Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!
    | | Contact: 8407908145 |
    Published On : Fri, Nov 17th, 2017
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    स्थानीय केंद्रीय मंत्री के कथनी और करनी में फर्क!

    Nitin Gadkari
    नागपुर: स्थानीय भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जिले के ५० हजार युवकों को रोजगार देने के ध्येय को बारंबार प्रचारित करते नजर आते हैं. दूसरी ओर उनके संसदीय क्षेत्र के सरकारी महकमों में प्रशासन ‘६० प्लस’ को सेवारत करने का सिलसिला शुरू रखना समझ से परे है. क्या प्रशासन पर उनकी पकड़ नहीं या फिर उनकी कथनी और करनी में सचमुच फर्क है.

    गडकरी जब से सांसद फिर मंत्री बने, उसके बाद उन्होंने अनगिनत सार्वजानिक सभाओं में हिस्सा लिया. इनमें व्यावसायिक कार्यक्रमों का भी समावेश कमोबेस बराबरी का रहा है. अमूमन प्रत्येक सभाओं में उन्होंने शहर से हो रहे युवाओं के पलायन पर खेद जताया. इसलिए शहर में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न प्रयासों की वस्तुस्थिति से भी उपस्थितों को वाकिफ करवाया. अंत में हमेशा उन्होंने अपने ध्येय का जिक्र करते हुए शहर व ग्रामीण के ५० हजार युवकों को जिले में ही रोजगार दिलवाने का वादा भी करते देखा गया है.

    परन्तु यह क्या एक ओर उनके सकारात्मक बयान तो दूसरी ओर उनके ही पक्ष की मनपा में तीन टर्म से सत्ता में काबिज रहने के बाद ही मनपा में शहर के सक्षम युवकों को नौकरी देने के बजाय अपने चहेते अधिकारी-कर्मियों जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उन्हें अवसर दिए जाने का क्रम जारी है. इस क्रम में दर्जनों सेवानिवृत्तों को सत्तापक्षों के सिफारिशों पर उनके मनपसंद विभागों में मोटी मासिक वेतनश्रेणी पर पुनः नियुक्त किए गए. क्या शहर में सक्षम युवकों को इतनी किल्लत है.

    सवाल यह है कि क्या गडकरी की मनपा और मनपा में उनके ही पक्ष के सत्ताधारी पदाधिकारियों पर पकड़ ढीली है. या फिर ‘डीएफ’ बनाम ‘एनजी’ की तनातनी के मध्य शहर के दो फाड़ हो गए हैं. इस चक्कर में शहर के युवकों का विश्वास दिनोंदिन राजनेताओं से उठता जा रहा है. इससे नाराज होकर शहर के साधारण, तकनीकी युवक सह बेरोजगार सतत पलायन कर अन्य शहर, राज्यों में बसते जा रहे हैं. इस चक्कर में नागपुर शहर ‘सेवानिवृत्तों का शहर’ बन कर रह गया है.

    या फिर सत्ताधारी नेताओं की कथनी और करनी में बड़ा फर्क है. इसलिए तो पिछले लॉस-विस चुनाव में पृथक विदर्भ के निर्माण की घोषणा कर आज मुकर गए. यह भी हो गया होता तो बतौर राजधानी नई-नई रोजगार के अवसरों का ईजाद हो गया होता और बेरोजगारी लगभग समाप्ति के कगार तक पहुंच गया होता.


    Stay Updated : Download Our App
    Mo. 8407908145