Published On : Fri, Oct 8th, 2021
By Nagpur Today Nagpur News

CAMIT की मांग पर नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने निगम किराया 2019 जीआर में संशोधन का दिया आश्वासन

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किसी भी कठोर कार्रवाई पर लगाई रोक


नागपुर -चेंबर ऑफ एसोसिएशंस ऑफ़ महाराष्ट्र इंडस्ट्री एंड ट्रेड (कैमिट)का एक प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष दीपेन अग्रवाल के नेतृत्व में तथा किशोर अप्पा पाटिल विधायक पचोरा और बंडूदादा काले, पूर्व मेयर जलगांव की गरिमामय उपस्थिति में नेपेंसिया रोड़, मुंबई स्थित एम‌एस‌आर‌डीसी कार्यालय में शहरी विकास और लोक निर्माण मंत्री एकनाथ शिंदे से राज्य भर मेंं नगर निगम गालाधारकों (किरायेदारों) के सामने आने वाली कठिनाइयों पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की।

CAMIT अध्यक्ष दीपेन अग्रवाल ने एकनाथ शिंदे का स्वागत किया और उन्हें ज्ञापन सौंपकर उनसे हस्तक्षेप करने और नगर निगमों द्वारा किराए में एकतरफा अत्यधिक वृद्धि के कारण राज्य भर मेंं नगर निगमों के किरायेदारों के सामने आने वाली समस्याओं को हल करने का अनुरोध किया।

CAMIT के सचिव मितेश प्रजापति ने कहा कि नगर निगमों द्वारा अपनी बाजार समिति संपत्तियों के लिए किराए में एकतरफा भारी वृद्धि 100 से 1000 गुना के बीच और कुछ मामलों में 1000 गुना से अधिक है। किरायेदारों के इस एकतरफा निर्णय को मानने में विफल रहने पर, अधिकारी किरायेदारों को बेदखल करने की धमकी दे रहे हैं। निगम के इस लापरवाह कदम ने कई छोटे और सीमांत व्यापारियों और उनके परिवार के कई स्वरोजगार (एकमात्र) रोटी कमाने वाले की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। प्रशासन की ओर से इस अनुचित और मनमानी कार्रवाई के परिणामस्वरूप छोटे और सीमांत व्यापारियों (किरायेदारों) में आक्रोश और अशांति है।

जलगांव के राजेंद्र पाटिल, सुरेश पाटिल और तेजस देपुरा ने मंत्री शिंदे को इस तथ्य से अवगत कराया कि राज्य प्रशासन ने सितंबर 2019 में कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना महाराष्ट्र नगर निगम (पट्टे का नवीनीकरण या अचल संपत्ति का हस्तांतरण) नियमों को अधिसूचित किया। तत्कालीन प्रशासन ने आपत्तियों एवं सुझावों को लेकर मई 2019 में प्रकाशित प्रारूप नियमावली के उत्तर में प्रस्तुत आपत्तियों पर न तो व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया और न ही आपत्तियों पर विचार किया। इस प्रकार, 2019 की अधिसूचना को वापस लिया जाना चाहिए और जलगांव नगर निगम द्वारा जबरदस्ती कार्रवाई पर रोक लगाई जानी चाहिए।

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राज्य भर में गालाधारकों की ओर से दीपेन अग्रवाल ने एकनाथ शिंदे से हस्तक्षेप करने और सितंबर 2019 की अधिसूचना को वापस लेने का अनुरोध किया और सुझाव दिया कि-
क) उन मामलों में जहां केवल भूमि को निगम द्वारा पट्टे/लाइसेंस दिया गया है, वार्षिक पट्टा किराया/लाइसेंस शुल्क मूल्य के 1% पर तय किया जाना चाहिए रेडी रेकनर के अनुसार;
ख) ऐसे मामलों में जहां दुकान/ओट्टा को निगम द्वारा लीज/लाइसेंस दिया गया है, वार्षिक लीज रेंट/लाइसेंस शुल्क निर्माण के मूल्य के 2% की दर से और रेडी रेकनर के अनुसार आनुपातिक भूमि के मूल्य के 1% की दर से निर्धारित किया जाए.

ग) प्रत्येक तीसरे वर्ष लीज रेंट/लाइसेंस शुल्क में 10% की वृद्धि.
घ) नवीनीकरण 30 वर्ष की लीज/लाइसेंस अवधि के लिए हो.
ई) पट्टा/लाइसेंस हस्तांतरणीय होना चाहिए और रक्त संबंध के भीतर स्थानांतरण के लिए एक महीने के किराए/शुल्क के बराबर हस्तांतरण शुल्क लिया जाना चाहिए और रक्त संबंध के बाहर स्थानांतरण के लिए तीन महीने के किराए/शुल्क के बराबर और
च) सहमत नया पट्टा किराया/ लाइसेंस शुल्क वित्त वर्ष 2021-22 से लागू किया जाए। पहले की अवधि के लिए लीज रेंट/लाइसेंस शुल्क तत्कालीन प्रचलित किराए/शुल्क के अनुसार वसूला और एकत्र किया जाए।

एकनाथ शिंदे ने धैर्यपूर्वक सभी बिंदुओं को सुनने के बाद तुरंत किसी भी कठोर कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया क्योंकि उन्हें विश्वास था कि जीआर दिनांक 13 सितंबर 2019 को संशोधित करने की आवश्यकता है और उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को जल्द से जल्द ऐसा करने का आश्वासन भी दिया।

बैठक में मुख्य रूप से भूषण गगरानी सचिव नगर विकास,सतीश कुलकर्णी आयुक्त और जलगांव नगर निगम के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थित थे। मितेश प्रजापति ने गालाधारकों/किरायेदारों की ओर से मंत्री को उनके मूल्यवान समय और प्रतिनिधिमंडल की प्रस्तुतियों पर अनुकूल निर्णय के लिए धन्यवाद दिया।

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