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    Published On : Mon, Dec 4th, 2017
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    प्रकल्प अपूर्ण लेकिन दी जा रही राशि पूर्ण

    Aapli Bus

    नागपुर: देश के प्रमुख शहरों में से जिन महानगरपालिकाओं द्वारा ‘पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ का संचलन किया जा रहा हैं,अंशतः सभी जगह घाटे में चल रही हैं. इसलिए की शहर के नागरिकों के लिए यह महत्वपूर्ण सुविधा हैं,सम्बंधित राज्य सरकार सहित केंद्र सरकार घाटे से उबरने के लिए सम्बंधित महानगरपालिकाओं के मांग अनुसार आर्थिक सहयोग करती रहती हैं. महाराष्ट्र के ‘एमएमसी एक्ट’ अनुसार ‘पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस’ देने की सुविधा देने जिक्र होने के कारण राज्य की कुछ मनपा उक्त सेवाएं अपने-अपने शहरों में शुरू किये हुए हैं. नागपुर शहर ने परिवहन सेवा जरूर की कि मनपा के नियोजन में आभाव के कारण पहले ऑपरेटर ने सरकारी संपत्ति को नुकसान कर मनपा को आर्थिक चुना लगा दिया. अब मनपा ने सेवा संचलन के लिए ‘डिम्ट्स’ को जिम्मेदारी सौंपी लेकिन वह कररानुसार जिम्मेदारी पूर्ण करने के बजाय सिर्फ और सिर्फ नए-नए कन्डक्टरों सह तीनों लाल बस ऑपरेटरों को आर्थिक अड़चन में डाल खुद की पीठ थपथपा रहा. जिसे संरक्षण परिवहन प्रबंधक, सत्तापक्ष और मनपा प्रशासन देकर खुद की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठवा रहा हैं.

    अप्रैल २०१६ के ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोसल’ के अनुसार डिम्ट्स को मनपा के शहर बस सेवा प्रकल्प के तहत ‘प्रोजेक्ट डेवलपमेंट सर्विसेस फॉर पब्लिक बस सर्विस इन नागपुर अर्बन रीजन’ के सम्पूर्ण मुद्दों को पूर्ण करना था.इसके लिए मनपा ने डिम्ट्स से बैंक गैरेंटी मांगी थी, इसके बदले में मनपा ने मासिक सेवा शुल्क भी तय किया था. सर्वप्रथम डिम्ट्स में मनपा द्वारा मांगी गई बैंक गैरेंटी भरने से इंकार किया, जब मामला विवादित होते-होते सार्वजानिक हो गया तो वजह का खुलासा किया कि मनपा ने जो बैंक गैरेंटी मांगी थी, वह पूर्ण प्रकल्प के हिसाब से था. क्योंकि प्रकल्प अभी अधूरा हैं, इसलिए बैंक गैरेंटी की राशि में कमी की जाये।जिसका समर्थन मनपा के नेतृत्वकर्ताओं ने संयुक्त रूप से किया.

    सवाल यह हैं कि जब प्रकल्प अपूर्ण तो डिम्ट्स की बैंक गैरेंटी कम की गई फिर अपूर्ण प्रकल्प के हिसाब से मासिक भुगतान क्यों नहीं. इस दोहरी नीति से हो रहे डिम्ट्स को फायदा के लाभार्थी कौन ?

