नागपुर, 13 जून: अब जंगल के आसपास रहने वाले लोगों को बाघ की मौजूदगी की जानकारी पहले ही मिल सकेगी। मानव-बाघ संघर्ष को कम करने के लिए पेंच टाइगर रिजर्व के बफर ज़ोन में एक अत्याधुनिक AI आधारित टाइगर अलर्ट सिस्टम शुरू किया गया है।
यह सिस्टम जंगल में मौजूद जानवरों की चेतावनी वाली आवाज़ों (अलार्म कॉल्स) को सुनकर बाघ की गतिविधि का पता लगाता है और तुरंत अलर्ट जारी करता है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
यह तकनीक बायो-अकॉस्टिक्स (Bioacoustics) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित है। जंगल में जब सांभर, हिरण या अन्य वन्यजीव किसी शिकारी की मौजूदगी महसूस करते हैं, तो वे विशेष प्रकार की चेतावनी वाली आवाज़ निकालते हैं।
AI सिस्टम इन आवाज़ों का विश्लेषण कर यह पहचान लेता है कि आसपास बाघ या कोई अन्य बड़ा शिकारी मौजूद है या नहीं।
बाघ दिखने से पहले मिलेगा अलर्ट
जैसे ही सिस्टम को बाघ की मौजूदगी का संकेत मिलता है, वह तुरंत:
गांव में सायरन बजाता है
मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजता है
कंट्रोल रूम को सूचना देता है
वन विभाग और ग्रामीणों को सतर्क करता है
इससे लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर जाने और आवश्यक सावधानी बरतने का मौका मिल जाता है।
पेंच में सफल परीक्षण
इस तकनीक का हाल ही में पेंच बफर क्षेत्र के चारगांव में सफल परीक्षण किया गया। अधिकारियों का मानना है कि यह सिस्टम ग्रामीण क्षेत्रों में बाघों की आवाजाही की निगरानी करने और संभावित हादसों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मानव-बाघ संघर्ष कम करने की दिशा में बड़ा कदम
महाराष्ट्र में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ जंगलों के आसपास मानव-बाघ संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। ऐसे में यह AI आधारित तकनीक ग्रामीणों, वन विभाग और वन्यजीवों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो इसे महाराष्ट्र के अन्य टाइगर रिजर्व और संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।
बाघ आने से पहले बजेगा सायरन! Pench में AI का कमाल
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