Published On : Sun, Mar 31st, 2019

कश्मीर का प्रश्न केवल अहिंसा से ही मिट सकता है – डॉ. एस.एन.पठान

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‘ गांधी और मानव अधिकार ‘ विषय पर राष्ट्रीय परिषद् का आयोजन

नागपुर: नागपुर यूनिवर्सिटी का कुलगुरु का पद जब 2006 में स्वीकार किया था. तब संत तुकडोजी महाराज के बारे में जानकारी नहीं थी. मैंने उनके समाधिस्थल पर जाने का विचार किया और वहां जाकर देखा की वहांपर एक ऐसा स्थल है जहां पर कोई भी धर्म का व्यक्ति पूजा कर सकता है. उसी दिन से मैं तुकडोजी का सच्चा सेवक बन गया. उनके एक भजन को यूनिवर्सिटी के गीत के रूप में शुरू किया गया. गांधीजी के लिए तुकडोजी ने भजन गाया था. युवाओ ने पश्चिमी संस्कृति को तो जल्दी अपनाया लेकिन गांधीजी को अपनाने में संकोच कर रहे है.

युद्ध, रक्तपात न करते हुए आजादी दिलवाई है गांधी ने. अहिंसा का सन्देश मोहम्मद पैगम्बर, बुद्ध और महावीर ने भी दिया है. दुनिया को बचाना है तो युद्ध से नहीं बचाया जा सकता. कश्मीर के प्रश्न भी केवल अहिंसा से ही मिट सकते है. अभी देश में कई हिंसक घटनाएं हो रही है. इन्हे रोकना है तो गांधी को समझना होगा. यह कहना है नागपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलगुरु डॉ. एस.एन.पठान का. वे ‘ गांधी और मानव अधिकार ‘ पर राष्ट्रीय परिषद् में बोल रहे थे.

रविवार को श्री बिंजानि सिटी कॉलेज और यवतमाल के डॉ.वी.एम. पेशवे सोशल रिसर्च इंस्टिट्यूट की ओर से ‘ गांधी और मानव अधिकार ‘ पर राष्ट्रीय परिषद् का आयोजन किया गया था. इस दौरान नागपुर शिक्षा मंडल के अध्यक्ष ए.के.गांधी, नागपुर शिक्षा मंडल के सचिव डॉ. हरीश राठी, डॉ.वी.एम. पेशवे सोशल रिसर्च इंस्टिट्यूट के अध्यक्ष डॉ. राम बुटाले, उपाध्यक्ष डॉ. राम जाधव, बींजानी कॉलेज के पॉलिटिकल साइंस विभाग के प्रमुख डॉ. संदीप तंदुरवार, गांधी अभ्यासक डॉ.विवेक कोरडे, सरहद्दा संस्था पुणे के संस्थापक संजय नाहर, संजय जैन, लीला चितड़े समेत अन्य प्रोफ़ेसर मौजूद थे.

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इस दौरान सरहद्दा संस्था पुणे के संस्थापक संजय नाहर को पुरस्कार भी दिया गया. कश्मीरी बच्चों की शिक्षा के लिए यह संस्था काम करती है. इस समय नाहर ने मौजूद लोगों को संभोदित करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में दुर्गाभाभी के नाम का जिक्र आता है. मै जब उनसे मिलने उनके घर गया तो उनके बच्चों ने मिलने नहीं दिया. खूब मिन्नतें की. आखिर में जब उनसे मुलाक़ात हुई तो उन्होंने देशभक्ति पर बात करते हुए कहा कि हमने जिस देश के लिए लड़ाई लड़ी वह यह भारत नहीं है. यह शब्द सुनकर मै काफी शांत हो गया. हमने भगतसिंग को स्वीकार किया लेकिन उनके विचारों का स्वीकार नहीं किया. विदर्भ में 1898 में किसान ने आत्महत्या की थी. तब भगतसिंग के पिता ने यहाँ आकर उस किसान के बच्चों को गोद लिया था. उन्होंने कश्मीर के बच्चों के साथ जुड़े कुछ बाते भी बताई .

इस समय गांधी विचारक विवेक कोरडे ने कहा कि गांधीवाद मतलब त्याग, प्रेम और करुणा है. पूरा गांधीवाद प्रेम और करुणा पर आधारित है. गांधी के जीवन के संघर्ष की तुलना केवल लेनिन के संघर्ष से की जा सकती है. मानवी हक्क के संरक्षण के लिए गांधी के तत्वों को मान्य करना होगा. चम्पारण और खेड़ा जैसे जगहों पर जाकर गांधी सामान्य के अधिकारों के लिए लड़े. उसके बाद उन्हें राष्ट्रपिता की पदवी दी गई है. हिन्दू मुस्लिम एकता, अस्पृश्यता निर्मूलन और स्वदेश यह उनकी बाते थी. चरखा केवल दिखावा नहीं था. चरखा ग्रामीण महिलाओ के लिए उपजीविका का साधन था. इसलिए उन्होंने चरखे से सूत कातने की बात लोगों को बताई. अहिंसा केवल मनुष्यो के लिए ही नहीं जानवरों के साथ ही पर्यावरण और पेड़ पौधों के लिए भी उन्होंने सिखाई. उन्होंने गौसेवा सिखाई, गौरक्षा की बात नहीं की.

कॉलेज की प्रिंसिपल अफरोज शेख ने इस समय सभी का आभार प्रकट किया. उन्होंने बताया कि 2009 में कश्मीर समस्या पर चर्चासत्र का आयोजन किया गया था. गांधीजी का विचार व्यापक है.

इस समय पॉलिटिकल साइंस विभाग के प्रमुख डॉ. संदीप तंदुरवार ने कहा कि गांधीजी ने कभी भी अपना और पराया का भेद नहीं किया है. गांधी ने उपदेश और सलाह नहीं दी है.राष्ट्रनिर्माण का कार्य गांधीजी ने किया है. इस चर्चासत्र का दूसरा सेशन भी था. जिसमे अन्य लोगों ने मौजूद लोगों को संभोधित किया.

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