    करार का अनुशरण कागजों तक सिमित
    १ रूट प्लॉन

    – यात्रियों के जरूरतानुसार नियमित समय पर बस सेवा का भरोसा नहीं दिलवाने के कारण आवाजाही करने वाले रोजाना हज़ारों की संख्या में खुद के वाहन,अनाधिकृत परिवहन ( जिन बसों से आरटीओ यात्री कर नहीं लेती) आदि-आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं.डिम्ट्स ने पूर्व ठेकेदार वंश द्वारा तय किये गए ‘टाइमिंग’ को बरक़रार रखे हुए हैं. शहर के प्रमुख ५ मार्गों पर शहर के बाहरी इलाके में ‘इंड्रस्ट्रियल एरिया’ हैं. यहाँ सिर्फ बुधवार सहित साल भर में डेढ़-२ दर्जन अन्य अवकाश रहता हैं, कुल लगभग ३०० दिन ८०० के आसपास औद्योगिक इकाइयां २४ बाय ७ शुरू रहती हैं. इनमें से कुछ चुनिंदे ५ दर्जन कंपनियों के पास कर्मचारी बस सुविधा हैं. शेष कंपनी जिनके कर्मी-अधिकारी जो शहर के एक कोने से दूसरे कोने के फैक्ट्री तक आवाजाही करते हैं. इन कर्मियों के लिए शहर से एमआईडीसी तक आवाजाही के लिए शहर बस सेवा देने पर मनपा परिवहन विभाग को मासिक कम से कम १ करोड़ का फायदा हो सकता हैं,जो आज नुकसान हो रहा हैं.

    – हिंगणा के विधायक समीर मेघे ने हिंगणा से बुटीबोरी वाया छत्रपति चौक के लिए कर्मचारी हित में रोजाना आने-जाने हेतु १० ट्रिप बस शुरू करने की मांग की थी. इस मार्ग पर बस शुरू करने से सभी खर्च निकालकर मासिक लगभग २ लाख रूपए का फायदा हो सकता हैं.

    – रूट सर्वे के लिए सक्षम सर्वेयर डिम्ट्स के पास नहीं हैं.

    – वर्तमान में परिवहन विभाग के पास बड़ी-मिडी ३८७ बसें हैं.जिसमें से ३३७ तय मार्गों पर सेवारत हैं. शेष ५० बसों का मार्ग तय नहीं होने के कारण नई बसें खड़ी हैं. ४५ मिनी बसों की खरीदी मार्ग में परिवहन प्रबंधक शिवाजी जगताप बाधक बने हुए हैं.

    इस हिसाब से परिवहन सेवा प्रकल्प लगभग ७०% पूर्ण हुए.कम से कम डिम्ट्स १०% का मुनाफा को जोड़ दिया जाये तो डिम्ट्स को अधूरे प्रकल्प के लिए मनपा ४० % मुनाफा पहुंचा रही हैं.

    २ कपीसिटी ऑप्टिमाइजेशन
    डिम्ट्स के नियोजन के आभाव में कभी बस सेवारत तो कभी देर से संचलन और तो कभी मनमर्जी से सेवा खंडित कर दी जाती हैं.सेवा का भरोसामंद न होने से नियमित सेवा का लाभ लेने वालों को पर्यायी व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता हैं.

    ३/- ऑपरेशन मैनेजमेंट सपोर्ट
    कंडक्टर का वक़्त पर न आने से तय ट्रिप का नुकसान होता हैं.वक़्त पर कंडक्टर आ गए तो डिम्ट्स की टिकट मशीनें ख़राब रही तो ट्रिप बाधित या ट्रिप में देरी होती हैं. तीनों लाल बस के ट्रिप बाधित होने से एक साल में डेढ़ करोड़ का नुकसान हुआ हैं.

    ४ टिकटिंग एंड रेवेन्यू मैनेजमेंट
    सिर्फ इस कार्य के लिए डिम्ट्स की आवश्यता नहीं,यह आम कार्य मनपा भी कर,करवा सकती हैं.

    ५ कस्टमर ओरिएंटेशन
    गत शनिवार-रविवार को बिना सार्वजानिक सूचना जारी किये ८० बसों को बंद कर दिया गया. यात्रीगण हलाकान हुए.कॉल सेंटरों पर शिकायतें हुई, जिसका लेखा-जोखा डिम्ट्स ने न परिवहन विभाग और न सभापति तक पहुँचाया. इस नियम का सरासर उल्लंघन जारी हैं.

