
नागपुर – वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के सावनेर सब-एरिया अंतर्गत अदासा यूजी टू ओसी कोल यार्ड में आग की घटनाओं ने स्टॉक प्रबंधन और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
क्या हुआ : पिछले तीन महीनों में कोल यार्ड-1 में बार-बार आग लगने की घटनाएं हुई हैं। वहीं कोल यार्ड-2 में आरोप है कि पुराने, आग से प्रभावित जले हुए कोयले को नए स्टॉक में मिला दिया गया। इस वजह से करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन कोयले का स्टॉक और लगभग 1 लाख मीट्रिक टन कोयले के प्रभावित होने का अनुमान जताया जा रहा है। हालांकि इन आंकड़ों और पुराने कोयले के कथित मिश्रण की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
नागपुर टुडे ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है और याद दिलाया है कि अखबार ने पहले भी कोयला आपूर्ति और गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे।
चार बड़े सवाल जिनकी जांच जरूरी :
1. सरकारी संपत्ति स्वाहा, जिम्मेदार कौन ? आग से करोड़ों का नुकसान हुआ, सरकारी संपत्ति जली। जिम्मेदार अधिकारी कौन है, तय हो।
2. जांच के घेरे में स्टॉक प्रबंधन : कोल यार्ड-1 में आग कब-कब लगी, नुकसान कितना हुआ, उसके बाद सुरक्षा में क्या सुधार किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए। कोल यार्ड-2 में पुराने कोयले को नए में मिलाने के आरोप की स्वतंत्र जांच जरूरी।
3. जिम्मेदारी तय हो : अदासा प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष तहकीकात होनी चाहिए। यदि सुरक्षा में लापरवाही, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलें तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए और सरकारी संपत्ति के वास्तविक नुकसान का आकलन भी कराया जाए।
4. इत्तेफाक या लापरवाही, कोई बड़ा खेल ? कोयले की गुणवत्ता, ग्रेड और स्टॉक प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आग की घटनाओं ने संदेह बढ़ाया है। हालांकि किसी साजिश या सबूत मिटाने के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में अटकलों के बजाय निष्पक्ष जांच, पारदर्शी रिपोर्ट और जवाबदेही तय करना जरूरी है। पुराने और नए कोयले की मात्रा, गुणवत्ता रिपोर्ट, वजन पर्चियों तथा स्टॉक रजिस्टर का मिलान किया जाए। यह भी स्पष्ट हो कि आग प्रभावित कोयले को अलग रखने और उसकी गुणवत्ता जांचने के निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं।
जनता और कोयला उपभोक्ताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग CVC या सीबीआई से की है।



