– जिलाधिकारी,जिला माइनिंग अधिकारी का अजब-गजब गैरकानूनी कारनामा से सरकारी राजस्व को लग रहा चुना
नागपुर : गत सप्ताह 10 मार्च को पुलिसिया कार्रवाई के दौरान एक दर्जन रेत से भरी ट्रक को पकड़ा गया.जिसमें से कुछ पर फर्जी रॉयल्टी का मामला दर्ज कर जुर्माना वसूल करने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया.अब सवाल यह हैं कि जिलाधिकारी सह जिला माइनिंग अधिकारी यह बताए कि फर्जी रॉयल्टी के आधार पर ट्रांसपोर्टर पर कार्रवाई की गई लेकिन फर्जी रॉयल्टी जारी करने वाला घाट संचालक को क्यों छोड़ दिया गया !
जिला माइनिंग विभाग के सूत्रों के अनुसार उक्त रेत से भरी ट्रकों को शहर पुलिस ने तड़के कोराडी थाना क्षेत्र अंतर्गत पकड़ा,फिर सभी रेत से भरी ट्रकों को कोराडी थाने में लगाई गई.
इसके बाद जाँच पड़ताल में UNDERLOAD ट्रक पाया गया.रॉयल्टी में गड़बड़ी पाए जाने के कारण कार्रवाई की गई.बताया जाता हैं कि घाट संचालक द्वारा फर्जी रॉयल्टी देने जानकारी सामने आने पर घाट संचालक ने ही जुर्माने की रकम भरी फिर उक्त रेत से भरी ट्रक छूटी।
सूत्रों ने यह जानकारी दी कि जिला माइनिंग विभाग के अधिकारियों की मध्यस्थता में नुकसान भरपाई के रूप में घाट संचालक ने अच्छा-खासा रेत फ्री में घाट से देने की हामी भरी.
उल्लेखनीय यह हैं कि उक्त घटनाक्रम से यह साफ़ हो गया हैं कि उक्त प्रकरण में रेत ट्रांसपोर्टर की बजाय बड़ा दोष घाट संचालक का था.इसकी जानकारी जिलाधिकारी और जिला माइनिंग अधिकारी को भी थी,बावजूद इसके फर्जी रॉयल्टी देने वाले घाट संचालक पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.अब सवाल उठता हैं कि क्या जिला प्रशासन,जिला खनन अधिकारी और घाट संचालकों में आपसी समझौता हैं,क्या इसलिए सिर्फ खानापूर्ति के लिए रेत ट्रांसपोर्टरों को शिकार बनाया जा रहा.इस चक्कर में नागपुर जिले के रेत घाट से रेती परिवहन करने वाले को फर्जी रॉयल्टी जारी करके अपना उल्लू सीधा कर रहे.
एमओडीआई फाउंडेशन ने उक्त मामले पर रेत घाट संचालक पर भी कड़क कार्रवाई करते हुए रेत घाट जप्त करनी चाहिए।
MP की रॉयल्टी नागपुर जिले में दौड़ रही
मध्यप्रदेश में जिलावार रेत घाटों की निलामी होती हैं,इसलिए वहां की रॉयल्टी काफी सस्ती होती हैं.वहीं दूसरी ओर नागपुर जिले में प्रत्येक रेत घाटों की निलामी अलग-अलग होती हैं इसलिए यहाँ की रॉयल्टी MP के बनस्पत काफी महँगी होती हैं.इसलिए रेत नागपुर जिले के घाटों से उठाई जाती और रॉयल्टी MP की जारी कर ट्रांसपोर्टिंग करवाई जा रही.
इस क्रम में MP की रॉयल्टी लंबी दुरी की जारी करवा कर अपने मनमाफिक काम दुरी वाले कई ट्रिप मारी जा रही,नतीजा महाराष्ट्र सरकार को दोहरा चुना लग रहा.MP की रॉयल्टी जारी करने वाले जिले में कई सक्रिय हैं,जिनके पास वहां के लिंक का PASSWORD हैं.सम्बंधित दलाल मांग अनुरूप रॉयल्टी शुल्क के ऊपर से 500 रूपए अतिरिक्त लेकर घाट संचालकों/ट्रांसपोर्टर को MP की रॉयल्टी थमा रहे.इसकी विस्तृत जानकारी जिलाधिकारी/जिला खनन अधिकारी को होने के बावजूद उनकी चुप्पी से राज्य का राजस्व नुकसान बड़े पैमाने में हो रहा.
