
गोंदिया। विश्व पर्यावरण दिवस यानी धरती को हरियाली और वन संरक्षण की सौगात देने का दिन। लेकिन आज यह पावन दिवस महज एक सरकारी औपचारिकता और कागजी संकल्प बनकर रह गया है। पेड़-पौधे और हरियाली सिर्फ हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि बादलों को बरसने का न्यौता भी देते हैं। जल ही जीवन है, अमृत है और इस अमृत की रक्षा के लिए वृक्षों का होना बेहद जरूरी है। वृक्ष इंसान के सबसे सच्चे मित्र हैं। आज हमारा देश विकास की अंधी दौड़ में दौड़ रहा है-चारों तरफ चौड़ी सड़कें बन रही हैं, कारखाने-फैक्ट्रियां खड़ी हो रही हैं और प्रदूषण का ग्राफ आसमान छू रहा है। लेकिन अफसोस! जिस रफ्तार से पेड़ काटे जा रहे हैं उस रफ्तार से लग नहीं रहे इसी कड़वे सच का आईना दिखाने के लिए गोंदिया की ‘वृक्ष धरा फाउंडेशन’ ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर एक अनोखी और आक्रामक ‘ऑक्सीजन मास्क रैली’ निकाली।
लेकिन साफ कर दें कि यह महज कोई आम रैली नहीं थी, बल्कि पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने वाले सिस्टम और सरकार के खिलाफ एक तीखा ‘निषेध प्रदर्शन’ था।
चेहरे पर मास्क, हाथों में पेड़: जय स्तंभ से अंबेडकर चौक तक गूंजी आवाज
वृक्ष धरा फाउंडेशन संस्था के पदाधिकारी ओम बारेवार ने बताया कि शुक्रवार, 5 जून को इस रैली की शुरुआत गोंदिया के जय स्तंभ चौक से हुई। रैली में शामिल पर्यावरण वीरों ने चेहरों पर ऑक्सीजन मास्क लगा रखे थे और हाथों में सजीव पेड़ थामे हुए थे। यह आक्रोश रैली जय स्तंभ चौक से रवाना होकर गांधी प्रतिमा, चांदनी चौक, दुर्गा चौक, गोरेलाल चौक और नेहरू चौक होते हुए डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर चौक पहुंची, जहां महापुरुष की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर रैली का समापन हुआ।
बिना सरकारी मदद, जेब के पैसे से पर्यावरण को सींच रहा ‘वृक्ष धरा फाउंडेशन’
इतिहास गवाह है कि पर्यावरण को बचाने के लिए सरकारी भीख की जरूरत नहीं होती। 2017 में स्थापित हुई इस संस्था ने अब तक 15,000 से अधिक पेड़ लगाकर उन्हें पाला-पोषा है। ओम बारेवार ने बताया कि साल 2026 के लिए संस्था ने 1100 पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा है। ये पेड़ ‘कदम’, ‘बादाम’ और ‘नीम’ जैसी बेहतरीन प्रजातियों के होंगे, जिनकी हाइट कम से कम 6 फीट होगी। इन सभी पेड़ों को गोंदिया विधानसभा क्षेत्र में लगाया जाएगा।प्रदूषण बढ़ रहा है, उस अनुपात में धरती का हरियाली से श्रृंगार नहीं किया जा रहा।
फंडिंग को लेकर संस्था ने सरकार की पोल खोलकर रख दी
पिछले 3 सालों से संस्था सरकार से संपर्क कर रही है, लेकिन प्रशासन की तरफ से एक रूपए की भी मदद नहीं मिली। फाउंडेशन के सभी 81 सदस्य कोई नेता या करोड़पति नहीं हैं, बल्कि प्राइवेट जॉब, नौकरी और अपना छोटा-मोटा व्यापार करने वाले आम नागरिक हैं। ये सभी अपनी गाढ़ी कमाई से हर साल 50,000 रुपये से अधिक का डोनेशन इकट्ठा करते हैं। इसके अलावा, समाज का कोई व्यक्ति अगर अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह या पुण्यतिथि पर पेड़ लगाना चाहता है, तो वह 2100 रूपए या 600 रुपए का योगदान देता है। इसी जनता के पैसे से संस्था ने नागरा में 1000 पेड़ और नागरा -बरबसपुरा मोक्ष धाम’ में सीमेंट बैरिकेडिंग के साथ 100 पेड़ सुरक्षित खड़े किए हैं।
टेंडरों में करोड़ों का खेल, हाईवे पर सिर्फ सीमेंट का मलबा!
