
नागपुर – नागपुर के पारडी क्षेत्र में मंगलवार देर रात उस समय सनसनी फैल गई, जब 9 वर्षीय बालिका के साथ कथित तौर पर अश्लील कृत्य किए जाने के आरोप में आक्रोशित भीड़ ने एक युवक को घेरकर बेरहमी से पीट दिया। गंभीर रूप से घायल युवक को पुलिस ने भीड़ के कब्जे से छुड़ाकर उपचार के लिए मेयो अस्पताल पहुंचाया, जहां बुधवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतक की पहचान नारायण वैष्णव (35), निवासी शिव नगर, पारडी के रूप में हुई है। घटना के बाद इलाके में देर रात तक तनाव और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया। पारडी पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है।
बहाने से बालिका को घर ले जाने का आरोप
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात करीब 8 से 9 बजे के बीच नारायण वैष्णव पर 9 वर्षीय बालिका को बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि बालिका के माता-पिता मजदूरी का काम करते हैं और घटना के समय वे घर पर मौजूद नहीं थे।
आरोप है कि युवक ने बालिका को यह कहकर अपने साथ लिया कि उसके माता-पिता ने उसे घर पर रुकने के लिए कहा है। इसके बाद वह बालिका को अपने घर ले गया। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान उसके द्वारा बालिका के साथ कथित रूप से अश्लील कृत्य किए जाने की बात सामने आई।
घटना की जानकारी कुछ स्थानीय लोगों को हुई तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति देखी। देखते ही देखते यह बात पूरे परिसर में फैल गई और बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए।
70 से 80 लोगों की भीड़ ने घेरा
बालिका के साथ कथित घटना की जानकारी मिलते ही लोगों का गुस्सा भड़क उठा। देखते ही देखते करीब 70 से 80 लोगों की भीड़ आरोपी के घर के आसपास जमा हो गई। भीड़ ने नारायण को घेर लिया और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी।
रात करीब 11 से 12 बजे के बीच घटना की सूचना पुलिस नियंत्रण कक्ष को दी गई। इसी दौरान बालिका के परिजन भी शिकायत लेकर पुलिस थाने पहुंचे। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक मारपीट करने वाले कई लोग वहां से निकल चुके थे।
पुलिस ने घायल नारायण को भीड़ के बीच से बाहर निकाला। उसके शरीर पर गंभीर चोटें थीं और वह लहूलुहान अवस्था में मिला। तत्काल उसे उपचार के लिए मेयो अस्पताल ले जाया गया।
आईसीयू में चल रहा था उपचार
अस्पताल में नारायण की हालत गंभीर होने के कारण उसे आईसीयू में भर्ती किया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा था। हालांकि, बुधवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
मौत की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच और तेज कर दी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और मारपीट में कौन-कौन लोग शामिल थे।
मौत से पहले पुलिस को बताया था—8 से 10 लोगों ने पीटा
पुलिस के अनुसार, गंभीर रूप से घायल होने के बाद नारायण ने मौत से पहले पुलिस को दिए बयान में बताया था कि भीड़ में मौजूद करीब 8 से 10 लोगों ने उसके साथ मारपीट की थी। उसने यह भी बताया था कि वह हमलावरों को पहचान नहीं पाया।
पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने तक मारपीट करने वाले लोग वहां से फरार हो चुके थे। अब पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ की जा रही है।
पुलिस कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि युवक की पिटाई में वास्तव में कौन-कौन लोग शामिल थे।
गणेशोत्सव के कारण मौके पर पहले से मौजूद थी भीड़
बताया जा रहा है कि घटनास्थल के आसपास गणेशोत्सव का आयोजन चल रहा था। परिसर में स्थित शिव मंदिर के पास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इसी दौरान बालिका के साथ कथित घटना की जानकारी सामने आई।
सूत्रों के अनुसार, बालिका शोर मचाते हुए लोगों के बीच पहुंची और उसने अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। मासूम की बात सुनने के बाद वहां मौजूद लोगों में आक्रोश फैल गया और देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई।
पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम को अलग-अलग पहलुओं से जांच रही है।
पुलिस के सामने दोहरी चुनौती
इस घटना ने पुलिस के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर नाबालिग बालिका के साथ कथित अपराध की गंभीरता की जांच करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर आरोपी की भीड़ द्वारा की गई पिटाई से मौत के मामले में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है।
कानून के जानकारों के अनुसार, किसी आरोपी पर अपराध का आरोप कितना भी गंभीर क्यों न हो, उसे सजा देने का अधिकार न्यायालय का है। भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेकर किसी व्यक्ति की जान ले लेना अलग आपराधिक मामला बन सकता है।
आठ दिन में दूसरी घटना से बढ़ी चिंता
पारडी क्षेत्र की यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नागपुर में महज आठ दिन के भीतर भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने की दूसरी घटना सामने आई है।
29 सितंबर 2026 को मॉडल मिल कॉलोनी के पृथ्वीराज नगर में उषा धार्मिक के घर कथित लूटपाट का प्रयास करने वाले सुमेध उर्फ पराग गजभिए (29), निवासी नरसाला को भी लोगों ने पकड़कर पीटा था। बाद में उसकी मौत हो गई थी।
उस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया था। हालांकि, उसके शरीर पर अंदरूनी चोटों के निशान भी पाए गए थे। घटना के बाद भीड़ की मारपीट और उससे पैदा हुई दहशत को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने पुलिस और कानून-व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नागपुर में पहले भी सामने आ चुकी हैं भीड़ हिंसा की घटनाएं
नागपुर में भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेने की घटनाएं नई नहीं हैं। शहर के इतिहास में ऐसी कई घटनाएं दर्ज हैं।
2004 में अदालत परिसर में अक्कू यादव की हत्या
अगस्त 2004 में नागपुर जिला अदालत परिसर में कुख्यात अपराधी अक्कू यादव पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने हमला कर दिया था। भीड़ की मारपीट में उसकी मौत हो गई थी। यह घटना देशभर में चर्चित हुई थी और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छिड़ी थी।
2012 में तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या
9 मई 2012 को नागपुर के पारडी क्षेत्र के भरतवाड़ा में नाथ योगी संप्रदाय से जुड़े तीन बहुरूपियों पर बच्चा चोरी और महिलाओं से छेड़छाड़ के आरोप लगाते हुए भीड़ ने हमला कर दिया था। इस हमले में तीनों की मौत हो गई थी।
2017 में गोमांस ले जाने के संदेह में हमला
जुलाई 2017 में नागपुर ग्रामीण के जलालखेड़ा क्षेत्र में गोमांस ले जाने के संदेह में असीम अली नामक व्यक्ति के साथ भीड़ द्वारा मारपीट की घटना सामने आई थी। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
अब पुलिस के सामने आरोपियों की पहचान की चुनौती
पारडी की ताजा घटना में पुलिस अब घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मोबाइल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर भीड़ में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि मारपीट की शुरुआत किसने की, किन लोगों ने घायल युवक को घेरा और किन लोगों ने उसके साथ प्रत्यक्ष रूप से मारपीट की।
बालिका से जुड़े आरोपों की भी पुलिस स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कानून हाथ में लेने पर उठे सवाल
नाबालिग के साथ कथित अपराध की खबर से लोगों का आक्रोशित होना स्वाभाविक है, लेकिन आरोपी को अदालत के बजाय भीड़ द्वारा सजा दिए जाने की यह घटना कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
लगातार ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस भीड़ में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई करती है और साथ ही नाबालिग बालिका से जुड़े मूल अपराध की जांच कितनी तेजी से पूरी की जाती है।
फिलहाल पारडी पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और इलाके में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।