    ६ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट
    डिम्ट्स के पास करार के अनुसार रेवेन्यू प्रोटेक्शन स्क्वाड ,व्हीकल एंड फ्लीट इंस्पेक्टर्स , ट्रांसपोर्ट पॉलिसी/ट्रांसपोर्ट प्लानिंग एक्सपर्ट, आईटीएस एक्सपर्ट, ह्यूमन रिसॉर्स एक्सपर्ट, ऑटोमोबाइल-इलेक्ट्रिकल-सिविल सपोर्ट इंजीनियर, सुपरवाइजर, ऑफिस अस्सिटैंट्स में कमी की वजह साफ़-साफ़ दिखने से करार का पालन नहीं हो रहा हैं.सवाल यह भी उठता हैं कि क्या डिम्ट्स ने ‘आरएफपी’ के अनुसार कर्मियों की तैनातगी की हैं. फिर ‘फिक्स्ड फी’ करार के अनुसार दिया जाना परिवहन विभाग को कटघरे में खड़ा कर रहा हैं.

    ८ बस स्टॉप्स मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट
    आपली बस स्थानक साधारण श्रेणी के हैं. न की इलेक्ट्रिकल और स्मार्ट बस स्थानक हैं.स्थानकों में ‘वेंडिंग मशीन’ भी हैं.खासकर महिला यात्रियों के साथ यात्रा के दौरान कंडक्टर आदि पर लगने वाले आरोप से मुक्ति के लिए बस स्थानकों पर कंडक्टर सुविधा,यह भी तब मुमकिन हैं जब बसें नियमित चलेंगी और बस स्थानकों पर ही रुकेंगी. इस संबंध में डिम्ट्स की पहल शून्य पर अटकी हैं.

    ९ इंटीग्रेशन ऑफ़ मल्टिमोड पब्लिक ट्रांसपोर्ट
    यह विषय डिम्ट्स ने छुआ तक नहीं हैं. महामेट्रो के स्टेशनों से आपली बसों की कनेक्टिविटी मामला ठंडे बस्ते में दिख रहा हैं.

    १० सपोर्ट सर्विस तो इम्प्रूव ऑपरेटर्स इफिसिएंसी
    इस मामले में वंश व डिम्ट्स में कोई फर्क नहीं हैं. घाटे का बहाना बनाकर कभी भी मार्ग व बसें बंद कर दी जाती हैं. वंश ४७० बसें चलाने का दावा करती रही, भले ही लाभप्रद मार्गो पर चलाई. डिम्ट्स ३३७ चला रही,५० बसें मार्ग तय नहीं करने के कारण खड़ी रखी हैं. ४५ मिनी बसों की खरीदी को परिवहन विभाग ने पाबन्दी लगा रखी हैं.

    उल्लेखनीय यह हैं कि मनपा प्रशासन ने आज यह सोमवार को तीनों लाल बस ऑपरेटरों को सितम्बर माह का बकाया नहीं दिए तो ईंधन के आभाव में सभी बसें खड़ी हो जाएंगी और ८ दिसंबर तक ऑक्टूबर माह का आधा भुगतान नहीं किया गया तो बस चालकों का वेतन नहीं करने से वे बसें खड़ी कर सकते हैं. पूर्व मनपायुक्त श्रावण हार्डिकर के कार्यकाल में परिवहन विभाग अंतर्गत बस ऑपरेटरों का ‘एस्क्रो अकाउंट’ की राशि की उपलब्धता के मद्देनज़र सारी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद भी ‘एस्क्रो अकाउंट’ नहीं खोला गया. नागपुर मनपा परिवहन विभाग में असक्षम अधिकारियों की कमी से परिवहन विभाग पर ‘ऑडिट ऑब्जेक्शन’ का खतरा मंडरा रहा हैं.

    Link – Draft RFPFCS Agency Nagpur – PDF

    – राजीव रंजन कुशवाहा

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