
नागपुर. अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल चौथे दिन भी जारी रही. जैसे-जैसे इस हड़ताल का समय बढ रहा है, वैसे-वैसे ओपीडी में आए मरीजों की फजीहत हो रही है. शहर के दोनों बड़े अस्पताल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (मेडिकल) और इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (मेयो) की व्यवस्थाएं अब लड़खड़ाने लगी हैं. हालांकि सीनियर डॉक्टरों ने हाउस ऑफिसर के लिए नियुक्त स्नातक डॉक्टरों के साथ मोर्चा संभाल लिया है लेकिन मरीजों को रिस्पोंस कम मिल रहा है.
इसका कारण रेजिडेंट डॉक्टर्स का ओपीडी में आने वाले मरीजों से सीधे जुड़ाव होना सामने आया है. रेजिडेंट डॉक्टर्स लगातार नियम से ओपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज कर रहे थे. इनमें कई डॉक्टर तो ऐसे हैं जिनसे मरीज नियमित तौर पर इलाज के लिए जुड़े थे. अब नई व्यवस्था में वे दूसरे डॉक्टर्स से तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं. जिसके चलते मेडिसिन, शिशु, स्त्री एवं प्रसूति रोग, न्यूरो, न्यूरो सर्जरी, सर्जरी, ENT, नेत्र रोग विभाग, ऑन्कोलॉजी, कार्डियोलॉजी ओपीडी पर असर दिख रहा है.मरीजों की यह परेशानी कब हल होगी,इसका जवाब किसी के पास नहीं है.
बाहरी मरीज ज्यादा परेशान
रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल से सबसे ज्यादा परेशान शहर के बाहरी इलाकों से आए मरीज हैं. शहर के मरीज तो हड़ताल रुकने तक इंतजार कर लेंगे लेकिन अंचल के ग्रामीण इलाकों के साथ नागपुर से सटे दूसरे प्रदेशों से आए मरीजों के लिए हड़ताल भारी पड़ रही है. इसका कारण यह है कि ज्यादातर रेजिडेंट डॉक्टर्स मरीजों की नब्ज समझते हैं. क्यों कि उन्हें इलाज करते समय हो गया है. लेकिन हड़ताल के कारण डॉक्टर बदलने से उनको परेशानी हो रही है.
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