Published On : Wed, Nov 28th, 2018

गोवर-रूबेला टीके को लेकर पालकों में भ्रम और डर

नागपुर: गोवर- रूबेला टीकाकरण की शुरुआत बुधवार से हुई है. लेकिन इस मुहीम को लेकर पालकों में काफी कन्फूजन है और भय भी. इंजेक्शन के रूप में होने से इस टीके का विद्यार्थियों से ज्यादा उनके पालकों में भय का माहौल है. ख़ास बात यह है कि अनेक निजी स्कूलों में टीका देने के लिए पालकों को मंजूरी (कंसेंट) लेटर भरकर देने की शर्त होने से इसका भय और बढ़ गया है.

जानकारी के अनुसार अनेक पालकों ने इस पर ऐतराज जताया है. उन्होंने विद्यार्थियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है. तो वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ विभाग ने ‘कंसेंट ‘ लेटर की जरूरत नहीं है उस उम्र के प्रत्येक विद्यार्थियों को यह टीका दिया जाएगा यह जानकारी दी है. गोवर और रूबेला बिमारी को समूल खत्म करने के लिए स्वास्थ विभाग द्वारा मंगलवार 27 नवंबर से राज्यभर में व्यापक टीकाकरण की मुहीम छेड़ी गई है. नागपुर ग्रामीण में टीकाकरण मुहीम का शुभारंभ मौदा के जिला परिषद् प्राथमिक स्कूल प्राथमिक आरोग्य केंद्र में हुआ. बुधवार 28 नवंबर से नागपुर में इस मुहीम की शुरुआत होगी और टीकाकरण की शुरुआत की जाएगी .

नागपुर जिले में कुल 10 लाख 61 हजार 672 लाभार्थियों की एंट्री कि गई थी. इसमें नागपुर के 4,21,408 स्कूल के बच्चे और आंगनवाड़ी के 62,716 लड़कों का समावेश है. महीने के 30 दिनों में 15 दिन स्कुल तो वहीं 15 दिन परिसरों में यह मुहीम छेड़ी जाएगी . रोजाना एक स्कूल के विद्यार्थियों को यह टीका दिया जाएगा. यह टीका सुरक्षित होकर पालकों ने अपने बच्चों को इसे दिलाने की अपील स्वास्थ विभाग ने की है.

जानकारी के अनुसार इस टीकाकरण को पालकों की ना नहीं है, लेकिन उनके प्रश्नों के जवाब देनेवाला कोई भी सक्षम अधिकारी सामने नहीं आने की वजह से पालकों में डर का वातावरण है. इसमें निजी स्कूलों ने इस टीकाकरण को देने पर पूरी तरह से पालक जवाबदार रहेंगे. ऐसा ‘ कंसेंट लेटर ‘ मांगने के कारण और ज्यादा मामला गड़बड़ हो गया है.

इसमें शिक्षाविभाग का कहना है कि ‘स्कूलों को कंसेंट लेटर पालकों से भरकर लेने के लिए नहीं कहा गया है. उन्हें केवल इस टीकाकरण की जानकारी दी गई है. गोवर के कारण भारत देश में हर साल 50 हजार लोगों की मौत होती है. गोवर के कारण मरीज के शरीर के ए-विटामिन का प्रमाण काफी कम होता है. रूबेला गर्भवती महिला को होने से उसका गर्भपात हो सकता है. बच्चों में मोतियाबिंदु, हार्ट से सम्बंधित बीमारिया, बहरापन, मतिमंद, शरीर का विकास रुकना यह बीमारिया हो सकती है. रूबेला यह पूर्णरूप से संक्रामक रोग है. आनेवाली पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए यह लसीकरण आवश्यक है. स्वास्थविभाग ने इस टीके को पूरी तरह से सुरक्षित बताया है.