना पर कहा कि तत्काल रिजर्वेशन से पहले भी यात्री से बर्थ संबंधी पूछा जाना चाहिए ताकि वे निर्णय ले सके. जिससे यात्री के पैसे बेकार नहीं जाएगा. रेलवे यात्रियों की सुविधा व सेवा के लिए है ना कि लूटने के लिए.