खेत में जमा रेत की बजाय सीधा नदी से उत्खनन पर उत्खननकर्ता पर कोई कार्रवाई नहीं की
कन्हान नदी किनारे(परशिवानी तहसीलदार अंतर्गत क्षेत्र) कामठी के एक रेत माफिया की खेत में रेत जमा दर्शाया गया,जिसे निकालने के लिए जिला प्रशासन के एक दिग्गज अधिकारी की करीबी रिश्तेदारी के सिफारिश पर खेत से रेत उठाने की अनुमति मांगी गई,इन्हें सिफारिश तगड़ी होने के कारण अनुमति भी जल्द मिल गई.इसके बाद इन्होंने उक्त खेत से नदी के दूसरे किनारे तक एक अस्थाई ब्रिज का निर्माण कर मशीन द्वारा रेती उत्खनन कर अपने खेत में जमा करने लगे फिर वहां से मांगकर्ताओं को बेचने लगे.इसकी जानकारी जिलाधिकारी,जिला खनन अधिकारी,तहसीलदार,राजस्व निरीक्षक,पटवारी,सभी सम्बंधित पुलिस प्रशासन को होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई,क्यूंकि इन्हीं में से एक अधिकारी की रिश्तेदार के सिफारिश पर खेत से रेत निकालने की अनुमति दी गई थी.जब उक्त मामला NAGPUR TODAY ने प्रकाशित किया तो उक्त अधिकारियों सह जिसके सिफारिश पर रेत उठाने की अनुमति मिली थी,उनके कड़क विरोध के कारण उक्त ग़ैरकृत पूर्णतः बंद कर दिया गया,साथ में नामोनिशान भी मिटा दिया गया.
विडम्बना यह हैं कि उक्त ग़ैरकृत (खेत से रेत उठाने की अनुमति का गैर फायदा उठाकर निकट के घाट में पुल का निर्माण कर नदी के दूसरे ओर से रेत उत्खनन करने वाले ) करने वाले पर कोई कार्रवाई नहीं की गई,क्यूंकि इसमें उक्त अधिकारियों में से किसी एक अधिकारी की सगी रिश्तेदार शामिल थी.
पर उक्त अवैध रेत उत्खननकर्ता पर कड़क कार्रवाई नहीं की गई तो मामला NGT सह राज्य सरकार के सम्बंधित विभागों के ध्यान में लाया जाएगा।फिर भी कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला तो न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी।
निलामी : कुछ ने पूर्ण पैसा नहीं भरा,फिर भी भरपूर किया उत्खनन
काफी जिद्दोजहद के बाद जिले में 15 रेत घाटों की निलामी हुई,निलामी पूर्व हुई बैठक बेनतीजा साबित हुई,समझौता पूर्ण निलामी के बजाय अच्छी-खासी स्पर्धा हुई,जिससे जिला प्रशासन को बड़ा लाभ हुआ.निलामी में जिन 15 घाटों का ठेका जिन्हें मिला था,उन्हें शेष रकम भरने का समय दिया गया था,उनमें से कुछके ने पैसा नहीं भरा,लेकिन घाट का टेंडर मिलने के बाद से ही रेती उत्खनन शुरू कर दी थी,नतीजा जमा रकम का कई गुणा रेत उत्खनन कर चुके हैं.इसकी भी जानकारी जिला खनन अधिकारी को होने के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई इसलिए नहीं की गई क्यूंकि ‘नीचे से लेकर ऊपर तक सब सेट’ हैं.
जिला 1,घाट अनेक व नियम अलग-अलग
नागपुर जिले में 15 अधिकृत रेत घाटों की निलामी हुई,एक दर्जन के आसपास रेत घाटों की निलामी नहीं हुई.सभी के लिए प्रशासन एक होने के बावजूद सभी घाटों (खासकर विधानसभा निहाय ) के लिए जिला प्रशासन और खनन विभाग का नियम अलग-अलग हैं.अमूमन पाबंदी के बावजूद मशीनों से रेती उत्खनन 24 बाय 7 शुरू हैं.वह भी कुछ घाटों पर एक के बजाय 3-3 मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा,इसकी जानकारी पटवारी,राजस्व निरीक्षक,तहसीलदार और जिला खनन अधिकारी को होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही.रेत उत्खनन हाथ से करना हैं,उसके बाद उसे 5 किलोमीटर दूर स्टॉक करना हैं लेकिन 15 में से कुछ घाटों पर रेत का स्टॉक 500 मीटर से भी कम दुरी पर किया जा रहा,जहाँ से खुलेआम ग्राहकों को सप्लाई किया जा रहा.
इनके भी जिला खनन अधिकारी का समर्थन हासिल हैं.ऐसे जिला खनन अधिकारी पर भी सरकारी राजस्व और पर्यावरण नुकसान करने पर की जाने वाली कार्रवाई के तहत कार्रवाई करने की मांग एमडीआई फाउंडेशन ने की हैं.
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