Published On : Fri, Jan 16th, 2015

मूल : आज़ादी के 60 वर्ष बाद भी मुरमाडी गांव की खस्ता हालत

Murmadi Village
मूल (चंद्रपुर)।
देश आज़ादी हुए 60 वर्ष पुरे हो चुके है. लोकशाही के इस देश और राज्य में बड़े उत्साह से स्वतंत्रता दिन मनाया जाता है. फिर भी मूल और सावली तालुका में मुरमाडी, गोलभुज, ताडभुज, मेटेगांव, चक, मानकापूर गांव की खस्ता हालत है. जो विकास से कोसों दूर है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार 31 किमी दुरी पर मूल तालुका में मुरमाडी, गोलभुज, ताडभुज ऐसे तीन गांवों का समावेश किया गया. तथा 12 किमी दुरी पर सावली तालुका में मेटेगांव, चक, मानकापूर ऐसे गांव जोड़े गए. यह 6 गांव मिलकर एक ग्रामपंचायत बनी है. यहां के जंगल में बाघ, भालू जैसे जंगली जानवर घुमते है. जंगली जानवरों ने गांवसियों पर हमलें भी किये है. फिर भी शासन इसकी ओर अनदेखी कर रहा है. इन गांव में आदिवासी परिवार है. गांव में जाने के लिए डांबर रास्ते नहीं है. जो मुरूम गिट्टी का रास्ता है वो भी उखड चूका है. जिससें गांव के नागरिकों को अपनी जान हथेली पर रखकर जाना पड़ता है.

उल्लेखनीय है कि उक्त गांव में स्वास्थ के दृष्टी से कोई तत्काल सेवा उपलब्ध नहीं है. जिसके लिए सावली या मूल में आने के लिए तकलीफे उठानी पड़ती है. रात के समय महिलाओं को की प्रसूति के लिए ले जाने के लिए कोई भी सुविधा नहीं है. जिसके लिए बैलबंडी का उपयोग करना पड़ता है. जहां गाड़ियों की कोई सुविधा नहीं है. यह समस्याएं प्रशासन को बताकर भी प्रशासन की ओर से इसकी ओर अनदेखी की जा रही है. गांव के रास्तों का तुरंत डांबरीकरण करे, अस्पताल जाने के लिए वाहनों की सुविधा की जाए, विकास से कोसों दूर इन गावों की ओर लोकप्रतिनिधी और प्रशासकीय अधिकारी ध्यान दे ऐसी मांगे गांवसियों की ओर से यहां के युवक भोजराज मुठ्ठावार ने की है.