संस्था के पदाधिकारी ओम बारेवार ने सीधे जिला प्रशासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि गोंदिया जिला प्रशासन हर साल पेड़ों के नाम पर 5 से 6 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाता है। बड़े-बड़े टेंडर पास होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में पेड़ गायब हैं। इसका सबसे बड़ा और जीता-जागता उदाहरण गोंदिया से बालाघाट रोड पर बन रहा फोर-लेन मार्ग है, जहां हाईवे निर्माण के नाम पर हजारों हरे-भरे पेड़ों की बेरहमी से बलि दे दी गई।
“केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी जी का साफ निर्देश है कि रोड के बाजू में 5 फीट की जगह छोड़कर अनिवार्य रूप से पेड़ लगाए जाएं। साथ ही जिस एरिया से पेड़ काटे गए हैं, उसी एरिया में नए पेड़ लगने चाहिए। लेकिन हाईवे के ठेकेदारों और सड़क निर्माताओं ने जगह ही नहीं छोड़ी। जनता की आंखों में सरेआम धूल झोंकी जा रही है।
वृक्ष धरा फाऊंडेशन , सिस्टम के खिलाफ एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट जाएगा
जब हाईवे के टेंडर में साफ-साफ लिखा है कि उस स्थान पर 6 फीट ऊंचे पेड़ लगाए जाएंगे, तो फिर वो पेड़ डिवाइडर पर दिख क्यों नहीं रहे? हकीकत यह है कि डिवाइडर के बीच की खाली जगह में सीमेंट का मलबा और कचरा भरा पड़ा है, और अधिकारी ‘शो-पीस’ (दिखावटी) पेड़ लगाने का नाटक कर रहे हैं। रावणवाड़ी के आगे जो थोड़े-बहुत पेड़ लगाए भी गए, वे देखरेख के अभाव में मर चुके हैं।इसी धोखेबाजी के खिलाफ वृक्ष धरा फाउंडेशन ने विश्व पर्यावरण दिवस पर इस ‘मास्क रैली’ के जरिए अपना प्रचंड विरोध दर्ज कराया है। संस्था ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए कहा कि, “हमारा अगला कदम कानूनी होगा। हम सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सारे पुख्ता दस्तावेज और कागज इकट्ठे कर रहे हैं। इसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाएगा और पाई-पाई का जवाब मांगा जाएगा।
पेट में दर्द है, तो क्या सिर का ऑपरेशन करोगे?
संस्था ने सरकार के कुप्रबंधन पर एक तीखा और तार्किक सवाल दागते हुए कहा कि- “अगर मेरे पेट में दर्द है, तो क्या डॉक्टर सिर का ऑपरेशन करेगा? बिल्कुल नहीं! ठीक इसी तरह, जहां से तुमने पेड़ काटे हैं, पेड़ वहीं वापस लगाओ। तुम पेड़ कहीं और दूर जंगल में लगा दोगे, तो इस रूट की जनता और पर्यावरण को उसका क्या लाभ मिलेगा? अगर पर्यावरण को सच में बचाना है, तो वृक्षारोपण उसी प्रभावित स्थान पर होना चाहिए।”
अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि ‘वृक्ष धरा फाउंडेशन’ के इस धांसू और जमीनी आंदोलन के बाद कुंभकर्णी नींद में सोए जिला प्रशासन और हाईवे के ठेकेदारों की नींद टूटती है या नहीं ?
रवि आर्य









