Published On : Wed, Apr 29th, 2015

60 साल की गंदगी वाली स्कैम इंडिया सरकार में थे पटेल, मोदी क्यों बनवा रहे उनकी मूर्ति

सत्ता के गलियारे से — कृष्णमोहन सिंह

Narendra-Modi-
नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी ने हाल ही कई देशों की  यात्रा के दौरान  कहा था कि वह 60 साल की  गंदगी साफ करना चाहते हैं. मोदी ने टोरंटो में कहा था कि पहले ‘स्कैम इंडिया’ था अब यह ‘स्किल इंडिया’ है. जिसको लेकर 28 अप्रैल को  कांग्रेस व विपक्ष ने राज्य सभा में प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण की मांग की और सदन नहीं चलने दिया. वैसे तो मोदी  अब अपने बड़बोले बयानों को लेकर लगातार विवाद का केन्द्र बनने लगे हैं, लेकिन उनके कुछ बयान  ऐसे गरूर भरे हैं जिसमें अपनी बड़ाई करने, अपनी पीठ खुद थपथपाने की चालाकी में वह विदेश तक में देश की बेईज्जती करने से बाज नहीं आ रहे हैं.

जर्मनी और कनाडा में उन्होंने यही किया. लेकिन उन्होंने अपने को भारत का अब तक का सबसे ईमानदार प्रधानमंत्री ( मोरारजी देसाई, वीपी सिंह व अटलबिहारी वाजपेई से भी अधिक) और अब तक की सबसे  साफ – सुथरी, भ्रष्टाचार विहिन सरकार प्रचारित करने के लिए गोरों की धरती पर जिस तरह भारत की 60 साल की सरकारों को गंदगी फैलाने वाली स्कैम इंडिया सरकार कही उससे उनकी मानसिकता का पता चलता है. और उससे यह भी पता चलता है कि जिस 60 साल की गंदगी वाली स्कैम सरकार की तरफ वह इशारा कर रहे हैं वह कांग्रेस की सरकार थी और उसी कांग्रेस की सरकार में सरदार बल्ल्भ भाई पटेल देश के पहले गृह मंत्री थे. जो गुजरात के थे. देश के पटेल आदि जातियों के वोट अपनी तरफ करने के लिए उसी पटेल की सबसे बड़ी मूर्ति यही नरेन्द्र दामोदर दास मोदी बनवा रहे हैं.

उसी कांग्रेस के नेता व प्रधानमंत्री रहे पीवी नरसिंह राव को भी पूजने, मूर्ति आदि बनवाने के बारे में राय बात यही मोदी शुरू कर दिये हैं. और राव भ्रष्टाचार के मामले में किस तरह जेल जाते-जाते बचे, उनके शासन में कितने घोटाले हुए थे इसके बारे में मोदी जानते ही होंगे, नहीं जानते होंगे तो भी उनके आंख कान बने खुफिया अफसर डोभाल से रिपोर्ट मिली ही होगी. ऐसे में नरेन्द्र मोदी एक तरफ देश में उन्ही कांग्रेस नेताओं को पूजने का उपक्रम करके उनके विरादरी के वोट को पटाने की चाल चल रहे हैं और विदेश में उन नेताओं की सरकारों को स्कैम वाली गंदी सरकार कह कर अपने को हरिश्चंद्र होने का प्रचार कर रहे हैं. इस बारे में एक बड़े राजनीतिक का कहना है कि दोहरे व महास्वार्थी चरित्र का इससे नायाब नमूना कहां मिलेगा.