Published On : Sat, Apr 21st, 2018

विमानतल पर ‘ओला’ का खोखा

नागपुर: ऑनलाइन सेवा देने वाली कंपनी बड़े लुभावने ढंग से ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करती है. जब इनके छुपे उद्देश्यों और खामियों से ग्राहकों का सामना होता है तो ठगा सा महसूस करते हैं. ऐसे व्यवसाय करने वालों पर केंद्र सरकार को या तो पाबंदी लाना चाहिए या फिर कड़े नियम के तहत व्यवसाय करने की अनुमति देना चाहिए. ऐसा ही कुछ आलम है ‘ओला’ का.

‘ओला’ ने जगह पर सुविधा देने का खम्ब ठोंक वादा करने के साथ अपने समूह के साथ जुड़े वाहनों की संख्या लाखों में बताने वाली इस कंपनी की सुविधा विमानतल में फिस्सडी साबित हो रही है.

नागपुर विमानतल से निकलने के बाद १०० कदम पर पार्किंग की ओर ‘ओला’ का काउंटर है. इस काउंटर पर कोई नहीं रहता. क्यूंकि इस ओर ‘ओला’ के आकर्षण से ग्राहक खींचे चले आते हैं. इसलिए जैसे ही विमान आगमन का समय होता है, ‘ओला’ के खोखा के इर्द-गिर्द पार्किंग में खड़े वाहन चालक जमा होकर ग्राहकों को मनमाना किराया वसूलने के लिए रिझाते नज़र आ जाएंगे. क्यूंकि विमानतल शहर के बाहर है इसलिए अमूमन ग्राहक इसके झांसे में आ जाते हैं.

त्रस्त विमान यात्रियों ने एयरपोर्ट प्रशासन से तत्काल ‘ओला’ प्रबंधन पर ग्राहकों को समय पर सेवा न देने के जुर्म में उचित कार्रवाई की मांग की है.
आगमन द्वार पर ‘डॉग स्क्वाड’ ?

विमानतल के आगमन द्वार पर लावारिस कुत्ते द्वार के समक्ष घूमते और बिंदास बैठे दिख जाएंगे. मानो विमानतल की सुरक्षा का जिम्मा संभल रहे सीआईएसएफ का ‘डॉग स्क्वाड’ हो.

आगमन द्वार पर विमान आने के १० मिनट बाद काफी भीड़ हो जाता है. विमानतल से बाहर आने और उन्हें लेने के लिए खड़े लोगों की भीड़ में उक्त आवारा कुत्तों का डर भी समाया रहता है. यह सबकुछ सीआईएसएफ सुरक्षा कर्मियों के समाने होता रहता है लेकिन उसे दूर तक खदेड़ने की बजाय लोगों को खदेड़ने में सुरक्षा कर्मी ज्यादा सक्रिय दिखते हैं. समय रहते आवारा कुत्तों को सम्पूर्ण विमानतल से खदेड़ा नहीं गया तो परिसर में हादसा हो सकता है, तब सिवा फ़ज़ीहत के कुछ नहीं रह जाएगा.