Published On : Wed, Jan 30th, 2019

अब आतंरिक व्यापार वाणिज्य मंत्रालय के मातहत होगा संचालित

नागपुर: केंद्र सरकार ने देश के लाखों ट्रेडर्स की वर्षो पुरानी माँग को मान लिया है। इस फ़ैसले को देश के भीतर आतंरिक व्यापार कर रहे व्यापारियों को बड़ी राहत मानी जा रही है। ट्रेड भले ही व्यापार से जुड़ा हो लेकिन इसकी निगरानी और नियम तय करने के अधिकार उपभोक्ता मंत्रालय के अधीन थे। देश के लाखों ट्रेडर्स का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था कैट बीते 10 वर्षो से इसे वाणिज्य मंत्रालय के अधीन सौंपने की माँग कर रही थी। अगस्त 2018 में दिल्ली में हुए कैट के अधिवेशन में वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु उपस्थित थे। इस दौरान भी कैट ने देश के लाखों ट्रेडर्स के अधिकारों के संरक्षण के लिए देश में होने वाले ट्रेड व्यापार को वाणिज्य मंत्रालय के अधीन लाने की अपील की थी। इस माँग को मानते हुए केंद्र सरकार ने अब ट्रेड व्यापार को वाणिज्य मंत्रालय के अधीन कर दिया है। इस संबंध में राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा राजपत्र बुधवार को जारी किया गया। देश में होने वाले आतंरिक व्यापार के लिए उपभोक्ता मंत्रालय के अधीन काम करने वाले विभाग डिपार्मेंट ऑफ़ इंड्रस्टियल प्लानिंग एंड प्रमोशन का नाम बदलते हुए इसे डिपार्मेंट ऑफ़ प्रमोशन ऑफ़ इंड्रस्टी एंड इंटरनल ट्रेड कर दिया है। यह विभाग अब उपभोक्ता मंत्रालय से वाणिज्य मंत्रालय को हस्तांतरित कर दिया गया है। कैट ने इस फ़ैसले पर ख़ुशी जाहिर करते हुए इसे आंतरिक व्यापार से जुड़े देश के करोडो व्यापारियों के लिए बड़ी राहत करार दी है।

फ़ैसले से देश के ट्रेडर्स के अधिकारों का होगा संरक्षण
कैट के अध्यक्ष सीए बी सी भारतीय ने कहाँ की केंद्र के इस फैसले से हमने एक लंबी लड़ाई को जीत लिया है। ट्रेडर्स का अप्रत्यक्ष तौर से वाणिज्य मंत्रालय के मातहत काम करता है लेकिन मंत्रालय की नियमावली की अड़चनों की वजह से हमारे अधिकार सुरक्षित नहीं थे। हमारे काम का नियम और निगरानी अब तक उपभोक्ता मंत्रालय के अधीन होती थी। उपभोक्ता मंत्रालय ग्राहकों के अधिकारों का संरक्षण का काम करता है इसलिए हमेशा उसी हिसाब से नियम बनाने जाते थे। ग्राहकों के अधिकारों का संरक्षण करने के काम में ट्रेडर्स की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता था। अब ट्रेडर्स वाणिज्य मंत्रालय के अधीन काम करेंगे। जिससे तैयार होने वाली पॉलिसी में हमारे अधिकारों की रक्षा होगी। भारतीय ने कहाँ कि यह फैसला लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ी जटिलता को समाप्त करने का कदम उठाया है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के तहत विदेश से आने वाला ट्रेडर वाणिज्य मंत्रालय के अधीन काम करता था जबकि देश के भीतर व्यापार करने वाला ट्रेडर उपभोक्ता मंत्रालय के मातहत अपना व्यापार करता था।